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Delhi High Court Order: 20 साल बाद रिहा होगा Prisoner, कोर्ट ने SRB की 'मैकेनिकल' कार्यप्रणाली पर लगाई फटकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को अपना फ़ैसला ऋग्वेद की एक प्रार्थना से शुरू किया, जिसमें अज्ञानता और बिना सोचे-समझे की गई पुरानी गलतियों के लिए माफ़ी मांगी गई थी। कोर्ट ने ऑस्कर वाइल्ड के शब्दों का ज़िक्र किया, "कोई भी संत बिना अतीत के नहीं होता और कोई भी पापी बिना भविष्य के नहीं होता," और इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी सबसे बुरी गलतियों से नहीं, बल्कि उसके आगे के फैसलों से होनी चाहिए। सज़ा के सुधारात्मक सिद्धांत को आधार बनाते हुए, कोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा काट रहे एक कैदी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। इस कैदी ने असल में 20 साल से ज़्यादा जेल में बिताए थे और पाया गया कि अधिकारियों ने उसकी समय से पहले रिहाई की अर्ज़ी को बिना सोचे-समझे (यांत्रिक तरीके से) खारिज कर दिया था।

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जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि हर अंधेरे में रोशनी की उम्मीद होती है और हर रोशनी में अंधेरे की याद होती है; उन्होंने इन दोनों को जोड़ने वाले रास्ते को सुधारात्मक सज़ा का ट्रैक बताया। कोर्ट ने कहा कि हालांकि हर गलत काम का नतीजा भुगतना पड़ता है, लेकिन "हर नतीजे की एक सीमा होनी चाहिए, वरना वह नतीजा खुद ही गलत हो सकता है। कोर्ट मोती उर्फ ​​मोहित की अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहा था। उसे 2004 में डिफेंस कॉलोनी पुलिस स्टेशन के एक मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें दो लोगों की हत्या और चोरी शामिल थी। ट्रायल कोर्ट ने 2010 में उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और सज़ा को बरकरार रखा, जिससे यह मामला अंतिम रूप से तय हो गया।

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मोती ने समय से पहले रिहाई की अपनी अर्ज़ी को 'सेंटेंस रिव्यू बोर्ड' (SRB) द्वारा पांचवीं बार खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। जब SRB ने उसके मामले पर विचार किया, तब तक वह असल में 20 साल से ज़्यादा और छूट (remission) मिलाकर 24 साल से ज़्यादा की जेल की सज़ा काट चुका था।  याचिकाकर्ता की ओर से वकील वृंदा भंडारी और वंशिता गुप्ता पेश हुईं, जबकि राज्य का प्रतिनिधित्व एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल अमोल सिन्हा ने किया, जिनकी मदद वकील क्षितिज गर्ग ने की। हाई कोर्ट ने गौर किया कि यह अस्वीकृति कोई अकेली घटना नहीं थी। मोती की समय से पहले रिहाई की अर्ज़ी इससे पहले चार बार - 2021, 2023, फरवरी 2024 और दिसंबर 2024 में - खारिज की जा चुकी थी। थी बार की अस्वीकृति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी और 25 जुलाई 2025 को एक कोऑर्डिनेट बेंच ने इसे रद्द कर दिया था। बेंच ने SRB को निर्देश दिया था कि वह समय से पहले रिहाई से जुड़े पिछले फ़ैसले में तय गाइडलाइंस के अनुसार उसके मामले पर फिर से विचार करे।

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पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा दर्शाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 31 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में मौजूद एथनॉल की सटीक मात्रा अनिवार्य रूप से बतायी जाए। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी। अनुच्छेद 32 नागरिकों को सीधे उच्चतम न्यायालय का रुख करने का अधिकार देता है।

पीठ ने याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी से कहा कि वह राहत के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर हर पेट्रोल ‘डिस्पेंसिंग नोजल’ (वह नोजल/पाइप जिसके जरिए पेट्रोल वाहन की टंकी में भरा जाता है) पर एक समान और अनिवार्य रूप से लेबल लगाया जाए, जिसमें पेट्रोल में मिलाए गए एथनॉल का सटीक प्रतिशत स्पष्ट रूप से बताया जाए। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि यह एक तरह की परोक्ष/प्रतिनिधि याचिका है, क्योंकि इसी तरह के मुद्दे से जुड़ी एक याचिका को अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है।

अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता चाहता है कि भारत सरकार उसके प्रति जवाबदेह हो।’’ गोस्वामी ने दलील दी कि उन्हें यह जानने का अधिकार है कि पेट्रोल पंपों पर उन्हें दिए जा रहे पेट्रोल में कौन-कौन से घटक और कितनी मात्रा में मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी यह जानकारी दी जानी चाहिए कि उन्हें दिए जा रहे ईंधन में क्या-क्या शामिल है।’’ पीठ के समक्ष खुद पेश हुए गोस्वामी से न्यायालय ने कहा कि वह अपनी दलीलें उच्च न्यायालय के सामने रखें। गोस्वामी ने यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि ईंधन के हर बिल पर बेचे गए पेट्रोल में एथनॉल का प्रतिशत स्पष्ट और पढ़ने योग्य तरीके से दर्ज किया जाए।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्ष एक निश्चित समयसीमा के भीतर वाहन के हिसाब से ईंधन की अनुकूलता का एक आधिकारिक और सार्वजनिक डेटाबेस तैयार करके प्रकाशित करें। यह डेटाबेस निर्माता कंपनी, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर खोजने योग्य हो तथा इसमें यह बताया जाए कि अलग-अलग वाहनों के लिए एथनॉल के विभिन्न मिश्रण उपयुक्त हैं या नहीं। याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है।

इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों और अन्य विशेषज्ञों को शामिल करने का अनुरोध किया गया है। इस समिति से मौजूदा वाहनों में ई20 ईंधन (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) की वास्तविक परिस्थितियों में अनुकूलता की जांच कर इस संबंध में एक सार्वजनिक रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि समिति को अपनी रिपोर्ट में ई20 के ईंधन दक्षता, इंजन की उम्र/टिकाऊपन, रखरखाव की लागत, वाहन की वारंटी और बीमा पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन करना चाहिए।

इसके अलावा, समिति को इसके कुल पर्यावरणीय प्रभाव की भी जांच करनी चाहिए, जिसमें वाहनों से निकलने वाला धुआं और एथनॉल के उत्पादन में होने वाली पानी की खपत शामिल है। याचिका में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम से जुड़ी खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं और खाद्य या पशु आहार के लिए इस्तेमाल होने वाले संसाधनों को एथनॉल उत्पादन में प्रयोग करने से जुड़ी आशंकाओं का भी अध्ययन करने का अनुरोध किया गया है।

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  Sports

ICC Women’s Champions Trophy 2027: भारत की मेजबानी में शुरू होगा महिला क्रिकेट का नया युग, Jay Shah ने दी मंजूरी

महिला क्रिकेट के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बुधवार को घोषणा की कि पहली आईसीसी महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 का आयोजन भारत में किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 14 से 28 फरवरी 2027 तक मुंबई और वडोदरा में खेला जाएगा। प्रतियोगिता का फाइनल 28 फरवरी को आयोजित होगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया और वडोदरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को टूर्नामेंट के लिए चुना गया है। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में दुनिया की छह मजबूत महिला क्रिकेट टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका शामिल हैं।

इन छह टीमों का चयन 6 जुलाई की निर्धारित योग्यता तिथि पर आईसीसी महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम रैंकिंग में उनकी स्थिति के आधार पर हुआ है। सभी टीमें लीग चरण में एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। इसके बाद अंक तालिका में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगी।

बता दें कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी का पहला संस्करण पहले श्रीलंका में आयोजित किया जाना था। हालांकि श्रीलंका क्रिकेट को आईसीसी के वार्षिक सम्मेलन में जुलाई में तय किए गए सुधारों को पूरा करना है। इसी वजह से आयोजन की मेजबानी बदलने का फैसला किया गया।

मेजबान देश के चयन के लिए आईसीसी ने बांग्लादेश, भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्तावों का मूल्यांकन किया। इसके लिए तय मेजबानी मानकों के आधार पर तीनों देशों की व्यवस्थाओं और क्षमताओं को परखा गया। इसके बाद भारत को नए मेजबान के रूप में चुने जाने की सिफारिश की गई। आईसीसी बोर्ड ने 2 सितंबर को इस फैसले को मंजूरी दे दी।

आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 महिला क्रिकेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। उनके अनुसार पहली बार होने वाला यह टूर्नामेंट दुनिया की शीर्ष टीमों को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी मंच देगा। साथ ही टीमों के लिए विश्व रैंकिंग में ऊपर पहुंचने और वैश्विक स्तर पर अपनी जगह मजबूत करने की प्रेरणा भी बढ़ेगी।

गौरतलब है कि आईसीसी महिला क्रिकेट में लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हर साल एक प्रमुख महिला प्रतियोगिता आयोजित होने से खिलाड़ियों को नियमित रूप से उच्च स्तर के मुकाबले खेलने का अवसर मिलेगा। इससे महिला क्रिकेट की लोकप्रियता और दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

भारत में होने वाले इस टूर्नामेंट का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां महिला क्रिकेट को लेकर दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ी है। मुंबई और वडोदरा जैसे क्रिकेट केंद्रों में आयोजन से खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का अनुभव मिलेगा।

आईसीसी ने कहा है कि टूर्नामेंट के टिकटों की बिक्री और सभी मुकाबलों का विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा। फिलहाल छह टीमों के बीच होने वाली इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता को लेकर महिला क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें फरवरी 2027 पर टिकी हुई हैं।
Wed, 02 Sep 2026 22:08:00 +0530

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