IMD Weather Alert 1 September: देश में 14% कम बारिश के बावजूद आफत; यूपी-राजस्थान समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों और पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून की गतिविधियों में भारी विषमता देखने को मिल रही है। देश के कुछ हिस्सों में कम बारिश के चलते सूखे जैसे हालात हैं, तो वहीं कई क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और जलभराव के कारण बाढ़ की स्थिति बन गई है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे मैदानी राज्यों में सितंबर की शुरुआत मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के साथ हुई है।
देश भर में 14% कम बारिश, लेकिन बाढ़ से हाहाकार
आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल मिलाकर मानसूनी बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम रहा है। हालांकि, कम समय में एक ही स्थान पर अत्यधिक बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। इस मौसमी बदलाव का सबसे ज्यादा असर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के राज्यों में देखने को मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश में मानसून का कहर, 35 से अधिक जिलों में अलर्ट जारी
उत्तर प्रदेश में पूरा प्रदेश इस समय मानसून की चपेट में है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही कई इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। लखनऊ, पूर्वांचल और तराई के इलाकों में बारिश के कारण तापमान में तो गिरावट आई है, लेकिन फसलों को नुकसान की चिंता बढ़ गई है।
राजस्थान और अन्य राज्यों का मौसम का हाल
राजस्थान में भी मानसून का नया स्पेल सक्रिय हो गया है। जयपुर, कोटा और भरतपुर संभाग के जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की जा रही है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी दी गई है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और लैंडस्लाइड की चेतावनी
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण पहाड़ी दरकने और भूस्खलन का जोखिम काफी बढ़ गया है। शिमला, कांगड़ा, धर्मशाला और देहरादूर जैसे इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने से सड़कों के अवरुद्ध होने का खतरा है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और पर्यटकों को नदी-नालों तथा संवेदनशील ढलानों के पास न जाने की सख्त सलाह दी है।
Mumbai Transport Fare Hike: मुंबई में CNG-PNG के साथ बढ़ा ऑटो-टैक्सी का किराया; जानिए नया रेट चार्ट
मुंबई में लगातार बढ़ रही परिचालन लागत और ईंधन की ऊंची दरों को देखते हुए परिवहन विभाग ने ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। करीब 18 महीने बाद किए गए इस फेरबदल का सीधा असर मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और आसपास के इलाकों में रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों पर पड़ने वाला है।
ऑटो और काली-पीली टैक्सी का नया किराया
MMRTA द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार न्यूनतम दूरी (पहले 1.5 किलोमीटर) के लिए किराए में निम्नलिखित बढ़ोतरी की गई है:
- ऑटो-रिक्शा: न्यूनतम किराया ₹26 से बढ़ाकर ₹27 कर दिया गया है (₹1 की बढ़ोतरी)। 1.5 किमी के बाद प्रति किलोमीटर की दर अब ₹18.22 होगी।
- काली-पीली टैक्सी: बेस फेयर (न्यूनतम किराया) ₹31 से बढ़ाकर ₹33 कर दिया गया है (₹2 की बढ़ोतरी)। 1.5 किमी के बाद प्रति किलोमीटर की दर ₹21.90 लागू होगी।
- नाइट चार्ज: रात 12 बजे से सुबह 5 बजे के बीच यात्रा करने पर कुल किराए पर 25% का अतिरिक्त सरचार्ज लागू रहेगा।
गैस के बढ़ते दामों के चलते लिया गया फैसला
महानगर गैस लिमिटेड (MGL) द्वारा समय-समय पर सीएनजी की कीमतों में की गई वृद्धि के कारण ऑटो और टैक्सी यूनियनों द्वारा काफी समय से किराया बढ़ाने की मांग की जा रही थी। परिवहन विभाग की खाटुआ समिति के फॉर्मूले के आधार पर ही इस नई किराया समीक्षा को मंजूरी दी गई है।
30 नवंबर तक मीटर री-कैलिब्रेशन का समय
आरटीओ (RTO) अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक ऑटो और टैक्सी चालकों के इलेक्ट्रॉनिक फेयर मीटर री-कैलिब्रेट नहीं हो जाते, तब तक वे नए किराए के आधिकारिक चार्ट के आधार पर यात्रियों से बढ़ा हुआ किराया वसूल सकते हैं। चालकों को अपने मीटर अपडेट कराने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है। समयसीमा पूरी होने के बाद बिना री-कैलिब्रेटेड मीटर के चलने वाले वाहनों पर प्रतिदिन ₹50 जुर्माना (अधिकतम ₹5,000) लगाया जाएगा।
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