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चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए कानून बदला:1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम; आम लोगों और कंपनियों के संसाधन भी ले सकेगी सरकार

चीन ने अपने समाज को युद्ध के लिए तैयार करने की दिशा में कानूनी ढांचा मजबूत किया है। देश की शीर्ष विधायिका ने 28 अगस्त 2026 को संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून को मंजूरी दी। यह कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। इसके तहत युद्ध या संघर्ष जैसी स्थिति में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) किसी भी व्यक्ति या निजी कंपनी से मदद लेने और उनके संसाधन जब्त करने का अधिकार रखेंगे। पूरे देश को युद्ध के लिए तैयार करने की योजना चीन एक अधिनायकवादी देश है, जहां आम नागरिकों के पास कड़े और व्यापक कानूनों का विरोध करने या उनसे बचने की क्षमता नहीं है। नया कानून इसी व्यवस्था का हिस्सा है। यह कानून माओत्से तुंग की ‘जन युद्ध’ की सोच से जुड़ा हुआ है। इस सोच के तहत संकट के समय पूरी जनता को एकजुट होकर लड़ना और विरोध करना होता है। कानून का मकसद केवल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को युद्ध के लिए तैयार करना नहीं है। इसका उद्देश्य पूरे देश को संघर्ष के लिए तैयार करना है। इसी दिशा में चीन ने जनवरी 2014 में केंद्रीय राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग बनाया था। इसके बाद संसाधनों के तालमेल, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने और युद्ध की तैयारी के लिए कई कानूनी नियम लागू किए गए। इन कदमों के जरिए CCP ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के नाम पर अपनी सत्ता को और मजबूत किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यापक अधिकार इस आयोग की मदद से चीन ने 2015 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 2017 में राष्ट्रीय खुफिया कानून और 2021 में डेटा सुरक्षा कानून लागू किया। इन कानूनों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला उठाकर चीनी सरकार को व्यापक अधिकार मिल जाते हैं। इन कानूनों के आदेशों से कोई नागरिक, कर्मचारी, कंपनी या संगठन बाहर नहीं है। संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। 2010 में लागू होने के बाद यह इसका पहला अपडेट है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, कानून नए सिस्टम के तहत राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी में सैन्य और नागरिक अधिकारियों के काम और जिम्मेदारियां साफ करता है। यह राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने, आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ तालमेल बैठाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था से जुड़ने के लिए राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी सिस्टम को बेहतर बनाता है। राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी का मतलब चीन राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी को ऐसी गतिविधियों के तौर पर परिभाषित करता है, जिनमें राष्ट्रीय संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और विकास हितों पर खतरे के जवाब में राज्य कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाता है। इसका उद्देश्य शांतिकाल और युद्धकाल के बीच तेजी से बदलाव सुनिश्चित करना और आर्थिक-सामाजिक ताकत को राष्ट्रीय रक्षा क्षमता में बदलना है। अमेरिका के थिंक टैंक जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए लिखने वाली सामंथा हॉफमैन ने कहा कि संशोधन छह क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इनमें सामान्य प्रावधानों में सुधार, जैसे पार्टी नेतृत्व को बनाए रखना; संगठनात्मक नेतृत्व ढांचे में बदलाव; लामबंदी की बुनियादी कार्यप्रणाली में सुधार; रिजर्व बल तैयार करने और भर्ती व्यवस्था की स्थापना; रणनीतिक सामग्री के भंडार की व्यवस्था में सुधार; और राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी से जुड़े प्रचार व शिक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल है। हॉफमैन ने लिखा, “नए संशोधन यह सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी नेतृत्व किसी भी समय देश के सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों की पूरी ताकत को सक्रिय कर सके और उन्हें रणनीतिक लक्ष्यों की ओर लगा सके।” उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ा संघर्ष होता है तो शी जिनपिंग राष्ट्रीय शक्ति को एकजुट ताकत के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। विकास हितों को भी कानून में शामिल किया चीन राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय रक्षा के हितों को एक साथ जोड़ रहा है। 