घर का खाना खाने के बाद भी बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, इन वजहों को न करें नजरअंदाज
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले बाहर का खाना, बर्गर, पिज्जा, समोसा और ज्यादा तेल वाली चीजें आती हैं। यही वजह है कि बहुत से लोग मानते हैं कि अगर वे घर का खाना खा रहे हैं तो उनका कोलेस्ट्रॉल कभी नहीं बढ़ सकता। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। घर का बना खाना सेहत के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन खाने के साथ-साथ हमारी रोज की आदतें भी शरीर पर असर डालती हैं। कई बार अच्छी डाइट लेने के बाद भी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आ सकता है। इसकी वजह ज्यादा वजन, कम चलना-फिरना या खाने में कुछ चीजों की ज्यादा मात्रा हो सकती है।
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए पूरी तरह खराब नहीं होता। हमारे शरीर को इसकी थोड़ी मात्रा की जरूरत होती है। यह शरीर के कई जरूरी कामों में मदद करता है। परेशानी तब शुरू होती है जब खून में बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर खून की नसों में धीरे-धीरे चर्बी जैसी परत जमा होती है। इससे आगे चलकर दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ लोगों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह उनकी जीवनशैली से ज्यादा उनके जीन हो सकते हैं। अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कुछ आनुवंशिक स्थितियों में शरीर एलडीएल को खून से हटाने में ठीक से काम नहीं करता और व्यक्ति की डाइट अच्छी होने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल काफी बढ़ा रह सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
घर का खाना पौष्टिक होता है, लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों की मात्रा भी मायने रखती है। घी, मक्खन, मलाई और कुछ दूसरे पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। इनका जरूरत से ज्यादा सेवन एलडीएल को बढ़ा सकता है। इसलिए खाना बनाते समय कुल फैट और उसकी गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
पूरी, पकौड़े, कचौड़ी या दूसरे डीप-फ्राइड व्यंजन अगर कभी-कभार खाए जाएं तो बात अलग है, लेकिन इन्हें रोज के भोजन का हिस्सा बनाना वजन और हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। अगर इसके साथ आप दिनभर कम चलते-फिरते हैं, तो वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ सकती है। इसलिए खाना घर का है या बाहर का, इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि उसे किस तरह बनाया गया है और कितनी मात्रा में खाया जा रहा है।
कोलेस्ट्रॉल को ठीक रखने के लिए सिर्फ तेल कम करना काफी नहीं है। खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ओट्स, जौ, बीन्स और दाल जैसी चीजें भी होनी चाहिए। इनमें फाइबर पाया जाता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अगर आपकी रोज की थाली में सब्जियां और फल बहुत कम हैं और मैदा, सफेद ब्रेड, बिस्किट या दूसरे पैकेट वाले खाने की मात्रा ज्यादा है, तो डाइट संतुलित नहीं मानी जाती।
आपका खाना घर का है लेकिन अगर दिन का ज्यादातर समय बैठे हुए गुजरता है तो सिर्फ डाइट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करती है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी गतिविधियां रोज की दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं।
--आईएएनएस
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Uncovered with Manoj Gairola: नेपाल जैसा 'वॉटर बम' भारत में भी फोड़ सकता है चीन?
Uncovered With Manoj Gairola: नेपाल में आई भीषण बाढ़ की तस्वीरें आपने देखी ही होंगी. आपने देखा होगा कि अचानक आया सैलाब कैसे अपने साथ पुल, बिल्डिंग, जंगल और इंसान सबको बहाकर ले जाता है. आपदा की ये तस्वीरें सोचने को मजबूर कर देती हैं… कि ऐसी जगह.. जहां ना बारिश हो रही है, ना आंधी ना तूफान, ना बादलों की गड़गड़ाहट और ना ही बिजली चमकी…तो फिर अचानक से ये तबाही कैसी?
लेकिन ये तो सिर्फ ट्रेलर हैं. जिस तरह से चीन तिब्बत में खेल, खेल रहा है. उसके चलते तबाही की असली पिक्चर तो भारत में दिख सकती है. आइए विस्तार से जानते हैं.
ग्लेशियर टूटने से बनी कृत्रिम झील और फिर आया सैलाब
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली. हजारों लोग लापता हैं. ये सब कुछ इतना अचानक हुआ कि किसी को जान बचाने तक का मौका नहीं मिल सका. दरअसल, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर तिब्बत की गाइरॉन्ग काउंटी में एक ग्लेशियर टूटकर ल्हेंदे नदी में गिर गया.
नदी का बहाव रुक गया. जिससे उस जगह पर एक आर्टिफिशियल झील बन गई. इसमें पानी भरता गया और कुछ मिनटों बाद ही ये झील पानी के दबाव से फूट गई. और जब लाखों क्यूसेक पानी अपने साथ गाद और मलबे को लेकर आगे बढ़ा और बॉर्डर क्रॉस करके नेपाल के रुसुआ जिले में पहुंचा जहां उसने भारी तबाही मचा दी.
