'मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' मैन्युफैक्चरिंग विजन का आधार होना चाहिए: राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग विजन को मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई से कहा कि वे उभरते हुए ग्लोबल ट्रेड के मौकों का फायदा उठाएं और खुद को ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव कंपनियों में बदलें।
ग्रेटर नोएडा में एमएसएमई कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने छोटे और मध्यम उद्योगों से अपने टर्नओवर का एक हिस्सा रिसर्च, डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में निवेश करने का आग्रह किया।
उन्होंने उन्हें अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, आईआईटी, रिसर्च संस्थानों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 का विजन एक ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करता है जो मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में अग्रणी हो, और रणनीतिक व आर्थिक क्षमताओं में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ देश के युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करे।
बदलती वैश्विक सप्लाई चेन और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स की बढ़ती मांग पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ये घटनाक्रम भारतीय एमएसएमई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा अमेरिका, यूके, न्यूजीलैंड, ओमान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से व्यापारिक साझेदारी को गहरा करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ये एफटीए नेटवर्क एमएसएमई और उद्योगों के लिए वैश्विक व्यापार और निर्यात के अवसरों का एक विशाल भंडार खोलते हैं। उन्हें क्रेडिट गारंटी विस्तार और जीएसटी युक्तिकरण जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और व्यापार समझौतों का पूरा लाभ उठाना चाहिए और भारतीय उत्पादों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में एमएसएमई की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में लगभग 8 करोड़ हो गई है, जो देश में बढ़ते उद्यमिता इकोसिस्टम को दर्शाता है।
उन्होंने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, ऑटोनॉमस सिस्टम, एडवांस्ड मैटेरियल्स, स्पेस और क्वांटम टेक्नोलॉजीज को ऐसे क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया जो एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा, भारतीय एमएसएमई को गुणवत्ता और विश्वसनीयता के माध्यम से वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बनानी चाहिए। रक्षा क्षेत्र में इन गुणों का महत्व और भी अधिक है, जहां हर कंपोनेंट की विश्वसनीयता सीधे रक्षा बलों की परिचालन प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मुंबई : कूपर अस्पताल में बुर्का पहनने की वजह दो महिलाओं को एंट्री से रोकने का आरोप, नेताओं ने की आलोचना
मुंबई, 1 सितंबर (आईएएनएस)। मुंबई के कूपर अस्पताल के प्रसूति (मेटरनिटी) वार्ड में कथित तौर पर बुर्का पहनने के कारण दो महिलाओं को प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसकी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की है।
एक दिन पहले, अधिवक्ता जहांआरा ने आईएएनएस को बताया था कि उन्हें बुर्का पहनने के कारण मेटरनिटी वार्ड में जाने से रोका गया।
उन्होंने दावा किया, मैंने बात की और अपना परिचय भी दिया, लेकिन फिर भी मुझे रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि आप कोई भी हों, हम आपको बुर्का पहनकर अंदर नहीं जाने देंगे। जब मैंने वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि बुर्का पहनकर अंदर आने वाले लोग बच्चों को चुरा लेते हैं।
दूसरी महिला, अधिवक्ता जहरा शेख ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो असली हैं।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, मेरे साथ भी अंधेरी स्थित कूपर अस्पताल में यही घटना हुई। मैं अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। मेटरनिटी वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों ने मुझसे कहा कि अंदर जाने से पहले बुर्का उतारना होगा। मैंने उन्हें अपना चेहरा दिखाया और जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा कारणों से है।
इस घटना की निंदा करते हुए एनसीपी (शरद पवार) की प्रवक्ता विद्या चव्हाण ने कहा, अगर उनका धर्म उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति देता है, तो किसी चौकीदार या व्यक्ति को पूछने का अधिकार नहीं है कि वे बुर्का क्यों पहन रही हैं? भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा, मुस्लिम महिलाओं को इस तरह परेशान करना गलत है।
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, यह पूरी तरह गलत है। यह बुनियादी मानवता का मामला है। यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पताल है, हालांकि ऐसी घटना किसी भी अस्पताल में नहीं होनी चाहिए। अस्पताल किसी व्यक्ति को उसके धर्म, चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या किसी अन्य धर्म का, उसके आधार पर आंकने की जगह नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस नेता चरण सिंह सप्रा ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
वहीं, एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, इस तरह का व्यवहार देश के लिए नुकसानदायक है। जो लोग रोजाना मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं, वे बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, मुस्लिम महिलाएं बुर्का और हिजाब पहनती हैं और आगे भी पहनती रहेंगी। उन्हें रोका नहीं जा सकता। हम मांग करते हैं कि सिर्फ बुर्का पहनने के कारण महिला को अस्पताल में प्रवेश से रोकने वाले कांस्टेबल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर वारिस पठान ने कहा, बीएमसी को अपने संसाधनों से अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।
शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि कोई भी जानबूझकर ऐसा काम नहीं करेगा। हर व्यक्ति को अपने धर्म की परवाह किए बिना पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना भी नगर निगम और अस्पताल की जिम्मेदारी है।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
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