2010 के कानून में संप्रभुता, एकीकरण, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा का लक्ष्य था। 2026 के संस्करण में इसमें ‘विकास हित’ भी जोड़े गए हैं। CCP की भाषा में विकास हितों में आर्थिक सुरक्षा, संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद संपत्तियां और तकनीकी विकास शामिल हैं। इनमें क्षेत्रीय खतरे भी शामिल हैं। हॉफमैन ने आगे कहा, “यह बदलाव 2020 में संशोधित राष्ट्रीय रक्षा कानून के अनुरूप है। वह कानून पहले ही राज्य के विकास हितों को खतरा होने पर लामबंदी व्यवस्था शुरू करने की अनुमति देता है। इससे साफ होता है कि यह व्यवस्था विकास हितों पर भी लागू होती है।” संशोधित कानून में संगठनात्मक नेतृत्व निकायों और उनकी शक्तियों, राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की योजना, सशस्त्र बलों के लिए कर्मियों के रिजर्व और लामबंदी, सैन्य शोध तथा नागरिक संसाधनों की मांग और जब्ती से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसमें मुआवजे की व्यवस्था भी है। शी जिनपिंग की भूमिका पर विशेषज्ञों की राय ब्रसेल्स में सेंटर फॉर रूस यूरोप एशिया स्टडीज की निदेशक थेरेसा फॉलन ने X पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा, “युद्ध के बढ़ते खतरे को नजरअंदाज करना अब कहीं ज्यादा मुश्किल है। चीन का राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून 28 अगस्त 2026 को अपडेट किया गया और 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह युद्धकाल का राष्ट्रीय रक्षा कानून है।” उन्होंने सवाल उठाया, “क्या अमेरिकी सैन्य भंडार में कमी, यूक्रेन में रूस का युद्ध और ईरान पर इजराइल-अमेरिका के युद्ध ने शी जिनपिंग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि समय अनुकूल होता जा रहा है?” हालांकि, 2026 के कानून की कुछ धाराएं चिंता पैदा करती हैं, लेकिन इसके ज्यादातर हिस्से पुराने कानून से बहुत अलग नहीं हैं। मिसाल के तौर पर, 18 से 60 साल के पुरुषों और 18 से 55 साल की महिलाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा सेवा करना जरूरी होने वाला प्रावधान 2010 के कानून में भी था। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो लाइल मॉरिस ने कहा, “असल में नागरिकों की लामबंदी से जुड़ी लगभग सभी जिम्मेदारियां 2010 के कानून जैसी ही हैं।” विशेष ज्ञान और कौशल वाले लोगों को बुलाने के लिए कोई उम्र सीमा तय नहीं है। हालांकि, मॉरिस ने कहा, “शी की लामबंदी में भूमिका और डेटा प्रबंधन से जुड़ी कई नई धाराओं को समझना जरूरी है। लेकिन लोगों को इसे युद्ध की नई तैयारी बताकर बहुत ज्यादा चिंता करना बंद करना चाहिए। यह तैयारी 2010 के कानून के बाद से एक दशक से ज्यादा समय से विकसित हो रही है।” CCP के केंद्रीय नेतृत्व के तहत लामबंदी व्यवस्था कानून में कुछ बदलाव किए गए हैं। जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए अपनी रिपोर्ट में हॉफमैन ने अनुच्छेद 3 और 16 को सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बताया। इन अनुच्छेदों के तहत राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी व्यवस्था को CCP की केंद्रीय समिति के अधीन कर दिया गया है। पहले इसकी जिम्मेदारी राज्य परिषद और केंद्रीय सैन्य आयोग के पास थी। इस बदलाव से यह साफ होता है कि पार्टी का नेतृत्व और उसका अधिकार बाकी सभी संस्थाओं से ऊपर रहेगा। पहले नागरिक संसाधनों की केवल ‘मांग’ की जा सकती थी। अब उन्हें ‘जब्त’ भी किया जा सकता है और उनकी मांग भी की जा सकती है। इसमें सुविधाएं, उपकरण, वाहन, आयोजन स्थल या सरकार की जरूरत का कोई भी दूसरा संसाधन शामिल है। CCP की मांग पूरी करने से इनकार करने या देरी करने पर जबरन कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है। चीनी अधिकारियों ने कहा है, “हमारा ध्यान सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और सहायक नियामक व्यवस्थाएं बनाने पर रहेगा।” यह कानून आम नागरिकों, कारोबार, सामाजिक संगठनों, रणनीतिक सामग्री, सैन्य उत्पादन क्षमता, पेशेवर सहायता और चीन की ओर से राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी व्यवस्था में शामिल किए जाने वाले किसी भी अन्य तत्व पर लागू होगा। डेटा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई जिम्मेदारियां हॉफमैन ने जवाबदेही बढ़ाने, डेटा और तकनीक से जुड़ी जिम्मेदारियां जोड़ने तथा राज्य के लामबंदी लक्ष्यों को लागू करने के लिए बाध्य संगठनों और लोगों का दायरा बढ़ाने की बात कही। कानून में पहली बार सूचना प्रबंधन का साफ तौर पर उल्लेख किया गया है। यह “झूठी राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी सूचना” तैयार करने या फैलाने पर रोक लगाता है। CCP की व्यवस्था में इस प्रावधान के तहत सरकार जिन सच्चाइयों को सामने नहीं आने देना चाहती, उन्हें भी ऐसी सूचना माना जा सकता है। पुराने कानून के कुछ हिस्से अप्रासंगिक हो चुके थे। उदाहरण के लिए, उसमें PLA के सैन्य क्षेत्रों का जिक्र था। इन सैन्य क्षेत्रों को 2016 में खत्म कर थिएटर कमांड बनाया गया था। