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होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया की बिक्री अगस्त में आठ प्रतिशत बढ़कर 5.79 लाख इकाई परपूजा में इस्तेमाल होने वाली रोली सिंदूर से कैसे है अलग? जानें रोली का धार्मिक महत्व और सही इस्तेमाल
Roli ka dharmik mahatva: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, हवन या शुभ कार्य की शुरुआत में रोली का इस्तेमाल अत्यंत आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि रोली के बिना तिलक अधूरा माना जाता है, इसी वजह से देवी-देवताओं की पूजा से लेकर कलश स्थापना और यजमानों को तिलक लगाने तक, हर जगह रोली का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि हर हिंदू घर की पूजा थाली में रोली का एक डिब्बा जरूर मौजूद रहता है।
रोली को क्यों माना जाता है पवित्र?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रोली के लाल रंग को शक्ति, ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह रंग सूर्य की ऊर्जा और सकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है, इसी वजह से इसे तिलक के रूप में माथे पर लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि रोली का लाल रंग देवी शक्ति और उनकी कृपा का भी प्रतीक माना जाता है, इसी वजह से देवी पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
रोली और सिंदूर में क्या है अंतर?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, रोली और सिंदूर, दोनों ही लाल रंग के होने के बावजूद अलग-अलग उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। मान्यता है कि रोली को हल्दी और चूने के मिश्रण से तैयार किया जाता है, और इसे मुख्य रूप से पूजा-पाठ, तिलक और कलश स्थापना में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सिंदूर को मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने सुहाग के प्रतीक के रूप में मांग में भरती हैं। इसी वजह से दोनों का धार्मिक महत्व और इस्तेमाल का तरीका अलग-अलग माना जाता है।
रोली से तिलक लगाने का सही तरीका
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोली से तिलक लगाते समय इसमें अक्षत मिलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि तिलक को हमेशा अनामिका उंगली से माथे के बीचोंबीच लगाना चाहिए, और इस दौरान मन में भगवान का ध्यान करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसके अलावा किसी भी शुभ कार्य में यजमान या अतिथियों को रोली से तिलक लगाकर स्वागत करने की भी परंपरा प्रचलित है।
किन अवसरों पर होता है रोली का खास इस्तेमाल
हिंदू परंपरा में हवन, कलश स्थापना, रक्षाबंधन, भाई दूज और विवाह जैसे शुभ अवसरों पर रोली का इस्तेमाल विशेष रूप से किया जाता है। मान्यता है कि रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले रोली से तिलक करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना का प्रतीक होता है।
आज भी हर पूजा में इस्तेमाल होती है रोली
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन रोली का इस्तेमाल आज भी उतना ही महत्वपूर्ण बना हुआ है। आज भी हर छोटी-बड़ी पूजा और शुभ अवसर पर रोली से तिलक लगाना एक अनिवार्य परंपरा मानी जाती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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