'पता नहीं था फिर चल पाऊंगा या नहीं', ब्रेन स्ट्रोक के बाद बदल गई राहुल रॉय की जिंदगी, अब किया खुलासा
Rahul Roy Recalls Rain Stroke: फिल्म ‘आशिकी’ से रातों-रात स्टार बने एक्टर राहुल रॉय ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की है. साल 2020 में शूटिंग के दौरान राहुल रॉय को ब्रेन स्ट्रोक आया था. इस घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. लंबे समय तक इलाज और रिकवरी के बाद अब एक्टर धीरे-धीरे दोबारा काम की ओर लौट रहे हैं. राहुल ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद शुरुआती दिन उनके लिए बेहद मुश्किल और डरावने थे. उस वक्त उन्हें खुद नहीं पता था कि वो पूरी तरह ठीक हो पाएंगे या फिर दोबारा चल और बोल सकेंगे.
शूटिंग के दौरान आया था ब्रेन स्ट्रोक
नवंबर 2020 में राहुल रॉय फिल्म ‘LAC- लाइव द बैटल’ की शूटिंग कर रहे थे. इसी दौरान कारगिल में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए पहले श्रीनगर ले जाया गया और फिर मुंबई लाकर नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान उन्होंने कुछ समय ICU में भी बिताया. राहुल ने फ्री प्रेस जनरल से बातचीत में उस समय को याद करते हुए बताया कि उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनकी जिंदगी आगे किस तरह बदलने वाली है. उन्होंने कहा, ‘2020 में कारगिल में शूटिंग के दौरान मुझे ब्रेन स्ट्रोक हुआ था. इसके बाद मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं दोबारा चल पाऊंगा या बोल पाऊंगा.’
रिकवरी में लगा लंबा वक्त
राहुल रॉय की रिकवरी रातों-रात नहीं हुई. उन्हें धीरे-धीरे अपनी सेहत पर काम करना पड़ा. इस मुश्किल समय में उनके परिवार और करीबी लोगों ने भी उनका साथ दिया. एक्टर ने बताया कि इस दौरान करणवीर ने भी उनका काफी साथ दिया. लगातार इलाज और मेहनत के बाद राहुल की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ. ब्रेन स्ट्रोक के बाद उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में भी कई बदलाव किए. राहुल के मुताबिक, पहले वो काफी ज्यादा स्मोकिंग करते थे और नॉन-वेज खाना खाते थे, लेकिन घटना के बाद उन्होंने अपनी डाइट और लाइफस्टाइल को काफी बदल दिया.
हर दिन लेते हैं 8 दवाइयां
राहुल रॉय ने बताया कि आज भी उनकी दिनचर्या में दवाइयां शामिल हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सुबह अब दवाइयों के साथ शुरू होती है. एक्टर के मुताबिक, नाश्ते के बाद वो रोजाना 8 दवाइयां लेते हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अब उनकी स्थिति पहले के मुकाबले काफी बेहतर है. राहुल ने इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने के लिए लगातार मेहनत की है और अब वो दोबारा अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं.
‘आशिकी’ से रातों-रात बने थे स्टार
राहुल रॉय ने साल 1990 में रिलीज हुई महेश भट्ट की फिल्म ‘आशिकी’ से बॉलीवुड में जबरदस्त पहचान बनाई थी. फिल्म में वो अनु अग्रवाल के साथ नजर आए थे. फिल्म के गाने और राहुल की एक्टिंग दर्शकों को खूब पसंद आई थी. ‘आशिकी’ की सफलता के बाद राहुल रॉय की गिनती उस दौर के पॉपुलर एक्टर्स में होने लगी. इसके बाद उन्होंने ‘जुनून’ समेत कई फिल्मों में काम किया. हालांकि, उनका फिल्मी करियर हमेशा एक जैसा नहीं रहा और उन्हें कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा.
‘बिग बॉस’ के पहले सीजन के बने थे विनर
फिल्मों के बाद राहुल रॉय ने रियलिटी टीवी में भी अपनी पहचान बनाई. साल 2007 में वो टीवी के सबसे चर्चित रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ के पहले सीजन में नजर आए थे. राहुल ने शो में शानदार प्रदर्शन करते हुए इसकी ट्रॉफी अपने नाम की थी. उन्होंने फिनाले में कैरल ग्रेसियस को पीछे छोड़कर जीत हासिल की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें इनाम के तौर पर 1 करोड़ रुपये मिले थे.
