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China की नई Border Check नीति से बढ़ी Taiwan की चिंता, नागरिकों के लिए जारी की गई सख्त चेतावनी

ताइवान के मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल (MAC) ने नागरिकों को चीन की यात्रा करते समय ज़्यादा सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। यह चेतावनी एक ताइवानी व्यक्ति के उस दावे के बाद दी गई है जिसमें उसने कहा था कि एमनेस्टी इंटरनेशनल में पहले काम करने की वजह से उसके बेटे से शंघाई में छह घंटे तक पूछताछ की गई थी। 'द ताइपे टाइम्स' ने यह रिपोर्ट दी है। 'द ताइपे टाइम्स' के अनुसार, MAC ने बताया कि 1 जनवरी, 2024 से अब तक 426 ताइवानी लोग चीन में या तो लापता हो गए, हिरासत में लिए गए या उनकी आवाजाही पर रोक लगाई गई। यह संख्या पिछले हफ़्ते की तुलना में सात ज़्यादा है। इन मामलों में, 160 ताइवानी लोगों के लापता होने की सूचना मिली, 36 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया और 230 लोगों की आवाजाही की आज़ादी पर रोक लगाए जाने का संदेह था।

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यह चेतावनी चीन के नए एंट्री और एग्ज़िट नियमों के लागू होने से पहले दी गई है, जो 15 सितंबर से प्रभावी होने वाले हैं। MAC ने कहा कि इन उपायों से मौजूदा नियंत्रण और औपचारिक हो जाएंगे, जबकि महत्वपूर्ण प्रावधानों को मोटे तौर पर परिभाषित किया जाएगा, जिससे चीनी अधिकारियों को इन्हें लागू करने में काफ़ी हद तक अपनी मर्ज़ी से फ़ैसला लेने की गुंजाइश मिल सकती है। काउंसिल ने चेतावनी दी कि 'ताइवान कॉम्पैट्रियट परमिट' रखने वाले ताइवानी यात्रियों को भी नए नियमों के तहत जांच का सामना करना पड़ सकता है। उसने बताया कि चीनी अधिकारियों ने पहले भी ऐसे लोगों को निशाना बनाया है जिन्होंने सालों पहले राजनीतिक या अधिकारों से जुड़ी गतिविधियां की थीं, भले ही वे बाद में दूसरे क्षेत्रों में चले गए हों।
यह ताज़ा मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक ताइवानी व्यक्ति ने बताया कि शंघाई में बिज़नेस के सिलसिले में यात्रा करते समय चीनी कस्टम अधिकारियों ने उसके बेटे को रोक लिया था।

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'द ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, सादे कपड़ों में आए तीन अधिकारियों ने कथित तौर पर उससे एमनेस्टी इंटरनेशनल में उसके पिछले काम के बारे में पूछताछ की। इसमें संस्था की फंडिंग, चीन, हांगकांग, शिनजियांग और तिब्बत से जुड़ी गतिविधियां और एक्टिविस्ट व राजनीतिक हस्तियों के साथ उसके संपर्क शामिल थे। अधिकारियों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति पर अपना सेलफोन अनलॉक करने का दबाव डाला और उसके मैसेज, तस्वीरें, ईमेल और काम से जुड़ी फाइलें देखीं।
आखिरकार उसने चीन में प्रवेश करने का अपना आवेदन वापस ले लिया और सुरक्षित ताइवान लौट आया। MAC ने कहा कि यह घटना अधिकारियों द्वारा पहले दर्ज की गई ऐसी ही घटनाओं से मेल खाती है, हालांकि परिवार ने इस मामले की औपचारिक रूप से रिपोर्ट नहीं की थी, जैसा कि 'द ताइपे टाइम्स' ने बताया है।

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बिहार के ‘सहयोग मॉडल’ से बाकि राज्यों को भी सीखने की जरूरत

क्या किसी सरकारी स्कूल या हॉस्टल में गंदा पानी, खराब खाना या बिजली की किल्लत जैसी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान 30 दिन के भीतर पाना संभव है?...जहां देश के अधिकांश राज्यों में छात्र ऐसी बुनियादी सुविधाओं के लिए महीनों प्रशासनिक चक्कर काटने या सड़कों पर उतरने को मजबूर होते हैं, वहीं बिहार सरकार ने एक पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था से इस धारणा को बदलने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा शुरू की गई इस नई पहल ने छात्र शिकायतों के निपटारे का एक ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसकी गूंज अब देश भर में सुनाई दे रही है।

