ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने मुस्लिम देशों से इजराइल और अमेरिका के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है। सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने मुस्लिम देशों के शासकों से कहा, ‘‘अपने असली दुश्मन को पहचानिए, उसकी योजनाओं को समझिए और उसका मुकाबला कीजिए।’’ उन्होंने अमेरिका और इजराइल को सभी इस्लामी देशों का दुश्मन बताया। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के छह महीने बाद भी खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
इन हमलों में उनके पिता और ईरान के अन्य वरिष्ठ नेता मारे गए थे। खामेनेई ने यह टिप्पणी तेहरान में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे धार्मिक नेताओं को लिखे पत्र में की। ईरान द्वारा पड़ोसी खाड़ी अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सीमित किए जाने के बाद इस युद्ध ने मुस्लिम जगत के भीतर मतभेदों को उजागर किया है।
ईरान क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का विरोध करता रहा है।
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सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व होता है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत करती हैं। इस दौरान भगवान गणेश और भगवान श्रीकृष्ण के साथ-साथ गौ माता की पूजा की जाती है। तो आइए जानते हैं बहुला चतुर्थी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और धार्मिक महत्व आदि के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 31 अगस्त को सुबह 08:52 मिनट पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत होगी। इस तिथि की समाप्ति अगले दिन यानी की 01 सितंबर की सुबह 07:42 मिनट पर होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर यह पर्व 31 अगस्त 2026 को किया जा रहा है।
चंद्रोदय का समय
बहुला चौथ पर भगवान गणेश और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं शाम को चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। वैदिक पंचांग के मुताबिक बहुला चतुर्थी की शाम को रात 08:28 मिनट पर चंद्रोदय का समय है। व्रत करने वाली महिलाएं चंद्र देव के दर्शऩ और अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण करें।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूरा दिन निराहार रहें और शाम को गाय और बछड़े की पूजा करें। पूजा के लिए तमाम तरह के पकवान आदि बनाए जाते हैं, जोकि भगवान गणेश और श्रीकृष्ण को भोग के रूप में अर्पित करते हैं। फिर इसको गाय और बछड़े को खिलाया जाता है। पूजा के बाद दाहिने हाथ में चावल के दाने लेकर बहुला चौथ की कथा सुननी चाहिए। वहीं कथा सुनने के बाद गाय और बछड़े की प्रदिक्षणा करें। साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति और संतान की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें।
महत्व
हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को समर्पित होती है। वहीं भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर भगवान गणेश और श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत करने से और पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। वहीं संतान के सुख में वृद्धि होती है और बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन माताएं अपनी संतान की अच्छे सेहत और लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं।
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