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Rules Change From 1 September: जल्दी करें, आज से बदले ये 5 नियम! | New Rules September | Top News |

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चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए बदला रक्षा कानून:आम लोगों के संसाधन इस्तेमाल कर सकेगी सरकार; आदेश नहीं मानने पर सजा होगी

चीन ने अपने रक्षा कानून में बड़ा बदलाव किया है। अब युद्ध या बड़े संकट के समय सरकार सिर्फ सेना पर निर्भर नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर आम लोगों, निजी कंपनियों और देश के दूसरे संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। चीन की संसद (नेशनल पीपुल्स कांग्रेस) ने 28 अगस्त को राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बदलाव को मंजूरी दी। नया कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। नए कानून में सिर्फ संसाधन लेने की ही नहीं, उन्हें सरकार के कब्जे में लेने की व्यवस्था भी है। आदेश मानने से इनकार या जानबूझकर देरी करने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। 2010 के बाद पहली बार कानून में बड़ा बदलाव राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून 2010 में बनाया गया था। अब पहली बार इसमें बड़ा बदलाव किया गया है। नए कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। चीन के मुताबिक, इसका मकसद यह है कि किसी खतरे के समय देश शांति से युद्ध की स्थिति में तेजी से जा सके। इसके लिए आर्थिक और सामाजिक ताकत को भी रक्षा के काम में लगाया जा सकेगा। नए कानून में देश की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के साथ ‘विकास हितों’ की रक्षा को भी शामिल किया गया है। कम्युनिस्ट पार्टी तय करेगी, कब और कैसे जुटेंगे संसाधन अमेरिका के जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के मुताबिक, नए कानून में पार्टी के नेतृत्व, संगठन, रिजर्व फोर्स, भर्ती, जरूरी सामान के भंडार और रक्षा से जुड़ी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं। कानून के अनुच्छेद 3 और 16 में राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की व्यवस्था को कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अधीन किया गया है। पहले इसमें स्टेट काउंसिल और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की प्रमुख भूमिका थी। हॉफमैन के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर पार्टी सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों को एक साथ जुटाकर अपने रणनीतिक लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल कर सकती है। अस्पताल, इंटरनेट और ट्रांसपोर्ट को भी तैयार रहना होगा नए कानून के मुताबिक परिवहन, डाक, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा और दवा आपूर्ति, खाद्य और अनाज आपूर्ति और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहना होगा। इन क्षेत्रों की इकाइयों को विशेष टीमें बनानी होंगी। उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत काम कर सकें। साइबर सुरक्षा को खास तौर पर शामिल किया गया है। कानून में नई और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से रक्षा क्षमता बढ़ाने की बात भी कही गई है। रिजर्व फोर्स तैयार करने, भर्ती व्यवस्था मजबूत करने और रणनीतिक रूप से जरूरी सामान का भंडार बढ़ाने के भी प्रावधान हैं। अब चीन में विकास भी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा 2010 के कानून में चीन की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को खतरा होने पर रक्षा व्यवस्था सक्रिय करने की बात थी। अब इसमें ‘विकास हितों’ को भी शामिल कर दिया गया है। यानी चीन के लिए खतरा सिर्फ सीमा या देश की सुरक्षा से जुड़ा नहीं होगा। अर्थव्यवस्था, जरूरी संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद चीनी संपत्तियां और तकनीकी विकास से जुड़े हित भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा माने जा सकते हैं। जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के मुताबिक, यह बदलाव 2020 में संशोधित चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून से भी जुड़ा है। उस कानून में भी देश के विकास हितों को खतरा होने पर रक्षा लामबंदी शुरू करने की व्यवस्था की गई थी। नया कानून विदेश में रहने वालों पर भी लागू हो सकता है चीन के कुछ कानून देश की सीमा के बाहर रहने वाले लोगों पर भी लागू हो सकते हैं। यानी विदेश में किया गया कोई काम भी चीन के कानून के दायरे में आ सकता है। 1 जुलाई 2026 को चीन ने जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून लागू किया था। इसकी धारा 63 में कानून को देश के बाहर भी लागू करने का प्रावधान है। इसका एक उदाहरण 2023 में सामने आया था। हांगकांग की छात्रा युएन चिंग-टिंग उस समय जापान में पढ़ रही थीं। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करने के बाद जब वह हांगकांग लौटीं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दो महीने जेल में रखा गया था। क्या चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है? नए कानून के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या चीन सच में युद्ध की तैयारी कर रहा है। इस पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। ब्रसेल्स स्थित सेंटर फॉर रूस यूरोप एशिया स्टडीज की निदेशक थेरेसा फॉलन ने नए कानून पर चिंता जताई। उन्होंने X पर कहा कि दुनिया में युद्ध का खतरा बढ़ रहा है और इसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अमेरिका के सैन्य भंडार में कमी, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़ा इजराइल-अमेरिका संघर्ष जैसे हालात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को यह सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि युद्ध का समय करीब आ रहा है। वहीं, एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के लाइल मॉरिस का कहना है कि इस कानून को चीन की अचानक शुरू हुई युद्ध तैयारी नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, चीन पिछले 10 साल से ज्यादा समय से ऐसी तैयारी कर रहा है। हालांकि, नया कानून यह जरूर दिखाता है कि चीन किसी बड़े संकट के लिए सिर्फ अपनी सेना को तैयार नहीं कर रहा। उसने आम लोगों, कंपनियों, जरूरी सेवाओं, तकनीक और डेटा को भी इस तैयारी का हिस्सा बनाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भविष्य में ताइवान और अमेरिका चीन के संभावित प्रमुख सैन्य प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी की पहली रक्षा बैठक:तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिले; सैन्य तकनीक और हथियारों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में हुई। इसमें तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल हुए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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टीम इंडिया में नहीं मिला मौका तो टूटा क्रुणाल पंड्या का दिल, कहा- उम्मीद अभी...

krunal pandya team india: अफगानिस्तान सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान हुआ तो उसमें अपना नाम न देखकर क्रुणाल पंड्या का दिल टूट गया. 5 साल से टीम इंडिया में वापसी का इंतजार कर रहे इस स्टार ऑलराउंडर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया. आखिरी बार क्रुणाल ने 2021 में भारत के लिए टी20 मैच खेला था. Wed, 2 Sep 2026 00:47:21 +0530

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Pakistan deports millions of Afghan refugees, and Norway's king takes throne | Global News Podcast #tmktech #vivo #v29pro
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