छात्रों की शिकायतें अक्सर लंबे समय तक अनसुलझी रहती हैं, इसकी बड़ी वजह प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलता है। किसी छात्र को हॉस्टल की सफाई, भोजन की गुणवत्ता, बिजली-पानी या फीस से जुड़ी दिक्कत होने पर पहले वार्डन, फिर प्रिंसिपल और जरूरत पड़ने पर जिला शिक्षा कार्यालय तक जाना पड़ता है। इस प्रक्रिया में न तो कोई तय समयसीमा होती है और न ही स्पष्ट जवाबदेही तय होती है, जिस वजह से छोटी शिकायतें भी हफ्तों-महीनों तक लंबित रह जाती हैं।

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बिहार सरकार के विद्यार्थी सहयोग पोर्टल की खासियत यह है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए दो अलग कैटेगरी बनाई गई हैं — पहली, शैक्षणिक संस्थान यानी विद्यालय, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय से संबंधित विद्यार्थियों के लिए, और दूसरी, छात्रावास यानी हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए। पोर्टल के होमपेज पर ही यह दोनों विकल्प दिए गए हैं, जिससे छात्र सही कैटेगरी चुनकर सीधे संबंधित फॉर्म तक पहुंच जाता है। कैटेगरी चुनने के बाद छात्र के सामने एक सीधा-सादा फॉर्म खुलता है, जिसमें नाम, लिंग, पिता का नाम, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर जैसी बुनियादी जानकारी भरनी होती है। ईमेल आईडी को वैकल्पिक रखा गया है, ताकि जिन छात्रों के पास ईमेल नहीं है वे भी शिकायत दर्ज करा सकें, जबकि मोबाइल नंबर को ओटीपी से वेरिफाई किया जाता है ताकि हर शिकायत असली छात्र की ओर से ही दर्ज हो।

पोर्टल पर छात्रों के लिए तीन सुविधाएं दी गई हैं। शिकायत दर्ज कराने का विकल्प हॉस्टल सुविधाओं, भोजन, स्वच्छता, सुरक्षा और बिजली से जुड़ी समस्याओं के लिए है। इसके अलावा छात्र व्यवस्था सुधारने से जुड़े अपने सुझाव भी साझा कर सकते हैं, और सबसे अहम बात यह कि एक बार शिकायत दर्ज करने के बाद छात्र उसकी मौजूदा स्थिति और उस पर हुई कार्रवाई को ट्रैक भी कर सकता है। पोर्टल पर सबसे ज्यादा दर्ज होने वाली शिकायतों को भोजन, पेयजल, बिजली, शौचालय-सफाई, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और इंटरनेट जैसी कैटेगरी में पहले से बांटा गया है, जिससे शिकायत सीधे संबंधित विभाग तक पहुंचती है और निपटारे में देरी नहीं होती।

पोर्टल पर दर्ज हर शिकायत का 30 दिनों के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। समाधान के बाद संबंधित छात्र को लिखित रूप से इसकी सूचना भी दी जाती है, ताकि यह साफ रहे कि उसकी शिकायत पर वाकई कार्रवाई हुई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिकायतकर्ता छात्र-छात्राओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, जिससे छात्र बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। जिन छात्रों के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा नहीं है, उनके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1100 भी उपलब्ध कराया गया है।

पोर्टल का मकसद छात्रों की शैक्षणिक, परीक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति और अन्य संस्थागत समस्याओं का पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से समाधान करना है।

सरकारी पोर्टल और हेल्पलाइन की घोषणाएं आमतौर पर होती रहती हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर व्यवहार में उतनी असरदार साबित नहीं होतीं। लेकिन बिहार सरकार की अब तक की कोशिशों को देखें तो ऐसा लगता है कि सरकार गंभीरता से छात्रों की समस्याओं को सुनने की ओर अग्रसर है। इस पोर्टल की खासियत है कि इसमें एक जवाबदेही तंत्र भी जोड़ा गया है — तय समयसीमा में शिकायत का समाधान न होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है, जिससे यह सिर्फ कागजी व्यवस्था बनकर नहीं रह जाती।

पोर्टल के साथ-साथ सरकार ने हर महीने सहयोग शिविर आयोजित करने की व्यवस्था भी बनाई है, जिनमें मंत्री, विधायक, सांसद और संबंधित अधिकारी सीधे स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों से बातचीत करेंगे। इन शिविरों में मिलने वाली शिकायतों और सुझावों को भी उसी पोर्टल पर दर्ज कर ट्रैक किया जाता है, जिससे पूरा सिस्टम एक जगह जुड़ा रहता है। यह व्यवस्था खासकर उन इलाकों में उपयोगी मानी जा रही है, जहां छात्र ऑनलाइन माध्यम के बजाय सीधी बातचीत में ज्यादा सहज महसूस करते हैं।