40-50 मिनट की देरी ने बढ़ाए चीन पर सवाल
पहली नजर में तो आपको लगेगा कि ये एक प्राकृतिक आपदा है. इससे बचा नहीं जा सकता था. लेकिन जब हम डिटेल में जाते हैं तो हमें चाइना का खेल समझ में आता है. सबसे पहली बात तो ये कि गाइरॉन्ग काउंटी में ग्लेशियर के टूटने और झील के फूटने के बीच 40 से 50 मिनट का अंतर था.
अगर चीन वक्त रहते इस खतरे की जानकारी नेपाल को दे देता, तो कम से कम सैकड़ों इंसानी जानों को बचाया जा सकता था. लेकिन इस तबाही में चीन का गुनाह बस इतना ही नहीं है. दरअसल ग्लेशियर का टूटना भी चीन की कारस्तानियों का नतीजा है.
तिब्बत में निर्माण गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल
’डाउन टू अर्थ मैगजीन ने नेपाली पत्रकारों के हवाले से लिखा है कि फ्लैश फ्लड का असली जिम्मेदार चीन ही है. चीन ने गाइरॉन्ग काउंटी में ग्लेशियर्स वाले इलाकों में बहुत बड़ी जगह ऐसी छेड़छाड़ की है, जिसके चलते ये ग्लेशियर टूटा था. चीन ने गाइरॉन्ग में पहाड़ियों को काटकर बड़ी संख्या में सड़कें बनाने और बस्तियां बसाने का काम किया. इससे वहां के पहाड़ कमजोर पड़ गये और साथ ही ग्लेशियर टूटने का ख़तरा बढ़ गया.
हिमालय में चीन की गतिविधियां भारत के लिए क्यों चिंता?
लेकिन ये हादसा तो हिमालय में चल रही चीन की एक्टिविटीज की एक झलक भर है. चीन वहां जो कर रहा है…उसका असली टारगेट तो भारत हो सकता है. क्योंकि एक तरह से वो हिमालय में भारत के लिए वॉटर बम तैयार कर रहा है.
हम वाटर बम शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, क्योंकि भारत में जो जान और माल का नुकसान होगा, वो इतना ज्यादा होगा जैसे कि भारत में कोई बहुत बड़ा बम फूट गया हो.
ब्रह्मपुत्र पर चीन के विशाल डैम से भारत की चिंता
जरा इस नक्शे को ध्यान से देखिए…ये है ब्रह्मपुत्र नदी. ये तिब्बत से निकलती है और वहां इसे यारलुंग कहते हैं. भारत में इसकी एंट्री होती है अरुणाचल प्रदेश से. और इसी प्वाइंट से सिर्फ 30-40 किलोमीटर की दूरी पर चीन एक बहुत बड़ा डैम बना रहा है. ये दुनिया का सबसे बड़ा डैम है. इसका नाम है Medog (मेडोग) डैम. इसे बनाने में 16 लाख करोड़ रु. से ज्यादा खर्च होंगे. और ये डैम 60 हजार मेगावॉट बिजली पैदा कर सकता है. लेकिन इस डैम का सबसे बड़ा
भूकंप के खतरे वाले इलाके में बन रहा मेडोग डैम
खतरा ये है कि चीन जिस जगह इसे बना रहा है वो Active Seismic Zone है. इसका मतलब ये हुआ कि यहां भूकंप आने की आशंका बहुत अधिक है.
भूकंप या लैंडस्लाइड से भारत में आ सकती है बड़ी तबाही
पिछले साल ही तिब्बत में एक बहुत बड़ा भूकंप आया था. इसकी तीव्रता 7.1 मैग्नीट्यूड थी. इससे काफी तबाही हुई और 5 डैम क्रैक हो गए. अगर Medog डैम के बनने के बाद ऐसा ही कोई भूकंप आ जाए, या फिर लैंडस्लाइड हो जाए तो इस डैम में जमा करोड़ों क्यूसेक पानी सीधे भारत की तरफ बढ़ेगा. ठीक वैसे ही जैसे गाइरॉन्ग से नेपाल की तरफ बढ़ा है. लेकिन भारत में होने वाली तबाही इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है.
पानी से जुड़ी जानकारी साझा न करने को लेकर चिंता
वैसे भी चीन कभी डेटा या इंफॉर्मेशन शेयर नहीं करता है. यानी अगर डैम में कोई दरार आई या कोई डैमेज हुआ तो चीन भारत को पहले से अलर्ट नहीं करेगा.
ब्रह्मपुत्र के पानी पर चीन के नियंत्रण का खतरा
इसके साथ-साथ एक खतरा और है. जब ये डैम बन जाएगा तो चीन के पास ब्रह्मपुत्र के पानी को कंट्रोल करने की पावर भी आ जाएगी. और ये भारत लिए बहुत चिंता की बात है. ऐसा नहीं है कि भारत चुप बैठा हो. इस डैम के बदले भारत भी डैम बना रहा है. यारलुंग यानी ब्रह्मपुत्र नदी जब अरुणाचल में आती है तो इसका नाम सियांग हो जाता है. और अरुणाचल में ही भारत एक बड़ा डैम बनाने की परियोजना बना रहा है. जिससे भारत भी नदी के बहाव को कंट्रोल कर सके.
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