Earthquake Today: नेपाल के बाद भारत में कांपी धरती, इन राज्यों में सुबह-सुबह आया भूकंप; घर से बाहर निकले लोग
Earthquake Today: दुनियाभर के देशों में आए दिन भूकंप के झटके महसूस किए गए जा रहे हैं. आज यानी मंगलवार तड़के अफगानिस्तान से लेकर भारत तक भूकंप के कई झटके महसूस किए गए. जिससे लोग दहशत में आ गए. सबसे पहले 1 सितंबर को आधी रात अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए हैं. हालांकि इस भूकंप से अभी तक किसी भी प्रकार के जान या माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है. लेकिन भूकंप आने के बाद लोग दहशत में आ गए और अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए.
सबसे पहले अफगानिस्तान में आया भूकंप
मंगलवार यानी 1 सितंबर की रात करीब एक बजे अफगानिस्तान में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. इसके कुछ देर बाद फिर से देश के कई हिस्सों में भूकंप आया. वहीं चीन में सोमवार देर रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. चीन के शिनजियांग में सोमवार रात 10 बजकर 49 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 दर्ज की गई. इस भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे 15 किमी की गहराई में था. इसके बाद अफगानिस्तान में भी भूकंप के हल्के झटके आए. अफगानिस्तान में मंगलवार तड़के 1.06 बजे 4.4 तीव्रता से धरती कांपी. इस भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे 132 की गहराई में दर्ज किया गया.
EQ of M: 3.9, On: 01/09/2026 01:48:04 IST, Lat: 27.638 N, Long: 88.766 E, Depth: 7 Km, Location: Mangan, Sikkim.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) August 31, 2026
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अफगानिस्तान के बाद सिक्किम में कांपी धरती
अफगानिस्तान में आधी रात आए भूंकप के बाद सिक्किम में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. ये भूकंप सिक्किम के मंगन जिले में आया. ये भूकंप रात 1.48 बजे आया. जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.9 दर्ज की गई. इस भूंकप का केंद्र जमीन के नीचे 7 किमी की गहराई में था. इस भूकंप से भी अभी तक किसी भी प्रकार के जान या माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है. इसके बाद अफगानिस्तान में फिर से भूकंप आया. रात 3.31 बजे अफगानिस्तान में 4.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए. जिसका केंद्र जमीन के नीचे 138 किमी की गहराई में दर्ज किया गया.
EQ of M: 4.2, On: 01/09/2026 03:31:37 IST, Lat: 34.386 N, Long: 70.336 E, Depth: 138 Km, Location: Afghanistan.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) August 31, 2026
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पाकिस्तान में 100 साल पुराना हिंदू मंदिर ढहाया, जमीन मदरसे को देने का आरोप
Pakistan Hindu Temple: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक सदी से भी अधिक पुराने एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर के नष्ट होने से एक नया विवाद खड़ा हो गया है. लाहौर से लगभग 130 किलोमीटर दूर, नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित यह मंदिर करीब 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ था. इस घटना के सामने आने के बाद से ही स्थानीय लोगों, अल्पसंख्यक समुदायों और सरकारी प्रशासन के बीच बयानों का भारी टकराव देखने को मिल रहा है.
PMMP पार्टी के अध्यक्ष ने की मंदिर दोबारा बनाने की अपील
इस घटना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक संपत्तियों और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (PMMP) के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात की. उन्होंने एक लिखित ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि इस कृत्य में शामिल दोषियों और मंदिर की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही उन्होंने मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा बनाने की भी अपील की है. इसके अलावा, स्थानीय हिंदू समुदाय के नेता रतन लाल ने जिला प्रशासन के रवैये की घोर निंदा की है. उनका कहना है कि प्रशासन मंदिर स्थल की सुरक्षा करने और अवैध कब्जे को रोकने में पूरी तरह विफल रहा. उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उस जगह पर अभी भी मदरसा चल रहा है, जिसके कारण अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोग वहां जाने से भी खौफ खा रहे हैं.
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घटना को लेकर दो अलग-अलग दावे
इस प्राचीन मंदिर के नष्ट होने के संबंध में दो बिल्कुल विपरीत बातें सामने आई हैं. स्थानीय लोगों, राजनीतिक दलों और अल्पसंख्यक संगठनों का सीधा आरोप है कि 21 अगस्त को प्रतिबंधित संगठन 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान' (TLP) से जुड़े कुछ कट्टरपंथियों ने जानबूझकर इस मंदिर को ढहा दिया. उनका मानना है कि इस कृत्य का मुख्य उद्देश्य मंदिर की जमीन पर कब्जा करके उसे पास ही में संचालित एक मदरसे में मिलाना था. लोगों का यह भी दावा है कि ढांचे को गिराने के बाद वहां से मंदिर के शिखर की धातु और मलबे की ईंटें भी पूरी तरह हटा दी गईं. इसके विपरीत, पाकिस्तान सरकार और 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' (ETPB) के अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. सरकारी प्रशासन का तर्क है कि यह 100 से 125 साल पुराना मंदिर काफी जर्जर हालत में था और भारी बारिश के कारण यह अपने आप ढह गया है, इसे किसी ने तोड़ा नहीं है.
करीब 125 साल पुराना था मंदिर
इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।.उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में भले ही इस मंदिर का कोई विशेष नाम दर्ज नहीं है, लेकिन इसके ऐतिहासिक और 125 साल पुराने होने में कोई संदेह नहीं है. जमीन पर कब्जे के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने बताया कि मदरसे की स्थापना के लिए केवल मंदिर से लगी हुई जमीन पट्टे (लीज) पर दी गई थी, मुख्य मंदिर की जमीन किसी को नहीं दी गई है. मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि इस विषय पर अंतिम फैसला अब ईटीपीबी के उच्च अधिकारियों द्वारा ही लिया जाएगा.
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