Responsive Scrollable Menu

जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ते सांप काटने के केसेज:सांप काटे तो तुरंत करें ये 6 काम, ये 10 गलतियां न करें, बता रहे हैं डॉक्टर

पिछले दिनों महाराष्ट्र पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने सांप के काटने (स्नेक बाइट) को ‘नोटिफाएबल डिजीज’ घोषित किया। यानी अब स्वास्थ्य विभाग को स्नेक बाइट के मामलों और इससे होने वाली मौतों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। भारत में हर साल लाखों लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं। मानसून के दौरान ये मामले और बढ़ जाते हैं। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देश में सालाना 30 से 40 लाख स्नेक बाइट के मामले सामने आते हैं। इनमें 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। दुनिया भर में सर्पदंश से होने वाली कुल मौतों में आधे से ज्यादा मौत अकेले भारत में होती है। चिंता की बात यह है कि हर 10 में से केवल 3 पीड़ित ही अस्पताल तक पहुंच पाते हैं। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज स्नेक बाइट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अजय नायर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- मानसून में स्नेक बाइट के मामले क्यों बढ़ जाते हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- सांप काटने पर क्या लक्षण दिखते हैं? कब तुरंत हॉस्पिटल ले जाना जरूरी होता है? जवाब- स्नेकबाइट के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि सांप जहरीला था या नहीं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिनमें तुरंत हॉस्पिटल ले जाना बेहद जरूरी है। ग्राफिक में सभी लक्षण देखिए- सवाल- अगर सांप काट ले तो सबसे पहले क्या करना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- 1. मरीज को शांत, स्थिर रखें 2. चलने-फिरने न दें 3. हाथ या पैर को सहारा दें 4. कसे हुए कपड़े-सामान हटा दें 5. तुरंत अस्पताल ले जाएं सवाल- सांप काटने पर डॉक्टर क्या ट्रीटमेंट देते हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- सांप काटने पर डॉक्टर सांप की फोटो क्लिक करने को क्यों कहते हैं? जवाब- इससे सांप की प्रजाति समझने व उसके जहर का अंदाजा लगाने और इलाज में मदद मिलती है। सवाल- सांप काटने पर किस अस्पताल में जाना चाहिए? जवाब- ऐसे अस्पताल ले जाएं, जहां इमरजेंसी, ICU, ऑक्सीजन और एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हो। लक्षण गंभीर हों तो बड़े ट्रॉमा सेंटर या मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल जाएं। अस्पताल दूर हो तो पहले नजदीकी PHC/CHC पहुंचें। सवाल- सांप काटने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- इस दौरान की गई गलतियों से हालत बिगड़ सकती है। इसलिए इलाज में देरी करने या घरेलू उपाय अपनाने से बचें। याद रखें, स्नेक बाइट का सही इलाज अस्पताल में ही संभव है। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- बारिश के मौसम में किन जगहों पर सांप ज्यादा निकलते हैं? जवाब- ऐसी जगहों पर सांप ज्यादा निकलते हैं- सवाल- घर में या आसपास सांप दिखे तो क्या करें और क्या बिल्कुल न करें? जवाब- ग्राफिक में सभी सावधानियां देखिए- सवाल- मानसून में घर के अंदर सांप-बिच्छू आने से कैसे रोकें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या कोई ऐसा तरीका है, जिससे जहरीले और गैर-जहरीले सांप में फर्क पता चल सके? जवाब- नहीं, आम लोगों के लिए सिर्फ देखकर यह तय करना मुश्किल होता है कि सांप जहरीला है या नहीं। सिर का आकार, रंग, आंखों की पुतली या शरीर के निशान जैसे पारंपरिक तरीके हमेशा सही नहीं होते। एक ही प्रजाति के सांपों का रंग और आकार भी अलग-अलग हो सकता है। सवाल- अगर जंगल या खेतों के पास रहते हैं तो सांपों से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- जंगल, खेत या ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए- स्नेक बाइट से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब सवाल- घर में मौजूद कौन-सी चीजें सांपों को आकर्षित करती हैं? इनका फेवरेट प्लेस क्या है? जवाब- चूहे, छिपकलियां और मेंढक सांपों को आकर्षित करते हैं। वहीं घास-झाड़ियां, लकड़ी, ईंट, कबाड़ और भूसे के ढेर उनके छिपने की पसंदीदा जगहें होती हैं। सांप अंधेरी, ठंडी और नम जगहों जैसे स्टोर रूम, दरारों, पाइपों के आसपास और पानी जमा होने वाले हिस्सों में भी छिप सकते हैं। सवाल- सांप काटने पर एक्सपर्ट जहर चूसने या घाव काटने से क्यों मना करते हैं? जवाब- डॉ. अजय नायर के मुताबिक, जहर चूसने या घाव काटने से इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। ********************* ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- FDA ने रोकी धतूरे की ऑनलाइन बिक्री:जानिए यह कितना खतरनाक, अगर गलती से खा लिया तो तुरंत क्या करें कर्नाटक के फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अमेजन, स्विगी, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। जांच में पता चला कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे के फल और बीज खाने-पीने के प्रोडक्ट्स की कैटेगरी में बेचे जा रहे थे। पूरी खबर पढ़ें…

