होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना ने ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को बनाया निशाना
अमेरिकी बलों ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया जो पिछले एक महीने में ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई है। छह महीने से अधिक समय से रुक-रुककर जारी युद्ध में कुछ समय से बनी शांति इस हमले के साथ ही भंग हो गई। ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के अनुसार, ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ के बलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट दागने और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी करते देखा गया था।
अमेरिकी सेना ने जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का काम पिछले सप्ताह ही पूरा किया था। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार संस्थाओं ने जलडमरूमध्य में लारक द्वीप के पास विस्फोटों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। ईरान के सरकारी प्रसारक द्वारा प्रसारित एक बयान में रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि ‘‘हमारे कई लड़ाके और हमवतन शहीद एवं घायल हुए हैं।’’ ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बाद में कुछ दृश्य दिखाते हुए दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने कहा कि उन्होंने सोमवार तड़के देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को नष्ट कर दिया। खुले तौर पर संघर्ष फिर से शुरू होना इस क्षेत्र के लिए खतरनाक होगा। ईरान 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता रहा है।
अमेरिकी सेना ने इससे पहले 29 जुलाई को ईरान को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की थी। उस समय उसने तटीय निगरानी और रक्षा प्रतिष्ठानों समेत रिवोल्यूशनरी गार्ड के कई ठिकानों पर ‘‘भीषण हमले’’ करने की घोषणा की थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अगस्त को कहा था कि खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के आग्रह पर वह सेना को ईरान पर हमले फिलहाल रोकने का आदेश देंगे।
Pitru Paksha 2026: कब से शुरू होगा पितृपक्ष, जानें श्राद्ध की पूरी तिथियां और किस दिन करें पितरों का श्राद्ध
Pitru Paksha 2026: सनातन धर्म में पितृपक्ष का समय पूर्वजों को स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत मानी जाती है और इसका समापन आश्विन अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है। साल 2026 में पितृपक्ष का आरंभ 26 सितंबर से होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
पितृपक्ष 2026 की पूरी श्राद्ध तिथि
| तारीख | वार | तिथि | श्राद्ध |
| 26 सितंबर | शनिवार | पूर्णिमा | पूर्णिमा श्राद्ध |
| 27 सितंबर | रविवार | प्रतिपदा | प्रतिपदा श्राद्ध |
| 28 सितंबर | सोमवार | द्वितीया | द्वितीया श्राद्ध |
| 29 सितंबर | मंगलवार | तृतीया | तृतीया श्राद्ध |
| 30 सितंबर | बुधवार | चतुर्थी/पंचमी | चतुर्थी/पंचमी श्राद्ध |
| 1 अक्टूबर | गुरुवार | षष्ठी | षष्ठी श्राद्ध |
| 2 अक्टूबर | शुक्रवार | सप्तमी | सप्तमी श्राद्ध |
| 3 अक्टूबर | शनिवार | अष्टमी | अष्टमी श्राद्ध |
| 4 अक्टूबर | रविवार | नवमी | नवमी श्राद्ध |
| 5 अक्टूबर | सोमवार | दशमी | दशमी श्राद्ध |
| 6 अक्टूबर | मंगलवार | एकादशी | एकादशी श्राद्ध |
| 7 अक्टूबर | बुधवार | द्वादशी | द्वादशी श्राद्ध |
| 8 अक्टूबर | गुरुवार | त्रयोदशी | त्रयोदशी श्राद्ध |
| 9 अक्टूबर | शुक्रवार | चतुर्दशी | चतुर्दशी श्राद्ध |
| 10 अक्टूबर | शनिवार | अमावस्या | सर्वपितृ श्राद्ध |
किस तिथि को करना चाहिए पितरों का श्राद्ध?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उसका श्राद्ध करना उचित माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी पूर्वज का निधन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था, तो पितृपक्ष में द्वितीया के दिन उनका श्राद्ध किया जाता है। इसी प्रकार अन्य तिथियों के लिए भी यही नियम माना जाता है। इस दौरान परिवार के लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए तर्पण, पिंडदान तथा दान आदि करते हैं।
नवमी तिथि क्यों है खास?
पितृपक्ष में नवमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इसे मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विशेष रूप से दिवंगत माता, मातृ पक्ष और महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। इसलिए मातृ पक्ष के पितरों को याद करने वाले लोगों के लिए 4 अक्टूबर का दिन महत्वपूर्ण रहेगा।
जिनकी मृत्यु तिथि मालूम न हो, वे कब करें श्राद्ध?
कई बार परिवार में किसी पूर्वज की मृत्यु की निश्चित तिथि की जानकारी उपलब्ध नहीं होती। ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है। इसे पितृपक्ष का समापन दिवस भी माना जाता है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी। इस दिन उन पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। इसी दिन सभी पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक कर्म करने की भी परंपरा है।
2026 में एक ही दिन होगा चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
इस साल पितृपक्ष की एक खास बात यह है कि चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध एक ही दिन, यानी 30 सितंबर 2026 को होंगे। इसलिए जिन पूर्वजों का निधन चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुआ था, उनके निमित्त श्राद्ध इसी दिन किया जाएगा। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में श्राद्ध की विधि में कुछ अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा का ध्यान रखना उचित माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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