अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ में किस तरह की हरकत की ये तो पूरी दुनिया ने देखा। कुछ महीने पहले ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति उनकी पत्नी को रातों-रात सोते हुए उनको घर से अगवा कर लिया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उसके बाद जो है वहां पर जब एक एक नई कार्यकारी सरकार जब वहां पर काम करना शुरू करती है तो डोनाल्ड ट्रंप ने अब जो है एक बहुत बड़ी डील की है। अमेरिका से 65 अरब बैरल से ज्यादा का जो है प्रोवन क्रोइड ऑयल रिजर्व पर कमोबेश अपना नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की है। ये इसको जो है दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जो है ऑयल डील कहा जा रहा है। ट्रंप ने जिस तरह से दावा किया कि सबसे बड़ा जो है ऑयल डील हमने वेनेजुएला के साथ में कर लिया है। ये डोनाल्ड ट्रंप आखिर क्या जताने की कोशिश कर रहे हैं? एक तरीके से आपने अपना आधिपत्य तो पहले से जमा रखा है वहां पर। अब सो कॉल्ड ऑयल डील नाम देकर क्या जाहिर करना चाह रहे हैं?
वेनेजुला के साथ जो अमेरिका ने कहा जो किया वो बिल्कुल गलत था सबको पता है और अमेरिका को उसका खामियाजा भुगतना भी पड़ गया है क्योंकि अमेरिका ने जो कुछ वेनेजुएला के साथ किया उसके बाद ग्रीनलैंड के साथ भी ऐसी कुछ प्लानिंग की उसके बाद ईरान के साथ उसी तरह की चीज इंप्लीमेंट करने की कोशिश की और वेनेजुएला से जितना अमेरिका को प्रॉफिट होगा इस दिन से उससे कहीं ज्यादा खर्चा एक्सपेंडिचर और पैसे की बर्बादी ईरान पर हो चुकी है। वेनेजुएला एक पड़ोस में कंट्री था। ज्यादा शक्तिशाली नहीं था। अमेरिका की चल गई। लेकिन उसी मिस एडवेंचर्स को लेकर आगे चले और बुरी तरह फस गए हैं। ईरान में अमेरिका को फाइनेंसियल लॉस भी हुआ है और ईरान ने किस तरह से अमेरिका की पावर का मजाक उड़ाया है।
ईरान से किस तरह की स्टेटमेंट आई है अमेरिका के बारे में सारी दुनिया ने देखा है। किस तरह का खर्चा हो गया है। आज अमेरिका के ऊपर आज तक का सबसे ऐतिहासिक कर्जा चढ़ा हुआ है। ऐसे में वेनेजुला की बड़ी ऑयल डील है। अमेरिका को फायदा होगा। अमेरिका का आधिपत्य दिख रहा है। दिख रहा है कि अमेरिका के एक अंडर चेंज आ गई है। कुछ अमेरिका में इनफ्लेशन में कमी होगी। उनके पास ऑयल की पावर बढ़ गई है।
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बांग्लादेश से फिलहाल जो भारत के रिश्ते हैं वो कहीं हद तक उस लेवल के नहीं माने जा रहे हैं जो शेख हसीना के वक्त थे। अमेरिका भारत के साथ में मित्रता दुनिया की मजबूरी है। भारत के साथ में दोस्ती करना दुनिया की मजबूरी है। दुनिया की ताकतों की मजबूरी है कि भारत के साथ दोस्ती करे। पाकिस्तान वो देश है जो आर्थिक तौर से चकनाचूर होने की स्थिति में है। उसके सामने रोटी खाने को नहीं है। उसकी थाली में रोटी नहीं है। आटा महंगा हो रहा है। उसके यहां पर पानी पीने को नहीं है। मक्का पैक्ट बनने के बाद से यह मक्का पैक्ट जिसमें पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब है। यह तीनों देश के मिलने के बाद से भारत की टेंशन वैसे ही बढ़ी हुई है। लेकिन ऐसे में खबर आती है कि अब बांग्लादेश भी मक्का पैक्ट में शामिल हो सकता है।
मक्का पैक्ट क्या है?
जैसे नाटो है जो नाटो कंट्रीज है उसी तरीके से मक्का पैक्ट को भी इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। यानी कि इस जो पैक्ट है इसमें जितने भी देश हैं इसमें एक यूनिटी होगी यानी कि युद्ध जैसी स्थिति में अगर किसी भी देश पर हमला होता है तो इसमें जितने भी देश शामिल हैं वो उस देश पर हमला कर देंगे एक साथ। ठीक ऐसी ही कंडीशन अब बांग्लादेश भी ऐसा लग रहा है कि इस फैक्ट को स्वीकार करने के मूड में है। खबर आती है कि जेद्दा में ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई सऊदी के जिद्दा में जिसमें बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर शामिल होते हैं और इस दौरान सऊदी के विदेश मंत्री से वो मुलाकात करते हैं और उन्हें एक पत्र देते हैं यह कहते हुए कि तारिक रहमान की तरफ से भेजा हुआ है। जिसके बाद से यह सवाल उठने लगे कि जो बांग्लादेश बाहर बाहर यह बोल रहा है कि भाई वह मक्का पैक्ट में शामिल नहीं हो रहा है। लेकिन अंदर खाने ऐसा लग रहा है कि जैसे मानो कोई डील चल रही है।
अगर बांग्लादेश पाकिस्तान के करीब जाता है तो एक देश होने के नाते जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है सरकार पर उस सरकार को क्या ये टेंशन नहीं होगी कि बांग्लादेश देश जैसा देश जिसको भारत ने ही आजाद कराया है भारत ने ही वो दम दी आज वो पाकिस्तान के करीब जा रहा है जो भारत का दुश्मन हैI
उससे पहले की जितनी सरकारें रही है बांग्लादेश की उनकी पाकिस्तान के साथ बनती ही नहीं थी। पाकिस्तान में एक जुमला चला करता था क्या पिद्दी क्या पिद्दी का शोरबा ये बांग्लादेश के लिए पिद्दी शब्द इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन अब अचानक वही बांग्लादेश जो है अपना इस्लामिक भाई नजर आ रहा है।
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