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दूध-चीनी के बाद प्याज ने रुलाया, 62 रुपये पहुंचा रेट, पेट्रोल-डीजल और LPG हुई महंगी

Inflation: प्याज का दाम इस समय 62 रुपये प्रति किलोग्राम दिल्ली में हो गया है। पिछले साल के मुकाबले रेट लगभग दोगुना हो चुका है। 

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पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और सेना प्रमुख एवं चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते को तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैठक का एजेंडा फिलहाल साफ नहीं मक्का रक्षा समझौते के तहत बनी रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की पहली बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान से जुड़े हालात, रक्षा सहयोग और आपसी सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आपसी तालमेल मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है। बांग्लादेश ने भी दिखाई रुचि मक्का समझौते के तहत भविष्य में अन्य देशों के जुड़ने की संभावना है। बांग्लादेश पहले ही इस समझौते में रुचि दिखा चुका है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, इस्तांबुल बैठक में उसकी भागीदारी तुर्किये और सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंधों के साथ क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये की सैन्य ताकत एक साथ इस समझौते के तहत तीनों देशों की अलग-अलग ताकत एक साथ आएगी। चार देशों की अलग बैठक भी होगी मक्का रक्षा समझौते की बैठक के अलावा तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है। यह चार देशों का समूह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से मार्च में बनाया गया था। इस समूह की पिछली बैठक 5 अगस्त को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हुई थी। उस दौरान नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया था। चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तीनों देश मक्का रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तीनों देश अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद चल रहा है, जबकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बना रहता है। वहीं, तुर्किये लंबे समय से कुर्द उग्रवादी समूहों के खिलाफ अभियान चला रहा है और इजराइल के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे हालात में तीनों देशों ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए यह समझौता किया है। ये खबर भी पढ़ें… तुर्किये जा रही फेरी बोट समुद्र में पलटी:7 की मौत, 24 लापता; 270 यात्री सवार थे, बोट के ऊपर चढ़कर जान बचाई मेडिटेरियन सी में तुर्किये जा रही फेरी बोट रविवार को समुद्र में पलट गई। यह फेरी यूरोपीय देश साइप्रस के उत्तरी तट से 270 से ज्यादा यात्रियों के साथ रवाना हुई थी। पूरी खबर पढ़ें

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  Sports

Lords Test में हार के बाद भड़के Rashid Latif, Babar Azam और Selection Committee पर साधा तीखा निशाना

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड दौरा अब तक बेहद निराशाजनक रहा है। लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में 194 रन से मिली करारी हार के बाद पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और उसके मौजूदा अध्यक्ष मोहसिन नकवी पर तीखा हमला बोला है। लतीफ का कहना है कि टीम के खराब प्रदर्शन के लिए सिर्फ खिलाड़ियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बोर्ड, चयन समिति और प्रशिक्षकों की भूमिका पर भी सवाल उठने चाहिए।

लतीफ ने पाकिस्तान की मौजूदा टीम को पिछले 50 वर्षों की सबसे कमजोर विदेशी दौरा करने वाली टीम बताए जाने की चर्चा से सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने इसी के साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कार्यप्रणाली को भी निशाने पर लिया। जियो न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस तरह टीम को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसी तरह मौजूदा बोर्ड को भी पिछले 70 वर्षों में सबसे खराब बोर्ड के रूप में देखा जाना चाहिए।

पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा कि चयन समिति और प्रशिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा जरूरी है। उनके मुताबिक टीम के लगातार खराब प्रदर्शन के पीछे कई स्तरों पर फैसलों की कमजोरी दिखाई दे रही है। लतीफ ने कहा कि अगर टीम, बोर्ड, चयन समिति और प्रशिक्षकों से जुड़े सभी पहलुओं को एक साथ देखा जाए तो यह समझना आसान होगा कि पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

गौरतलब है कि इंग्लैंड के खिलाफ जारी तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में पाकिस्तान की बल्लेबाजी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। टीम अब तक एक बार भी 200 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सकी है। लॉर्ड्स टेस्ट में भी पाकिस्तान की दूसरी पारी 194 रन पर सिमट गई, जबकि जीत के लिए उसे 389 रन बनाने थे।

कप्तान बाबर आजम की वापसी से पाकिस्तान की बल्लेबाजी को मजबूती मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने लॉर्ड्स टेस्ट की पहली और दूसरी पारी में आठ और छह रन बनाए। दूसरी पारी में तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की उछाल लेती गेंद के सामने बाबर काफी असहज नजर आए और जल्द ही पवेलियन लौट गए।

बता दें कि लॉर्ड्स टेस्ट मैदान के बाहर के विवादों के कारण भी चर्चा में रहा। मुकाबले के दौरान प्रसारणकर्ता स्काई स्पोर्ट्स ने इमरान खान के बेटों कासिम और सुलेमान का माइकल एथर्टन के साथ साक्षात्कार प्रसारित किया था। रिपोर्टों में दावा किया गया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इससे नाराज था और उसने मैच के दूसरे सत्र में टीम को मैदान पर नहीं भेजने की चेतावनी तक दी थी।

हालांकि, बाबर आजम और मुख्य प्रशिक्षक सरफराज अहमद दोनों ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया। पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच श्रृंखला का तीसरा और अंतिम टेस्ट नौ सितंबर से बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जाएगा, जहां पाकिस्तान की टीम हार के सिलसिले को रोकने के साथ अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश करेगी।
Mon, 31 Aug 2026 20:10:00 +0530

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