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने कानून में सुधार के दौरान 2010 के कानून के कुछ हिस्सों को चुपचाप अस्थायी तौर पर लागू करना रोक दिया था। कानून में सुधार के उपाय पूरी तरह विकसित होने के बाद इसे संशोधित करने की योजना पहले से थी। परिवहन से लेकर खाद्य आपूर्ति तक जिम्मेदारी हॉफमैन के मुताबिक, अनुच्छेद 58 में कई क्षेत्रों की इकाइयों के लिए राष्ट्रीय रक्षा सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां पूरी करना और पेशेवर सहायता दल बनाए रखना जरूरी किया गया है। इन दलों को संगठित और प्रशिक्षित करना होगा। आदेश मिलने पर उन्हें लामबंदी से जुड़े काम पूरे करने में सक्षम होना होगा। इस सूची में परिवहन, डाक सेवाएं, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा और दवा आपूर्ति, खाद्य और अनाज आपूर्ति, इंजीनियरिंग समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। इस सूची में साइबर सुरक्षा को शामिल करना महत्वपूर्ण बदलाव है। CCP का मानना है कि युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए कानून में बदलाव जरूरी था। कानून में कहा गया है, “राज्य राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी में उन्नत तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है और उभरते क्षेत्रों में राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी क्षमता विकसित करता है।” नागरिक संसाधनों की जब्ती का प्रावधान अनुच्छेद 64 के तहत सभी संगठनों और लोगों को नागरिक संसाधनों की जबरन जब्ती या अस्थायी इस्तेमाल के लिए सहमति देनी होगी। इन संसाधनों में इमारतें, उपकरण, वाहन और जमीन शामिल हैं। सैन्य इकाइयों के अनुरोध पर जिला स्तर के स्थानीय अधिकारी जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कार्यालयों ने 2022-23 के दौरान ज्यादातर समितियों के रोजमर्रा के काम अपने हाथ में ले लिए थे। शांतिकाल में लामबंदी की क्षमता से जुड़े नागरिक और सैन्य क्षेत्रों के आंकड़ों का सर्वे करना भी जरूरी है। इससे बीजिंग को विकास और संसाधनों की जानकारी रखने में मदद मिलती है। इससे उन लोगों पर भी नजर रखी जा सकती है, जो ऐसे आंकड़े देने से इनकार करते हैं, देरी करते हैं या गलत जानकारी देते हैं। चीन के बाहर रहने वालों पर भी लागू हो सकते हैं कानून राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून चीन के बाहर रहने वाले लोगों पर भी लागू होता है। यह उस कोशिश का हिस्सा है, जिसमें चीन के कानूनों को व्यापक और दुनिया भर में लागू होने वाला बनाया जा रहा है। इसका एक और उदाहरण बीजिंग का 1 जुलाई 2026 को पारित जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून है। यह कानून उइगर, तिब्बती और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों के प्रति चीनी सरकार की नीतियों की आलोचना को अपराध बनाता है। धार्मिक मुद्दों पर आलोचना भी इसके दायरे में आती है। इस कानून के अनुच्छेद 63 में ‘देश से बाहर भी लागू होने’ का प्रावधान है। इसका मतलब है कि इसे चीन से बाहर रहने वाले नागरिकों या विदेशियों पर भी लागू किया जा सकता है। इसी वजह से चीन की यात्रा जोखिम भरी होती जा रही है। चीन किसी भी समय दावा कर सकता है कि किसी व्यक्ति ने दुनिया के किसी भी हिस्से में उसके कानून तोड़े हैं। यह शी सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके जरिए चीनी घरेलू कानूनों का इस्तेमाल कर दुनिया भर में विचारों और भाषण को नियंत्रित किया जा रहा है। हांगकांग की छात्रा की गिरफ्तारी का उदाहरण घरेलू कानूनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का एक और उदाहरण युएन चिंग-टिंग की गिरफ्तारी है। 