मुख्य सचिव ने की पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा, मानव तस्करी एवं डिजिटल इन्वेस्टीगेशन को मजबूत करने के निर्देश
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा की. बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभाग द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों की सराहना की. उन्होंने मानव एवं बाल तस्करी की रोकथाम, साइबर अपराधों से निपटने, नारकोटिक्स के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, इन्वेस्टीगेशन में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग तथा डिजिटल पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
पोर्टल का शीघ्र इंटीग्रेशन किया जाए
मुख्य सचिव ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में मैदानी क्षेत्रों सहित पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग के पोर्टल का शीघ्र इंटीग्रेशन किया जाए तथा एपी आई इंटीग्रेशन के माध्यम से दोनों विभागों के डेटा में किसी प्रकार विसंगति न हो. इसके लिए पुलिस एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मध्य कॉर्डिनेशन के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती भी शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
मुख्य सचिव ने लापता बालिकाओं एवं नाबालिग बच्चों को ट्रेस करने के लिए डेडिकेटेड टीम एवं मजबूत मैकेनिज्म विकसित करने तथा अनट्रेस्ड बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए. साथ ही विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और बेहतर समन्वय पर जोर दिया. उन्होंने ऑपरेशन स्माइल का नवीनतम डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि मानव एवं बाल तस्करी के मामलों का केस-वाइज विश्लेषण किया जाए. तस्करी के नेटवर्क एवं संगठित मामलों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी एवं मजबूत तंत्र विकसित किया जाए. उन्होंने कहा कि पीड़ितों का रेस्क्यू करने के बाद उनकी रिहैबिलिटेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है. अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पीड़ितों को उनके अभिभावकों को सुरक्षित रूप से सौंपे जाने तक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उन्होंने रेस्क्यू मैकेनिज्म को और मजबूत करने तथा जिला स्तर पर डेडिकेटेड टीम एवं व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए.
साइबर पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर
साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मुख्य सचिव ने साइबर पुलिसिंग की मैनपावर को मजबूत करने के निर्देश दिए. उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई, ताकि साइबर अपराधों के मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
मुख्य सचिव ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के अंतर्गत प्रभावी कार्रवाई के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने NCORD की बैठक में इस सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किए जाने को कहा.
इन्वेस्टीगेशन में तकनीक का अधिकाधिक उपयोग
मुख्य सचिव ने कहा कि पुलिस इन्वेस्टीगेशन में टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने विवेचना अधिकारियों को आवश्यक इन्वेस्टीगेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि विवेचना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके. उन्होंने कहा कि ऐसे थानों जहाँ अधिकतर एफ़आईआर दर्ज होती हैं, उन थानों में इन्वेस्टीगेशन विंग खोली जा सकती है. उन्होंने e-FIR के रिजेक्शन का विश्लेषण एवं क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश भी दिए. साथ ही न्यायश्रुति, FSL, मालखाना एवं Dial 112 को शीघ्र लाइव करने तथा e-Summons के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए. उन्होंने ICJS 2.0 साइट्स पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की समीक्षा करते हुए कमजोर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में नेटवर्क एवं बैंडविड्थ बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि डिजिटल पुलिसिंग की व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनोन्मुख बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा शेयरिंग, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जिला स्तर पर मजबूत मैकेनिज्म विकसित किया जाना आवश्यक है.
थानों स्पेस की कमी की समस्याएं आ रही
मुख्य सचिव ने कहा कि थानों का अधिकतम स्पेस सीज गाड़ियों से भरा रहता है. इससे थानों स्पेस की कमी की समस्याएं आ रही हैं, जिससे थानों को अधिक उपयोगी और प्रभावशाली बनाने ने भी समस्या आ रही है. उन्होंने थानों में सीज गाड़ियों को डिस्पोज ऑफ़ करने के लिए डिजिटल स्टोरेज पर जाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि इससे थानों में स्पेस की समस्या को खत्म किया जा सकेगा. उन्होंने जनपदों को भी कैम्पेन मोड पर डिस्पोज कराते हुए इसकी मंथली रिपोर्ट दिए जाने के निर्देश दिए. इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह श्री शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे,आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी श्रीमती तृप्ति भट्ट एवं अजय सिंह उपस्थित थे.
बाबर बोले– लॉर्ड्स टेस्ट बायकॉट की चर्चा नहीं हुई:दावा था- इमरान के बेटों का इंटरव्यू से PCB नाराज, मैच से हटने की धमकी दी
पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम ने लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान के बायकॉट की खबरों को एक सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार रात को BBC ने बाबर से पूछा गया कि क्या लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन लंच के बाद पाकिस्तान के मैदान पर नहीं उतरने की बात हुई थी। इस पर बाबर ने कहा, 'नहीं, नहीं, नहीं। मैंने ऐसी कोई बात नहीं सुनी।' उनसे जब पूछा गया कि क्या उन्हें इस संभावना को लेकर चल रही किसी बातचीत की जानकारी थी, तो उन्होंने फिर कहा, ‘नहीं।’ इमरान के बेटों का इंटरव्यू प्रसारित होने पर विवाद हुआ लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन स्काई स्पोर्ट्स ने पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटों कासिम और सुलेमान का इंटरव्यू प्रसारित किया था। इस पर विवाद हो गया। मीडिया ने दावा किया कि पाकिस्तानी बोर्ड ने ब्रॉडकास्टर के खिलाफ आधिकारिक शिकायत की थी। इतना ही नहीं, इंटरव्यू प्रसारित होने के बाद PCB ने मैदान पर नहीं उतरने पर विचार किया था। इमरान के बेटों ने पिता की सेहत पर चिंता जताई स्काई स्पोर्ट्स के इस इंटरव्यू में कार्यक्रम के होस्ट और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथरटन ने कासिम और सुलेमान से बातचीत की थी। दोनों ने पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद अपने पिता इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, PCB चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ब्रॉडकास्टर से इंटरव्यू प्रसारित नहीं करने को कहा था। इसके बाद भी स्काई स्पोर्ट्स ने इंटरव्यू प्रसारित कर दिया। टेस्ट के दूसरे दिन पाकिस्तान के कोच सरफराज अहमद से भी इंटरव्यू और PCB की कथित धमकी को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने इससे अनजान होने की बात कही। सरफराज ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद रिपोर्टर्स से कहा, “मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता। मैं सिर्फ मैच पर ध्यान दे रहा हूं। आप इंटरव्यू की बात कर रहे हैं? हमें इंटरव्यू के बारे में नहीं पता। सब ठीक है। उस समय हम लंच कर रहे थे।” कासिम बोले- इमरान को 23 घंटे से ज्यादा सेल में रख रहे इंटरव्यू में कासिम ने बताया कि पाकिस्तान के अधिकारी जेल में इमरान खान के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे उन्हें 23 घंटे से ज्यादा समय तक एक सेल में पूरी तरह अलग-थलग रख रहे हैं।” कासिम ने कहा, “इस समय हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि उन्हें सही इलाज मिले। जब अधिकारियों ने उन्हें देखा था, तब आंख की समस्या के कारण उनकी आंख पर पट्टी लगी हुई थी।” उन्होंने आगे कहा, “वे साफ तौर पर तनाव में दिख रहे थे। हमारे लिए यह समझना बहुत मुश्किल है, क्योंकि मैंने उन्हें हर बार, बहुत मुश्किल हालात में भी, शांत और आत्मविश्वास से भरे व्यक्तित्व के तौर पर देखा है।”
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