बलूच संगठनों ने उठाई जबरन गुमशुदगी के खिलाफ आवाज, पाकिस्तान पर कार्रवाई की मांग
Baloch Organizations: क्वेटा में ‘इंटरनेशनल इनफोर्स्ड डिसअपियरेंस डे’ के मौके पर बलूचिस्तान के मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने जबरन लापता किए गए लोगों को याद किया। इस दौरान उन्होंने उन परिवारों के साथ एकजुटता जताई, जो लंबे समय से अपने परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण परेशान हैं। संगठनों और कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों को लेकर चिंता जताई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि लापता लोगों के परिवार वर्षों से अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित जबरन गायब किए गए हजारों बलूचों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सार्थक और प्रभावी कदम उठाएं। हर साल 30 अगस्त को 'जबरन गायब किए गए पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किया गया दिन है, जिसे 2011 में मानवाधिकारों के इस गंभीर उल्लंघन के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों व उनके परिवारों के सम्मान में शुरू किया गया था।
एचआरसीबी ने जारी किया रिकॉर्ड
इस मौके पर, बलूचिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने कहा कि जनवरी 2016 से जुलाई 2026 के बीच, उसके पास पूरे बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के 9,130 मामलों का रिकॉर्ड है। एचआरसीबी ने कहा, "यह असल संख्या का एक छोटा सा हिस्सा है, क्योंकि कई इलाके सुरक्षा बलों के कड़े नियंत्रण में हैं, जिससे अनगिनत मामलों का रिकॉर्ड रखना मुश्किल हो जाता है। हर संख्या के पीछे एक मां अपने बेटे का इंतजार कर रही है, एक बच्चा अपने माता-पिता का इंतजार कर रहा है, एक पत्नी अपने पति का इंतजार कर रही है, और एक परिवार हर दिन अनिश्चितता के साथ जी रहा है।"
बीएसओ ने लगाया आरोप
बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ)-आजाद ने पाकिस्तानी बलों पर बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ "गैर-कानूनी कार्रवाई" करने का आरोप लगाया और कहा कि जबरन गायब करना इन अत्याचारों के सबसे प्रमुख रूपों में से एक है। यह आरोप लगाते हुए कि राज्य ने अब विभिन्न तरीकों और नीतियों के माध्यम से इस चलन को सामान्य बना दिया है, संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल कार्रवाई करने और इन "गंभीर अपराधों" के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।
अब तक 800 से ज्यादा गायब
बीएसओ ने एक्स पोस्ट में कहा, "2026 की छमाही बीत गई है। अब तक 800 से अधिक बलूच छात्र, राजनीतिक कार्यकर्ता, शिक्षक, डॉक्टर, मजदूर, दुकानदार और अन्य नागरिक पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा जबरन गायब किए जाने का शिकार हुए हैं। पीड़ितों में महिलाएं, लड़कियां, नाबालिग बच्चे, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। आठ साल से लेकर साठ साल तक के लोग इसमें शामिल हैं। यही नहीं, इसमें मस्तुंग के जाकिर नाम के डेढ़ साल के मासूम का मामला भी शामिल है।"
बीवाईसी ने उठाया मुद्दा
इस बीच, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबीहा बलूच ने कहा कि हालांकि यह दिन दुनिया भर में उन लोगों को याद करने के लिए मनाया जाता है जिन्हें जबरन गायब कर दिया गया है, लेकिन बलूच लोगों के लिए जबरन गायब किया जाना साल में एक बार याद करने का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सबीहा ने कहा, "बलोच परिवार हर दिन इस डर के साथ जीते हैं कि कहीं उनका कोई और अपना उठा न लिया जाए और गायब न कर दिया जाए। माताएं अपने बेटों का और बच्चे अपने पिता का इंतजार करते हैं। परिवार ऐसे जवाबों का इंतजार करते हैं जो शायद कभी न मिलें। बलोचिस्तान के लिए हर दिन जबरदस्ती गायब किए जाने की घटनाओं का दिन होता है। दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए, जबकि परिवार उम्मीद और असहनीय दर्द के बीच इंतजार कर रहे हैं।"
इस दिन के मौके पर, 'बलोच वॉयस फॉर जस्टिस' (बीवीजे) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों की रक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभाने, पाकिस्तानी अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करने और बलोचिस्तान में लोगों को जबरदस्ती गायब करने की प्रथा को खत्म करने के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया।
(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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