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ट्रंप ने एप्पल से अपने मानचित्र पर ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने को कहाRaksha Panchami 2026: आज है रक्षा पंचमी, रक्षाबंधन से क्या है अंतर? जानें महत्व और मान्यताएं
भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा के संकल्प से जुड़े रक्षाबंधन के बाद रक्षा पंचमी का पर्व आता है। इस साल रक्षा पंचमी 1 सितंबर 2026, मंगलवार को मनाई जा रही है। ओडिशा में इस पर्व को विशेष उत्साह के साथ मनाने की परंपरा है। कुछ क्षेत्रों में इसे रेखा पंचमी या शांति पंचमी भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रक्षासूत्र धारण कर परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना की जाती है। खास तौर पर जिन लोगों से रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने की परंपरा किसी कारण पूरी नहीं हो सकी, वे रक्षा पंचमी के दिन रक्षासूत्र बांध सकते हैं।
रक्षा पंचमी और रक्षाबंधन में क्या अंतर?
रक्षाबंधन मुख्य रूप से भाई-बहन के प्रेम और आपसी रिश्ते का पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुख, समृद्धि व लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है।
वहीं, रक्षा पंचमी का दायरा परिवार की सुरक्षा, सुख-शांति और मंगलकामना से जुड़ा माना जाता है। रक्षाबंधन के दिन राखी या रक्षासूत्र की परंपरा पूरी नहीं कर पाने वाले लोग इस दिन इसे निभा सकते हैं। यही वजह है कि रक्षा पंचमी को रक्षासूत्र से जुड़ी परंपरा के लिए एक विशेष अवसर माना जाता है।
रक्षा पंचमी पर क्यों बांधा जाता है रक्षासूत्र?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में रक्षासूत्र को सिर्फ धागा नहीं माना जाता, बल्कि इसे सुरक्षा, शुभ संकल्प और मंगलकामना का प्रतीक माना गया है। पूजा-पाठ के दौरान भी पुरोहित या परिवार के बड़े सदस्य कई अवसरों पर रक्षासूत्र बांधते हैं।
मान्यता है कि रक्षा पंचमी के दिन श्रद्धा के साथ रक्षासूत्र धारण करने और ईश्वर से प्रार्थना करने से परिवार पर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इस दिन घर-परिवार को संकटों से बचाने और सुख-शांति बनाए रखने की कामना की जाती है।
रक्षा पंचमी पर भैरव पूजा की मान्यता
रक्षा पंचमी से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताओं में भगवान भैरव की पूजा का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस दिन भैरव की पूजा करने से जंगली जानवरों से सुरक्षा मिलती है।
इसी वजह से कुछ स्थानों पर घर के मुख्य द्वार पर भगवान भैरव या भगवान गणेश के चित्र बनाने अथवा शुभ चिह्न अंकित करने की परंपरा भी देखने को मिलती है। धार्मिक विश्वास में इन परंपराओं को घर की सुरक्षा और सुख-शांति से जोड़कर देखा जाता है।
रक्षा पंचमी की तिथि कैसे तय हुई?
पंचांग के अनुसार, मंगलवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक चतुर्थी तिथि रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। चूंकि रक्षा पंचमी पंचमी तिथि में मनाई जाती है, इसलिए चतुर्थी समाप्त होने के बाद इस पर्व से जुड़ी धार्मिक परंपराएं निभाई जा सकती हैं।
धार्मिक पर्वों की तिथि और पूजा के समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। ऐसे में पूजा या व्रत से जुड़ी किसी विशेष परंपरा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को देखना उचित रहेगा।
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