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IND vs AFG : अफगानिस्तान के खिलाफ ऐसा होगा टीम इंडिया का स्क्वाड, संजू, प्रभसिमरन और अक्षर में से कौन होगा बाहर?

IND vs AFG : भारत और अफगानिस्तान के बीच इसी महीने तीन मैचों की टी20 सीरीज खेली जाने वाली है. इस सीरीज की शुरुआत 13 सितंबर से होने वाली है. भारत और अफगानिस्तान के बीच सभी 3 मुकाबले सीरीज के सभी मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे. इस सीरीज के लिए जल्दी ही भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, 3 सितंबर को इस सीरीज के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड का ऐलान किया जा सकता है. 

उससे पहले हम आपको टीम इंडिया के संभावित स्क्वाड के बारे में बताने वाले हैं. आज हम आपको बताएंगे कि, अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली सीरीज में किन खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है और कौन-कौन से प्लेयर्स को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. तो आइए टीम इंडिया के संभावित स्क्वाड पर नजर डालते हैं. 

इन खिलाड़ियों की होगी स्क्वाड में वापसी 

अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज में पेस ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी की वापसी हो सकती है. वो चोट से पूरी तरह उभर चुके हैं. वो टीम इंडिया के एशियन गेम्स 2026 के स्क्वाड का भी हिस्सा हैं. वहीं टीम में जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती की वापसी भी चोट के बाद होने की संभावना है.   

टीम इंडिया के स्क्वाड में अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली सीरीज में सबसे बड़ा बदलावा क्रुणाल पांड्या हो सकते हैं. चयनकर्ता उन्हें टी20 सेटअप में शामिल करना चाहते हैं. ऐसे में क्रुणाल की वापसी टीम में हो सकती है. उन्होंने अपना अंतिम मैच भारत के लिए 2021 में खेला था. 

ये 3 खिलाड़ी हो सकते हैं स्क्वाड से बाहर  

अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली इस सीरीज के स्क्वाड से भारत के स्टार स्पिनर ऑलराउंडर अक्षर पटेल बाहर हो सकते हैं. अक्षर सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम के उपकप्तान भी थे. अब उनके बाहर होने की नौबत आ गई है. उनका प्रदर्शन पिछले कुछ समय से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सही नहीं रहा है. वहीं जिम्बाब्वे सीरीज में संजू सैमसन को बाहर कर विकेटकीपर के रूप में प्रभसिमरन सिंह को मौका दिया गया था.

अब इस सीरीज में सूज की वापसी कराई जा सकती है. वहीं प्रभसिमरन सिंह को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. इसके अलावा भारत के स्टार तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को भी इस स्क्वाड से बाहर रखा जा सकता है. क्योंकि वो अभी अपनी चोट से पूरी तरह नहीं उभरे हैं. वो सीओई में फिटनेस पाने के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं.

अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया का संभावित स्क्वाड

अभिषेक शर्मा , वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, क्रुणाल पांड्या, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, मयंक यादव, शिवम दुबे और प्रिंस यादव. 

भारत और अफगानिस्तान सीरीज का शेड्यूल 

  • पहला टी20 मैच: 13 सितंबर 2026, स्थान - अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली
  • दूसरा टी20 मैच: 15 सितंबर 2026, स्थान - अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली
  • तीसरा टी20 मैच: 17 सितंबर 2026, स्थान - अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली

ये भी पढ़ें : टीम इंडिया को लगा बड़ा झटका, अफगानिस्तान सीरीज से बाहर हो सकता है भारत का ये खतरनाक ऑलराउंडर

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पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना का कमाल, सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के 12 हजार से ज्यादा मरीजों हुआ मुफ्त इलाज

Punjab News: पंजाब की भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) लाखों लोगों के लिए जीवनदान बन गई है. इस योजना के तहत 1 सितंबर तक सेप्सिस और सेप्टिक शॉक से जुड़े 12,467 मरीजों का मुफ्त उपचार हुआ है. इन मरीजों के इलाज पर सरकार ने कुल 51.58 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, सेप्सिस न केवल गंभीर चिकित्सकीय चुनौती है, बल्कि इसके इलाज का आर्थिक बोझ भी काफी बड़ा हो सकता है.

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन मामलों में 10,961 सीवियर सेप्सिस के केस थे, जिनके उपचार पर मान सरकार ने कुल 44.33 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. जबकि सेप्टिक शॉक के 1,506 मामलों के इलाज पर कुल 7.25 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है संक्रमण

अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, सेप्सिस किसी संक्रमण के प्रति शरीर की बेहद तीव्र और अनियंत्रित प्रतिक्रिया है. यह प्रतिक्रिया तेजी से शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे महत्वपूर्ण अंगों का कामकाज प्रभावित हो सकता है जो जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है. इससे फेफड़ों, यूरिनरी ट्रैक्ट, त्वचा और पाचन तंत्र में होने वाले संक्रमण इसके संभावित कारणों में शामिल हैं.