Continue reading on the app

फिजिकल हेल्थ- पेट अक्सर खराब रहता है:हो सकता है ग्लूटेन इन्टॉलरेंस, डॉक्टर से जानें इस बीमारी के लक्षण, कारण, इससे कैसे बचें

गैस बनना या बार-बार दस्त होना कॉमन डाइजेस्टिव इश्यू हैं। ज्यादातर लोग इन्हें सामान्य अपच या खानपान की गड़बड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें या बार-बार होती रहें, तो इसके पीछे ‘ग्लूटेन इन्टॉलरेंस’ एक कारण हो सकता है। ग्लूटेन इन्टॉलरेंस एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें शरीर ग्लूटेन वाली चीजों को पचा नहीं पाता है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया में हर 10 में से 1 व्यक्ति ग्लूटेन इन्टॉलरेंस से प्रभावित है। इसके बावजूद बहुत से लोग इस बारे में जानते नहीं हैं। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में ग्लूटेन इन्टॉलरेंस की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. एम.के सिंह, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- ग्लूटेन क्या है? जवाब- ग्लूटेन एक तरह का प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में प्राकृतिक रूप से होता है। इन अनाजों के आटे में पानी मिलाकर गूंथने पर ग्लूटेन एक्टिव होता है और आटे को लचीला और मुलायम बनाता है। इसी वजह से रोटी आसानी से बनती है और ब्रेड, पिज्जा जैसे बेकरी प्रोडक्ट्स को खास बनावट मिलती है। सवाल- किन अनाजों में ग्लूटेन होता है? जवाब- ग्लूटेन मुख्य रूप से गेहूं, जौ और राई में होता है। इसलिए इन अनाजों से बनने वाले फूड आइटम्स में भी ग्लूटेन मौजूद होता है। नीचे ग्राफिक में ग्लूटेन वाले फूड आइटम्स की लिस्ट देखिए- सवाल- ग्लूटेन कुछ लोगों के लिए समस्या कैसे बन जाता है? जवाब- ज्यादातर लोगों का शरीर ग्लूटेन को बिना किसी परेशानी के पचा लेता है। लेकिन कुछ लोगों का इम्यून सिस्टम ग्लूटेन को हार्मफुल सब्सटेंस समझकर प्रतिक्रिया देता है। बार-बार ऐसा होने पर छोटी आंत में सूजन आ सकती है। साथ ही भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। सवाल- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस क्या होता है? जवाब- यह एक हेल्थ कंडीशन है। इसमें ग्लूटेन वाली चीजें खाने के बाद व्यक्ति को बार-बार हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं। ये समस्याएं ग्लूटेन खाने के बाद बढ़ सकती हैं और ग्लूटेन से परहेज करने पर कम हो सकती हैं। ग्लूटेन इन्टॉलरेंस को ‘नॉन-सीलिएक ग्लूटेन’ या ‘व्हीट सेंसिटिविटी’ भी कहते हैं। सवाल- क्या ग्लूटेन इन्टॉलरेंस और सीलिएक डिजीज एक ही बीमारी है? जवाब- नहीं, दोनों एक ही बीमारी नहीं हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सीलिएक डिजीज यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है। इसमें ग्लूटेन वाली चीजें खाने पर इम्यून सिस्टम छोटी आंत पर हमला करने लगता है और उसे नुकसान पहुंचा सकता है। ग्लूटेन इन्टॉलरेंस ग्लूटेन इन्टॉलरेंस में व्यक्ति को ग्लूटेन खाने के बाद परेशानी तो होती है, लेकिन आमतौर पर छोटी आंत को सीलिएक डिजीज जैसा नुकसान नहीं पहुंचता। सवाल- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस क्यों होता है? जवाब- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कुछ रिसर्च बताती हैं कि समस्या हमेशा ग्लूटेन की वजह से नहीं होती। गेहूं समेत कई फूड आइटम्स में मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट्स भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। जब शरीर इन्हें ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, तो वे आंत में फर्मेंट होने लगते हैं और परेशानी पैदा कर सकते हैं। सवाल- शरीर में यह समस्या कैसे विकसित होती है? जवाब- जब कोई व्यक्ति (जिसे ग्लूटेन इन्टॉलरेंस है) ग्लूटेन वाली चीजें खाता है, तो उसके डाइजेस्टिव सिस्टम की फंक्शनिंग प्रभावित होने लगती है। इससे शरीर में कई तरह की परेशानी शुरू हो सकती है। यह परेशानी हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों में इसका असर हल्का होता है, जबकि कुछ में ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है। सवाल- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस के संकेत क्या हैं? जवाब- इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। सबसे कॉमन संकेत डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़े होते हैं। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- किन लोगों में ग्लूटेन इन्टॉलरेंस का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों का शरीर ग्लूटेन के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होता है। कुछ लोगों में ये जेनेटिक होता है, जबकि कुछ में यह समस्या बाद में विकसित हो सकती है। किन्हें ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं कि किसी को ग्लूटेन इन्टॉलरेंस है? जवाब- इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। ग्लूटेन इन्टॉलरेंस की आशंका होने पर कुछ स्टेप्स में जांच करते हैं। स्टेप-1 स्टेप-2 स्टेप-3 सवाल- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस का इलाज क्या है? जवाब- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। इसे मैनेज करने का सबसे प्रभावी तरीका ग्लूटेन-फ्री या ग्लूटेन सीमित डाइट अपनाना है। इससे ज्यादातर लोगों के लक्षणों में सुधार हो जाता है। कुछ मामलों में डॉक्टर यह भी चेक कर सकते हैं कि व्यक्ति को किसी दूसरे फूड इंग्रीडिएंट से सेंसिटिविटी तो नहीं है। ध्यान रखें, ग्लूटेन से परहेज करने पर कुछ लोगों में फाइबर, आयरन और विटामिन-B जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसलिए डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह जरूर लें। सवाल- गलती से ग्लूटेन वाली चीज खा लें तो क्या करें? जवाब- ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। एक बार ग्लूटेन शरीर में पहुंच जाने के बाद उसे तुरंत निष्क्रिय करने का कोई तरीका नहीं होता। ऐसे में लक्षणों को मैनेज करने या शरीर को रिकवर होने का समय देना चाहिए। क्या कदम उठाए जा सकते हैं, ग्राफिक में देखिए- ग्राफिक 5 सवाल- जिन्हें ग्लूटेन इन्टॉलरेंस है, उन्हें कौन सा अनाज खाना चाहिए और कौन सा नहीं खाना चाहिए? जवाब- ग्लूटेन इन्टॉलरेंस वाले लोगों को ऐसे अनाज चुनने चाहिए, जिनमें प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन नहीं होता। पैकेज्ड फूड आइटम्स खरीदते समय लेबल जरूर चेक करें, क्योंकि उनमें ग्लूटेन हो सकता है। ग्राफिक में इसकी लिस्ट देखिए- ग्लूटेन से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या हर व्यक्ति को ग्लूटेन खाना छोड़ देना चाहिए? जवाब- नहीं, ज्यादातर लोगों के लिए ग्लूटेन पूरी तरह सेफ होता है और इसे छोड़ने की कोई जरूरत नहीं होती। सवाल- क्या ग्लूटेन-फ्री डाइट वजन घटाने में मददगार है? जवाब– हां, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्लूटेन-फ्री डाइट अपने आप वजन घटाती है। अक्सर ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि लोग ब्रेड, बिस्किट, केक, पिज्जा और अन्य प्रोसेस्ड फूड कम खाने लगते हैं। इससे कुल कैलोरी इनटेक घट जाता है। वजन कम होना या बढ़ना, इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति कुल कितनी कैलोरी ले रहा है और उसकी लाइफस्टाइल कैसी है। सवाल- क्या ग्लूटेन छोड़ने से हर किसी की हेल्थ बेहतर होती है? जवाब- नहीं, ग्लूटेन छोड़ने और बेहतर हेल्थ के बीच सीधा संबंध नहीं है। अच्छी सेहत के लिए पूरी डाइट का संतुलित और पौष्टिक होना ज्यादा जरूरी है, सिर्फ ग्लूटेन छोड़ना नहीं। सवाल- क्या ग्लूटेन-फ्री चीजें हमेशा हेल्दी होती हैं? जवाब- नहीं, किसी चीज का ग्लूटेन-फ्री होना उसे अपने आप हेल्दी नहीं बनाता। कई ग्लूटेन-फ्री प्रोडक्ट्स में स्वाद और टेक्सचर बनाए रखने के लिए एडेड शुगर, नमक या फैट मिलाया जा सकता है। ************ ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ……………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- कमर-जांघों की चर्बी सिर्फ मोटापा नहीं:हो सकता है लिपेडेमा, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके कुछ महिलाओं की जांघों और कूल्हों पर जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है। डाइटिंग और रेगुलर एक्सरसाइज से भी यह चर्बी कम नहीं होती। अक्सर लोग इसे मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह लिपेडेमा (Lipedema) का संकेत हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

Continue reading on the app

  Sports
  Videos
See all

CNG-PNG Price Hike: Mumbai में महंगी हुई CNG-PNG | #cngprices #pngprice #mumbai #shorts #viral #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-01T12:13:11+00:00

Nepal Flood Live Update: नेपाल में फिर से आ रही महातबाही?| Rescue |Koshi River Flood | Breaking News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-01T12:13:13+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers