Morning Energy: चाय-बिस्किट छोड़ें! सुबह इन 3 चीजों को डाइट में करें शामिल, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी
Morning Energy Foods Benefits: सुबह उठने के बाद हम अक्सर चाय या कॉफी से दिन की शुरुआत करते हैं। लेकिन अगर आप अपनी सुबह की डाइट में थोड़ा बदलाव करना चाहते हैं, तो मूंग, मूंगफली और किशमिश को शामिल कर सकते हैं। इन तीनों में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और शरीर के लिए जरूरी दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो दिनभर की एनर्जी और काम करने की क्षमता के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं।
1. मूंग से मिलेगा प्रोटीन और फाइबर
मूंग को सुबह के खाने में शामिल करना काफी आसान है। इसे रातभर भिगोकर सुबह खाया जा सकता है। चाहें तो इसमें प्याज, टमाटर, नींबू और थोड़ा चाट मसाला डालकर चटपटी मूंग की चाट भी बना सकते हैं।
मूंग में प्रोटीन और फाइबर होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन शरीर को रोजमर्रा के काम के लिए जरूरी पोषण देने में मदद करता है।
2. मूंगफली देगी लंबे समय तक एनर्जी
मूंगफली सिर्फ स्वादिष्ट स्नैक ही नहीं है, बल्कि इसमें प्रोटीन और अच्छी वसा भी होती है। सुबह थोड़ी मात्रा में मूंगफली खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है।
इसे आप भीगी हुई मूंग के साथ मिलाकर खा सकते हैं। इससे सुबह के नाश्ते का स्वाद भी बढ़ जाएगा और खाने में प्रोटीन व अच्छी वसा का संतुलन भी बेहतर हो सकता है।
3. किशमिश से मिलेगी मीठी शुरुआत
अगर सुबह कुछ मीठा खाने का मन करता है, तो किशमिश एक आसान विकल्प है। इसमें आयरन, पोटैशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
किशमिश को रातभर पानी में भिगोकर भी खाया जा सकता है। इसे मूंग और मूंगफली के साथ मिलाकर खाने से सुबह का नाश्ता ज्यादा स्वादिष्ट बन जाता है।
तीनों को मिलाकर ऐसे करें तैयार
रात में मूंग और मूंगफली को अलग-अलग पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इनका पानी निकालकर अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसमें भीगी हुई किशमिश मिलाएं। अब इसमें थोड़ा नींबू, चाट मसाला, बारीक कटा प्याज और टमाटर डाल सकते हैं।
किन लोगों को ध्यान रखना चाहिए?
हर व्यक्ति का शरीर और डाइट की जरूरत अलग होती है। अगर आपको किसी चीज से एलर्जी है या डॉक्टर ने किसी खास तरह की डाइट लेने की सलाह दी है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
नोट: यह जानकारी सामान्य खानपान से जुड़ी है। इसे किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें।
Bahula Chauth Moon Rise Time: बहुला चौथ पर चंद्रोदय का सही समय जानें, चांद न दिखे तो ऐसे करें व्रत का पारण
Bahula Chauth 2026: बहुला चौथ का व्रत आज यानी 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। संतान की लंबी उम्र, उनकी सुरक्षा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं। बहुला चौथ पर भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और बहुला गौमाता की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। ऐसे में व्रती महिलाओं के लिए चंद्रोदय का समय जानना बेहद जरूरी हो जाता है। वहीं, अगर आसमान में बादल होने की वजह से चंद्रमा दिखाई न दे तो व्रत कैसे खोला जाए, इसे लेकर भी कई लोगों के मन में सवाल रहता है।
Bahula Chauth 2026: बहुला चौथ पर चंद्रोदय का समय
बहुला चौथ के दिन चंद्रमा के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को चंद्रोदय का समय रात करीब 8:29 बजे बताया गया है। हालांकि, चंद्रमा के उदय होने के समय में शहर और स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय जरूर देख लेना चाहिए।
बहुला चौथ 2026 के शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि शुरू: 31 अगस्त, सुबह 8:50 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 1 सितंबर, सुबह 7:41 बजे
पूजा का समय: शाम 5:38 बजे से रात 8:10 बजे तक
चंद्रोदय: रात करीब 8:29 बजे
नोट: अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
चांद दिखाई न दे तो कैसे खोलें बहुला चौथ का व्रत?
बहुला चौथ के दिन कई बार बारिश या बादलों की वजह से चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पाते। ऐसी स्थिति में अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतीकात्मक रूप से चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देकर व्रत पूरा करने की परंपरा बताई जाती है।
हालांकि, व्रत और पारण की परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं। इसलिए संभव हो तो अपने स्थानीय पंचांग या परिवार की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है।
भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के करें दर्शन
यदि चंद्रमा बादलों के कारण दिखाई नहीं दे रहा है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने चंद्रदेव का ध्यान किया जा सकता है। भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं, इसलिए कुछ परंपराओं में महादेव के मस्तक पर स्थित चंद्रमा को प्रतीक मानकर पूजा-अर्चना करने की बात कही गई है। इसके बाद चंद्रदेव का ध्यान करते हुए अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जा सकता है।
चावल से बनाएं चंद्रमा का प्रतीक
चंद्रमा दिखाई न देने की स्थिति में कुछ जगहों पर चावल से चंद्रमा की आकृति बनाने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके लिए साफ चौकी पर कपड़ा बिछाकर चावल की मदद से चंद्रमा का प्रतीक बनाया जा सकता है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर चंद्रदेव का ध्यान किया जाता है और जल अर्पित करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा मानी जाती है।
चांदी के सिक्के को मान सकते हैं चंद्रमा का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा का संबंध चांदी से माना जाता है। इसलिए कुछ परंपराओं में चांदी के सिक्के या गोल चांदी के टुकड़े को चंद्रमा का प्रतीक मानकर उसकी पूजा करने का विधान बताया गया है। पूजा के दौरान चंद्रदेव का स्मरण कर जल अर्पित करने के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।
अर्घ्य देते समय इन बातों का रखें ध्यान
चंद्रमा के दर्शन होने पर सबसे पहले बहुला चौथ की पूजा पूरी करें। इसके बाद चंद्रमा को जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि व संतान की मंगलकामना करें। अर्घ्य देते समय अपने स्थानीय पंचांग में बताए गए चंद्रोदय समय और दिशा का ध्यान रखना बेहतर होता है।
ध्यान रखें: बहुला चौथ के व्रत की विधि और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़ी भिन्न हो सकती है। इसलिए स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा को प्राथमिकता दें।
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