ऐसे में सेप्सिस को महज संक्रमण समझना सही नहीं है. संक्रमण के खिलाफ शरीर की प्रतिक्रिया जब नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो रक्त संचार और अंगों के सामान्य कामकाज पर असर पड़ने लगता है. स्थिति गंभीर होने पर रक्तचाप खतरनाक स्तर तक गिर सकता है और पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं मिलने से मरीज सेप्टिक शॉक में जा सकता है.

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सेप्सिस की जल्द पहचान को महत्वपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और जब रक्त संचार गंभीर रूप से प्रभावित होता है तथा महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, तब सेप्टिक शॉक का खतरा पैदा हो जाता है.
  • सेप्टिक शॉक में मरीज को अक्सर अस्पताल की गहन निगरानी और व्यापक उपचार की जरूरत पड़ती है. इसमें नस के जरिए तरल पदार्थ देना, आवश्यकतानुसार एंटीबायोटिक्स, रक्तचाप संभालने वाली दवाएं, ऑक्सीजन या वेंटिलेटर और अंगों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए अन्य सपोर्टिव उपचार शामिल हो सकते हैं. लंबे और जटिल इलाज के कारण अस्पताल का खर्च भी तेजी से बढ़ सकता है.
  • ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य कवर परिवारों के लिए आर्थिक राहत का माध्यम बन सकता है. योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रति परिवार हर साल 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है. गंभीर बीमारी के दौरान यह सुविधा इलाज के खर्च का दबाव कम करने में मदद कर सकती है.

नवजातों में सेप्सिस का जोखिम ज्यादा

नवजात शिशुओं में सेप्सिस का खतरा विशेष रूप से गंभीर माना जाता है. फरीदकोट स्थित गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कांत धीर के मुताबिक, नवजात के व्यवहार में आने वाला मामूली बदलाव भी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है.

  • उन्होंने बताया कि खासकर समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले बच्चों की हालत बहुत कम समय में बिगड़ सकती है. इसलिए ऐसे बच्चों में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
  • बच्चे का सामान्य से कम दूध पीना या पोषण न लेना, जरूरत से ज्यादा सुस्त या नींद में रहना, शरीर का असामान्य रूप से ठंडा महसूस होना और सांस लेने के तरीके में बदलाव गंभीर संक्रमण के संकेत हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे को तुरंत चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाना जरूरी है.

सावधानी से करें एंटीबायोटिक का इस्तेमाल 

बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि होने या चिकित्सकीय रूप से उसकी आशंका होने पर एंटीबायोटिक्स उपचार का अहम हिस्सा हो सकते हैं. लेकिन इन दवाओं का गलत या अनावश्यक इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की समस्या को बढ़ा सकता है.

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना, पिछली बीमारी की बची हुई दवा दोबारा इस्तेमाल करना या डॉक्टर द्वारा निर्धारित कोर्स को बीच में छोड़ देना भविष्य में संक्रमण के इलाज को मुश्किल बना सकता है. इसलिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए.

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

CDC के मुताबिक, कुछ लक्षण सेप्सिस की संभावित चेतावनी हो सकते हैं. इनमें भ्रम या मानसिक स्थिति में बदलाव, सांस लेने में परेशानी, तेज दर्द या अत्यधिक बेचैनी, बुखार अथवा शरीर का असामान्य रूप से कम तापमान, चिपचिपी त्वचा और तेज हृदय गति जैसे संकेत शामिल हैं. ऐसे लक्षणों की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है.

  • पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सामने आए आंकड़े यह दिखाते हैं कि सेप्सिस के इलाज में बड़ी संख्या में मरीजों को अस्पताल की जरूरत पड़ रही है और इसके साथ पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी लग रहे हैं. ऐसे में इस बीमारी से निपटने के लिए शुरुआती पहचान, समय पर इलाज और इलाज के खर्च से आर्थिक सुरक्षा—तीनों अहम हैं.
  • सेप्सिस में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. संक्रमण से जूझ रहे मरीज की हालत अचानक बिगड़ सकती है, इसलिए गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. समय पर चिकित्सा सहायता न केवल इलाज की संभावना बेहतर कर सकती है, बल्कि गंभीर जटिलताओं और जान के जोखिम को भी कम करने में मदद कर सकती है.

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मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में लिए पांच विकेट, लो-फ्लोर कैच से मचाई सनसनी

Mohammed Shami Duleep Trophy: मोहम्मद शमी ने गेंद फेंकने के बाद अपने फॉलो थ्रू के दौरान हर्ष दुबे का ऐसा लो फ्लोर कैच लिया कि देखने वालों की आंखों फटी की फटी रह गई. शमी ने सेमीफाइनल की दोनों पारियों में कुल पांच विकेट झटके और सेंट्रल जोन के खिलाफ ईस्ट जोन की पोजिशन मजबूत कर दी. Tue, 1 Sep 2026 14:19:41 +0530

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