Chandrashekhar Shiva Story: भगवान शिव ने चंद्रमा को सिर पर क्यों धारण किया? जानें सोमवार से जुड़ी पौराणिक कथा
Chandrashekhar Shiva Story: हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भोलेनाथ की पूजा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोमवार और भगवान शिव का इतना गहरा संबंध आखिर क्यों है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध चंद्रदेव से जुड़ी एक पौराणिक कथा से है। चंद्रदेव को राजा दक्ष के श्राप से मुक्ति दिलाने के बाद भगवान शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया था। इसी वजह से महादेव को ‘चंद्रशेखर’ कहा जाता है और सोमवार को शिव पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
चंद्रदेव को क्यों मिला था श्राप?
पौराणिक कथा के अनुसार चंद्रदेव का विवाह राजा दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों से हुआ था। इन 27 कन्याओं को नक्षत्रों के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि चंद्रदेव को अपनी सभी पत्नियों में रोहिणी सबसे अधिक प्रिय थीं और वह ज्यादातर समय उन्हीं के साथ बिताते थे।
चंद्रदेव के इस व्यवहार से उनकी बाकी पत्नियां दुखी रहने लगीं। उन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति से इसकी शिकायत की। दक्ष ने चंद्रदेव को सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करने की सलाह दी, लेकिन चंद्रदेव ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। अपनी पुत्रियों की परेशानी देखकर दक्ष प्रजापति बेहद नाराज हुए और उन्होंने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दे दिया।
श्राप से कम होने लगी चंद्रमा की चमक
दक्ष के श्राप का असर चंद्रदेव पर पड़ने लगा। उनकी चमक और शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगी। इससे परेशान होकर चंद्रदेव ने भगवान शिव की शरण लेने का फैसला किया। उन्होंने महादेव की कठोर तपस्या की और श्राप से मुक्ति के लिए प्रार्थना की। चंद्रदेव की भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए।
भगवान शिव ने ऐसे बचाया चंद्रदेव को
मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने चंद्रदेव को पूरी तरह श्राप से मुक्त नहीं किया, बल्कि उसके प्रभाव को सीमित कर दिया। इसी वजह से चंद्रमा के स्वरूप में शुक्ल पक्ष में बढ़ने और कृष्ण पक्ष में घटने का क्रम शुरू हुआ।
इसके बाद भगवान शिव ने चंद्रदेव को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। चंद्रमा को अपने सिर पर धारण करने के कारण ही महादेव का एक नाम ‘चंद्रशेखर’ पड़ा।
यही कथा सोमवार और भगवान शिव के संबंध को भी विशेष बनाती है। ‘सोम’ का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, इसलिए सोमवार को शिव आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
चंद्रमा को सिर पर धारण करने का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा का होना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि महादेव ने मन और उसकी चंचलता पर नियंत्रण स्थापित किया है। इसी वजह से सोमवार को शिव पूजा के साथ चंद्रदेव से जुड़े दोषों की शांति के लिए भी कई लोग धार्मिक उपाय करते हैं।
सोमवार को कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सोमवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर श्रद्धा के अनुसार जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित किए जाते हैं। भक्त भगवान शिव के मंत्रों का जाप करते हैं और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करते हैं। कई लोग सोमवार का व्रत भी रखते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से महादेव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और भक्त को सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
नोट: इस खबर में बताई गई कथा और मान्यताएं धार्मिक एवं पौराणिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रीय परंपराओं में कथा के विवरण में कुछ अंतर मिल सकता है।
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