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Sleeper Bus में Teenager से Gangrape! Rahul Gandhi का सरकारों पर वार, कहा- पर्दे बस में नहीं, नाकामियों पर हैं

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना को लेकर केंद्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारों की आलोचना की। गांधी ने इस बात पर पुलिस की नाकामी की आलोचना की कि स्लीपर बर्थ पर पर्दे लगे होने के बावजूद बस को किसी भी चेकपॉइंट पर नहीं रोका गया। उन्होंने इसे दिल्ली में 2012 के निर्भया मामले के बाद भी महिलाओं की सुरक्षा करने में सरकार की अक्षमता का सबूत बताया।
 

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X पर एक पोस्ट में गांधी ने लिखा कि दिल्ली-NCR महिलाओं के लिए इतना असुरक्षित हो गया है कि ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही एक स्लीपर बस में एक नाबालिग लड़की के साथ 47 किलोमीटर तक गैंगरेप हुआ। हैरानी की बात है कि न तो दिल्ली पुलिस और न ही नोएडा पुलिस को इसकी ज़रा भी भनक लगी। यह बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली की रिंग रोड और बॉर्डर से गुज़री, लेकिन किसी भी चेकपॉइंट पर इसे एक बार भी नहीं रोका गया।

उन्होंने बताया कि बस की सीटों पर पर्दे लगे हुए थे ताकि अंदर क्या हो रहा है, यह कोई देख न सके। उन्होंने आगे कहा कि और अपराधियों को प्रशासन का ज़रा भी डर नहीं था। निर्भया कांड के इतने सालों बाद और ऐसी कई घटनाओं के बावजूद, ऐसी बसों की चेकिंग और निगरानी के नियमों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? वे पर्दे सिर्फ़ उस एक बस में नहीं लगे थे – वे सरकार द्वारा प्रशासन की नाकामियों पर साल-दर-साल डाले गए पर्दों का नतीजा हैं, जिसकी वजह से महिलाएं देश की राजधानी में सुरक्षित सफ़र भी नहीं कर पा रही हैं।

अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि केंद्र और राज्य सरकारों के इस सिस्टम को ठीक करने से पहले और कितनी महिलाओं और लड़कियों को यह सब सहना पड़ेगा? क्या अमित शाह के अंडर दिल्ली पुलिस या आदित्यनाथ के अंडर यूपी पुलिस की कोई जवाबदेही तय होगी? बिल्कुल नहीं — इस अपराध पर भी बस पर्दा डाल दिया जाएगा। 17 साल की लड़की ने आरोप लगाया कि 4 अगस्त की रात उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से नोएडा जाते समय बस के अंदर उसके साथ गैंगरेप किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बस ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।
 

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नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) निहारिका भट्ट ने बताया कि आरोपी ने लड़की को रिंग रोड पर उतार दिया था, जिसके बाद वह कश्मीरी गेट ISBT पुलिस स्टेशन पहुँची। बताया जा रहा है कि स्लीपर बस में चढ़ने से पहले, भारी बारिश और अंधेरे के कारण वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक के पास उतर गई थी। बाद में लड़की को दिल्ली में कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास छोड़ दिया गया। भट्ट ने कहा कि पूछताछ के दौरान पता चला कि वह यूपी के मैनपुरी से नोएडा के सेक्टर 63 में अपने एक रिश्तेदार के घर जा रही थी। रेप की घटना परी चौक (ग्रेटर नोएडा) और नोएडा के सेक्टर 63 के बीच रास्ते में हुई।
 
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पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार के आभूषण 1978 की सूची से खा रहे मेल, गणना जारी

पुरी, एक सितंबर वार्षिक रथ यात्रा के बाद पुरी जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ की सूची तैयार करने की फिर से शुरू हुई प्रक्रिया के बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब तक खजाने में रखे आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं 1978 में तैयार की गई सूची से मेल खाती हैं। मंदिर में 48 साल के अंतराल के बाद रत्न भंडार की सूची तैयार की जा रही है। यह प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा मंजूर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत सीसीटीवी निगरानी में और मजिस्ट्रेट तथा अधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी में सख्ती से की जा रही है।

इससे पहले 19 जुलाई को सूची तैयार की गई थी, जब रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा श्री गुंडिचा मंदिर में थे। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने सोमवार को कहा, ‘‘आज हम सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर खजाने के भीतरी कक्ष में दाखिल हुए और सूची तैयार करने का काम शाम छह बजकर 55 मिनट तक जारी रहा।’’ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी पाढ़ी 25 मार्च को सूची तैयार करने का काम शुरू होने के बाद से पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। मंदिर में 48 साल के अंतराल के बाद रत्न भंडार की सूची तैयार की जा रही है।

पाढ़ी ने कहा कि खजाने के भीतरी कक्ष में रखे तीन संदूकों की सूची तैयार करने के लिए राज्य सरकार से एक अतिरिक्त एसओपी को मंजूरी दिलाने की जरूरत है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आकार बड़ा होने के कारण इनकी गिनती भीतरी रत्न भंडार में नहीं की जा सकी। इसलिए हम ‘खाता सेज घर’ (खजाने के पास स्थित एक बड़े कक्ष) में इनकी सूची तैयार करने की योजना बना रहे हैं।’’ पाढ़ी ने कहा कि उनके सहित सभी अधिकृत व्यक्तियों की रत्न भंडार में प्रवेश करने और बाहर आने से पहले पूरी तरह सुरक्षा जांच की जाती है।

उन्होंने कहा कि कड़ी सुरक्षा और एसओपी का पालन करते हुए सूची तैयार करने का काम जारी है। उन्होंने कहा, ‘‘पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी मूल्यवान वस्तुओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण उन्नत 3डी मैपिंग के साथ उच्च-रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिए किया जा रहा है।’’ यह पूछे जाने पर कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होने की संभावना है, पाढ़ी ने कहा, ‘‘हम इसे जल्द पूरा करने की जल्दी में नहीं हैं, बल्कि सटीकता और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर है। 1978 में इसे पूरा करने में 72 दिन लगे थे।

इस बार रत्न विशेषज्ञों को शामिल करके और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए सूची बहुत सटीक तरीके से तैयार की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि मूल्यवान वस्तुओं में कई तरह के रत्न जड़े हुए हैं और उनकी भी जांच की जा रही है। एसजेटीए के अधिकारी ने कहा कि सूची तैयार करने में रत्न विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि कुछ वस्तुओं में हीरे समेत कई कीमती रत्न जड़े हुए हैं। पाढ़ी ने कहा कि रत्न भंडार के भीतर सूची तैयार करने के काम के दौरान देवताओं की पूजा-अर्चना और ‘बाहर कथा’ (बाहरी कक्ष) से श्रद्धालुओं के सुचारू दर्शन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

उन्होंने कहा कि रत्न भंडार की सूची तैयार करने का काम एक सितंबर को भी जारी रहेगा। इस बीच, एसजेटीए के अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के ‘नाटा मंडप’ (नृत्य कक्ष) में वातानुकूलन की सुविधा स्थापित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर के भीतर गर्म और उमस भरे मौसम से राहत मिल सके और उन्हें सुविधा हो।

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ट्रिपल सेंचुरी बनाना करियर के लिए अभिशाप, बल्ले में ऐसी जंग लगी कि करियर हुआ भस्म

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