2023 में उन्हें दो महीने के लिए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हांगकांग की इस छात्रा को विदेश में रहते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर “देशद्रोही” ऑनलाइन पोस्ट करने का दोषी ठहराया गया था। जापान की यूनिवर्सिटी से हांगकांग लौटने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने हांगकांग के 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की। उनकी ऑनलाइन टिप्पणियों में 13 पोस्ट शामिल थीं। इनमें लिखा था, “मैं हांगकांग की नागरिक हूं; मैं हांगकांग की आजादी का समर्थन करती हूं” और “जब तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी मौजूद है, तब तक घर कैसे हो सकता है?” चीन में लोगों के विचारों और कामकाज को नियंत्रित करने के लिए कानूनों का इस्तेमाल जारी है। समाज को युद्ध और संघर्ष के लिए तैयार करने की उसकी एकीकृत कोशिशें रुकती नहीं दिख रही हैं। संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून चीन के लोगों को भविष्य में संभावित युद्ध के लिए तैयार करने की एक और कोशिश है। इसमें ताइवान और अमेरिका को सबसे संभावित विरोधी माना गया है। खबर अपडेट हो रही है…

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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:केंद्र बोला- सिर्फ माता-पिता की सैलरी-आय से तय नहीं हो दर्जा; पद-संपत्ति भी देखें

ओबीसी क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से CSE-2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर मानदंड के आधार पर करने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में 11 मार्च को OBC क्रीमी लेयर की पहचान को लेकर फैसला दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को नहीं बदल सकता। सरकार ने कहा- सिर्फ माता-पिता की सैलरी या आय के आधार पर किसी उम्मीदवार को OBC क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पद की स्थिति के साथ आय और संपत्ति को भी देखना जरूरी है। केंद्र की दलील- उम्मीदवारों ने पुराने नियम के तहत परीक्षा दी केंद्र ने कहा कि CSE-2025 की परीक्षा 11 मार्च के फैसले से पहले शुरू हो गई थी। नोटिफिकेशन 22 जनवरी 2025 को आया था। प्रीलिम्स 25 मई और मेन्स 22 से 31 अगस्त 2025 तक हुई। 6 मार्च 2026 को 958 उम्मीदवारों का रिजल्ट आया। इसके पांच दिन बाद 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला आया। केंद्र के मुताबिक, अगर नया फैसला पिछली तारीख से लागू हुआ तो उन उम्मीदवारों के साथ भेदभाव हो सकता है, जिन्होंने पुराने नियमों के आधार पर परीक्षा दी थी। OBC उम्मीदवारों को उम्र और अटेम्प्ट का नुकसान केंद्र ने कहा कि पुराने नियमों के कारण कुछ उम्मीदवार खुद को OBC-NCL के लिए अयोग्य मान सकते थे। खासकर वे, जिनके माता-पिता PSU या निजी कंपनी में काम करते थे और उनकी आय तय सीमा से ज्यादा थी। ऐसे उम्मीदवारों ने जनरल कैटेगरी से परीक्षा दी होगी या OBC में आवेदन नहीं किया होगा। इससे उन्हें OBC-NCL की 3 साल की उम्र छूट और अतिरिक्त प्रयास का लाभ नहीं मिला होगा। वहीं, कुछ उम्मीदवारों ने OBC में आवेदन किया, लेकिन नए फैसले के बाद वे क्रीमी लेयर में आ सकते हैं। इससे पुराने नियम पर भरोसा करने वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार की स्थिति बन सकती है। दोबारा जांच हुई तो पूरी परीक्षा पर असर सरकार ने कहा कि नए फैसले के बाद कई उम्मीदवारों के माता-पिता की नौकरी और पद की दोबारा जांच करनी पड़ सकती है। अगर यह जांच उन लोगों तक भी हुई, जिन्होंने OBC में आवेदन नहीं किया था, तो उनकी कैटेगरी, उम्र में छूट और अतिरिक्त प्रयास जैसे मुद्दे उठेंगे। इससे CSE-2025 की पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करने जैसी स्थिति बन सकती है। सर्विस अलोकेशन में देरी से ट्रेनिंग पर असर केंद्र ने कहा कि चयनित अधिकारियों की आगे की प्रक्रिया तय समय पर होनी है। देरी से मसूरी की LBSNAA में फाउंडेशन कोर्स और ट्रेनिंग प्रभावित हो सकती है। सरकार के अनुसार, सर्विस अलोकेशन में देरी से IAS-IPS कैडर, वरिष्ठता, वेतन और दूसरी सेवाओं की ट्रेनिंग पर भी असर पड़ेगा। इसीलिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर नियमों के आधार पर पूरी करने की अनुमति मांगी है। अब विशेष बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा- SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं, यह सिद्धांत सिर्फ OBC और SEBC पर लागू केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। पूरी खबर पढ़ें…

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12 साल पहले टीम इंडिया में भी हुआ था पाकिस्तान जैसा कांड, इंग्लैंड दौरे पर रातों-रात बदल दिया गया था पूरा कोचिंग स्टाफ

PAK vs ENG Controversy: 2014 में इंग्लैंड दौरे पर गई टीम इंडिया जब शर्मनाक अंदाज में टेस्ट सीरीज हारी तो बीसीसीआई ने रातों-रात कोचिंग स्टाफ बदल दिया था. वनडे सीरीज के लिए पूर्व कप्तान रवि शास्त्री को क्रिकेट डायरेक्टर बनाया गया था और कहा गया कि डंकन फ्लेचर हेड कोच बने रहेंगे. Tue, 1 Sep 2026 08:56:13 +0530

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