ममता बनर्जी की भतीजी का शव मिला, सुसाइ़ड की आशंका:शिक्षक भर्ती घोटाले में चली गई थी नौकरी, 3 सालों से डिप्रेशन में थीं
बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टी मुखर्जी ने मंगलवार को बीरभूम के कुसुम्बा गांव में सुसाइड कर लिया। ब्रिष्टि, ममता के चचेरे भाई और तृणमूल नेता निहार मुखर्जी की बेटी थीं। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि ब्रिष्टी ने सुसाइड किया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। 2024 में हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थीं 25,753 नौकरियां शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल, 2024 को अवैध रूप से प्राप्त सभी 25,753 नौकरियां रद्द कर दी थीं। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो लोग लंबे समय से अवैध तरीके से काम कर रहे हैं, उन्हें ब्याज समेत सैलरी लौटानी होगी। 2 पॉइंट में समझें शिक्षक भर्ती घोटाले का पूरा मामला... पश्चिम बंगाल सरकार ने 2016 में स्टेट लेवल सिलेक्शन टेस्ट-2016 (SLCT) के जरिए सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती की थी। तब 24,640 रिक्त पदों के लिए 23 लाख से अधिक लोगों ने भर्ती परीक्षा दी थी। इस भर्ती में 5 से 15 लाख रुपए तक की घूस लेने का आरोप है। मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट को कई शिकायतें मिली थीं। भर्ती में अनियमितताओं के मामले में CBI ने राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी और SSC के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। अर्पिता पेशे से मॉडल थीं। सुप्रीम कोर्ट ने दी है राहत हालांकि, शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च, 2025 दिए आदेश में करीब 26,000 बर्खास्त शिक्षकों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा था कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति रद्द हुई है, वे नई चयन प्रक्रिया पूरी होने तक पढ़ाना जारी रख सकते हैं। हालांकि, उनका नाम 2016 के घोटाले मामले में नहीं आया हो। कोर्ट ने कहा- हम नहीं चाहते कि बच्चों की पढ़ाई कोर्ट के फैसले से बाधित हो। --------------
जीडीपी गणना में बार-बार बदलाव कर आंकड़े अपने हिसाब से सेट कर रही सरकार: कांग्रेस
नयी दिल्ली, एक सितंबर कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों की ‘‘बाजीगरी’’ के जरिये देश की आर्थिक स्थिति की ‘‘बदहाल हकीकत’’ छिपा रही है। मुख्य विपक्षी दल ने यह सवाल भी किया किया कि अगर अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो परिवारों को खर्च के लिए कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि सरकार ने जीडीपी की गणना की पद्धति में बार-बार बदलाव कर आंकड़ों को अपने हिसाब से ‘‘सेट’’ किया है।
रमेश ने कहा कि ‘नॉमिनल’ और ‘रियल जीडीपी’ के बीच का अंतर महंगाई को दर्शाता है और सरकार के मुताबिक यह अंतर केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि इसी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई नौ प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने इसे ‘‘स्पष्ट विसंगति’’ करार दिया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह विसंगति केंद्र सरकार की ओर से जीडीपी गणना की पद्धति में किए गए बदलावों का नतीजा है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इस वर्ष जीडीपी की गणना की पद्धति में दो बार बदलाव किया और जून में नवीनतम जीडीपी अनुमानों के दौर से ठीक पहले इसकी गणना में डब्ल्यूपीआई के इस्तेमाल से दूरी बना ली। रमेश ने कहा कि अगर सरकार ‘‘ईमानदार आंकड़े’’ पेश करती तो वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर काफी कम होती। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर पहले भी कई लोग सवाल उठा चुके हैं, जिनमें मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार भी शामिल हैं।
कांग्रेस महासचिव ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसके 10 वर्ष पूरे होने के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से नीचे है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ को तंज कसते हुए ‘‘फेक इन इंडिया’’ बताया। पार्टी नेता सलमान सोज ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं’’।
सोज ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि खुदरा महंगाई 3.9 प्रतिशत और थोक महंगाई करीब 10 प्रतिशत है तथा सरकार थोक महंगाई के आंकड़े को कम दिखा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ के आह्वान के बावजूद चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर का है। सोज ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे का जिक्र करते हुए दावा किया कि 2018 के बाद से देश में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता में ‘‘एक बूंद’’ की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
कांग्रेस नेता ने अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सरकार जीडीपी के आंकड़ों को लेकर जश्न मना रही है और अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो परिवारों को अपने खर्च चलाने के लिए अब भी कर्ज क्यों लेना पड़ रहा है? उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पिछले एक दशक में ग्रामीण मजदूरी महंगाई की दर से मुश्किल से ऊपर क्यों रही, निजी निवेश स्थिर क्यों है, सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगभग शून्य क्यों है और युवाओं में बेरोजगारी दर 16 प्रतिशत क्यों है ? भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी।
यह अमेरिका-ईरान युद्ध और उससे उपजी वैश्विक अनिश्चितता के कारण घरेलू आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे मौजूदा हालात में ‘असाधारण उपलब्धि’ बताया है। सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।
हालांकि, यह जनवरी-मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत से कम है, लेकिन एक साल पहले की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से अधिक है।
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