जिन राज्यों में छात्र आंदोलन और कैंपस में असंतोष की घटनाएं सामने आती रही हैं, उनके लिए बिहार का यह मॉडल कुछ स्पष्ट संकेत देता है। शिकायत निवारण तंत्र तभी प्रभावी होता है जब उसमें तय समयसीमा और जवाबदेही दोनों शामिल हों। शिकायत और छात्रावास की समस्याओं को अलग-अलग कैटेगरी में बांटने और फॉर्म को आसान रखने से समाधान की रफ्तार तेज होती है, जबकि स्टेटस ट्रैक करने की सुविधा से छात्रों को भरोसा रहता है कि उनकी बात पर वाकई काम हो रहा है। साथ ही, सिर्फ डिजिटल पोर्टल पर निर्भर रहने के बजाय हेल्पलाइन और जमीनी शिविर जैसे विकल्प भी जरूरी हैं, ताकि हर वर्ग का छात्र इस व्यवस्था से जुड़ सके।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बड़ी घोषणाओं के साथ-साथ जमीनी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। बिहार का अनुभव यह दिखाता है कि अगर शिकायत निवारण तंत्र में पारदर्शिता, आसान प्रोसेस और जवाबदेही तय की जाए, तो नतीजे भी सामने आते हैं। अब देखना यह होगा कि अन्य राज्य इस मॉडल से कितना सीखते हैं और अपने यहां इसे किस रूप में लागू करते हैं।

- संजीव कुमार मिश्र

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  Sports

Rohit Sharma का TV Debut: 'Family Full House' से करेंगे मनोरंजन की नई पारी शुरू

स्टार भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा टीवी पर डेब्यू करने जा रहे हैं। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने आज अपने आने वाले शो 'फ़ैमिली फ़ुल हाउस विद रोहित शर्मा' के नाम की घोषणा की। भारत के 2024 T20 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान रोहित के साथ, यह शो उनके लंबे समय से प्रतीक्षित एंटरटेनमेंट डेब्यू का प्रतीक है। एक बेहतरीन पारिवारिक मनोरंजन शो पेश किया जा रहा है, जिसका प्रीमियर 19 सितंबर, 2026 को होगा।
 

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रोहित के टेस्ट और T20 क्रिकेट से रिटायर होने के बाद, अब वे सिर्फ़ ODI खेलने वाले खिलाड़ी रह गए हैं। जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ़ तीन मैचों की ODI सीरीज़ में भारत को 2-1 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रोहित ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। 39 साल के रोहित शर्मा की उम्र को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं कि क्या वे 2027 वर्ल्ड कप में खेल पाएंगे या नहीं, फिर भी उन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन से आलोचकों का मुँह बंद रखा। 

इंग्लैंड दौरे के दौरान, लॉर्ड्स में होने वाले तीसरे ODI से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस मशहूर मैदान पर सीरीज़ का फ़ैसला करने वाला यह मैच भारत के लिए उनका आखिरी इंटरनेशनल मैच हो सकता है। हालांकि, इंग्लैंड के खिलाफ़ 388 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए उनकी 138 रनों की पारी ने यह साबित कर दिया कि उनमें अभी भी बल्ले से बड़ा असर डालने की काबिलियत है। शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ़ तीन वनडे मैचों में 58.33 की औसत और 98.31 के स्ट्राइक रेट से कुल 175 रन बनाए। इसमें एक शतक और सीरीज़ के निर्णायक मैच में 110 गेंदों पर 17 चौकों और पांच छक्कों की मदद से खेली गई 138 रनों की ज़बरदस्त पारी शामिल थी, हालांकि भारत यह मैच 27 रनों से हार गया।
 

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भारत के 2-1 से सीरीज़ हारने के बावजूद, 'हिटमैन' की शानदार बल्लेबाज़ी और उनके लंबे समय के साथी विराट कोहली (60 गेंदों पर 74 रन, जिसमें चार चौके और तीन छक्के शामिल थे) के साथ शतकीय साझेदारी ने लॉर्ड्स में मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया। 288 मैचों और 280 पारियों में 48.95 की औसत और 93.04 के स्ट्राइक रेट से 11,895 रन बनाने वाले रोहित दुनिया के सबसे बेहतरीन वनडे बल्लेबाज़ों में से एक हैं। उनके नाम 34 शतक, 62 अर्धशतक और 264 रनों का सर्वश्रेष्ठ स्कोर दर्ज है। वे सबसे ज़्यादा रन बनाने वालों की सूची में सातवें स्थान पर हैं और विराट कोहली (14,941 रन) तथा सचिन तेंदुलकर (18,426 रन) के बाद इस फ़ॉर्मेट में भारत के लिए तीसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।
 
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Mon, 31 Aug 2026 18:42:00 +0530

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