जरूरत की खबर- चॉपिंग बोर्ड में हो सकते हैं बैक्टीरिया:खरीदते समय 6 बातों का रखें ध्यान, जानें सफाई और स्टोरेज का सही तरीका
किचन में चॉपिंग बोर्ड ऐसी चीज है, जिसका इस्तेमाल हम लगभग हर दिन करते हैं। सब्जियां काटने से लेकर फल, पनीर और मीट कटिंग करने तक, यह हमारे काम को आसान बनाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बोर्ड पर खाना काट रहे हैं, वही आपके खाने में बैक्टीरिया पहुंचाने का जरिया भी बन सकता है? बोर्ड पर चाकू के निशान, उनमें फंसे खाने के छोटे टुकड़े और नमी बैक्टीरिया के लिए अनुकूल माहौल बना सकते हैं। यह खतरा तब और बढ़ जाता है, जब चॉपिंग बोर्ड की सफाई पर ध्यान न दिया जाए। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज चॉपिंग बोर्ड यूज के सेफ्टी टिप्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. ब्रज वल्लभ शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- चॉपिंग बोर्ड क्या है? जवाब- चॉपिंग बोर्ड किचन का एक उपकरण है, जिस पर फल, सब्जियां, पनीर, ब्रेड, मीट और दूसरी खाने की चीजें काटी जाती हैं। यह आमतौर पर लकड़ी, प्लास्टिक, बांस, स्टील या ग्लास जैसे अलग-अलग मैटेरियल का बना होता है। सवाल- इसका सही इस्तेमाल क्यों जरूरी है? जवाब- चॉपिंग बोर्ड पर डेली खाने की कई चीजें काटी जाती हैं। अगर बोर्ड गंदा है या कच्चे मीट के बाद बिना धोए उसी पर सलाद, फल या दूसरी रेडी-टू-ईट चीजें काटी जाती हैं तो क्रॉस-कंटैमिनेशन और फूड पॉइजनिंग का रिस्क बढ़ता है। इससे बचने के लिए बोर्ड का सही इस्तेमाल जरूरी है। सवाल- गंदे चॉपिंग बोर्ड पर कौन-से बैक्टीरिया पनपते हैं? जवाब- गंदे चॉपिंग बोर्ड पर ई. कोलाई, साल्मोनेला, लिस्टेरिया और कैंपिलोबैक्टर जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ये खासकर कच्चे मीट, चिकन और सीफूड के जरिए बोर्ड तक पहुंचते हैं और खाने को दूषित करते हैं। बोर्ड पर मौजूद नमी, फूड पार्टिकल्स और गहरे कट जोखिम बढ़ा सकते हैं। सवाल- चॉपिंग बोर्ड पर बैक्टीरिया कितने समय तक जिंदा रह सकते हैं? जवाब- यह बैक्टीरिया के प्रकार, बोर्ड के मैटेरियल, तापमान और नमी पर निर्भर करता है। कुछ बैक्टीरिया अनुकूल परिस्थितियों में सतह पर घंटों से लेकर कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। इसलिए बोर्ड को सिर्फ पोंछना पर्याप्त नहीं है। इस्तेमाल के बाद उसे अच्छी तरह धोना और सुखाना भी जरूरी है। सवाल- गंदा चॉपिंग बोर्ड यूज करने के क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- इससे फूडबॉर्न इन्फेक्शन या फूड पॉइजनिंग का रिस्क हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका रिस्क ज्यादा गंभीर हो सकता है। ग्राफिक में सभी हेल्थ रिस्क देखिए- सवाल- क्रॉस-कंटैमिनेशन क्या है और इससे कैसे बचें? जवाब- जब हानिकारक बैक्टीरिया एक सतह या बर्तन से दूसरी खाने की चीज तक पहुंच जाते हैं तो इसे क्रॉस-कंटैमिनेशन कहते हैं। उदाहरण के लिए, कच्चा चिकन काटने के बाद बिना धोए उसी बोर्ड पर खाने की दूसरी चीजें काटना। इससे बचने के लिए कच्चे मीट और रेडी-टू-ईट फूड के लिए अलग-अलग चॉपिंग बोर्ड और चाकू इस्तेमाल करें। सवाल- चॉपिंग बोर्ड यूज करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इसे यूज करते समय साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। हर इस्तेमाल के बाद बोर्ड को अच्छी तरह धोकर सुखाएं। दरार वाले बोर्ड का इस्तेमाल न करें। सभी सेफ्टी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- चॉपिंग बोर्ड धोने और स्टोर करने का सही तरीका क्या है? जवाब- इस्तेमाल के तुरंत बाद चॉपिंग बोर्ड पर लगे फूड पार्टिकल्स साफ करें। इसके बाद डिश सोप और गुनगुने पानी से अच्छी तरह धोएं और साफ पानी से रिंस करें। बोर्ड को पूरी तरह सुखाने के बाद ही स्टोर करें। ग्राफिक में देखिए- सवाल- चॉपिंग बोर्ड कितने दिनों में बदलना चाहिए? जवाब- यह उसके मैटेरियल, इस्तेमाल और स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर लकड़ी और प्लास्टिक के बोर्ड्स को 1-3 साल में बदलना चाहिए। सवाल- किन संकेतों से जानें कि चॉपिंग बोर्ड बदलने का समय आ गया है? जवाब- अगर रेगुलर सफाई के बावजूद बोर्ड पर गहरे कट, दरारें, टूटे किनारे या ऐसे खांचे बन गए हैं, जिनमें फूड पार्टिकल्स फंसते हैं तो नया बोर्ड लेना बेहतर है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- चॉपिंग बोर्ड खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- ऐसा बोर्ड चुनें, जो मजबूत, टिकाऊ हो और जिसे आसानी से साफ किया जा सके। इसके अलावा कुछ और बातों का ध्यान रखें। ग्राफिक में देखिए चॉपिंग बोर्ड यूज से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- अलग-अलग कलर के चॉपिंग बोर्ड का क्या यूज है? जवाब- प्रोफेशनल किचन में क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचने के लिए कलर-कोडिंग की जाती है। हालांकि रंगों का सिस्टम संस्थान के अनुसार अलग हो सकता है। आमतौर पर रंगों के अनुसार बोर्ड का यूज देखिए- सवाल- लकड़ी, प्लास्टिक, स्टील या ग्लास, कौन-सा चॉपिंग बोर्ड ज्यादा सुरक्षित होता है? जवाब- लकड़ी और प्लास्टिक के चॉपिंग बोर्ड आमतौर पर बेहतर विकल्प हैं, बशर्ते उन्हें सही तरीके से साफ और सूखा रखें। स्टील और ग्लास साफ करना आसान है, लेकिन इन पर चाकू फिसल सकता है, जिससे चोट लग सकती है। सवाल- क्या प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड से खाने में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच सकते हैं? जवाब- हां, प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड पर बार-बार चाकू के इस्तेमाल से प्लास्टिक के छोटे कण खाने में पहुंच सकते हैं। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा घिसे या गहरे कट वाले प्लास्टिक बोर्ड को बदल देना चाहिए। सवाल- क्या चॉपिंग बोर्ड को गर्म पानी से धोना चाहिए? जवाब- हां, चॉपिंग बोर्ड को इस्तेमाल के बाद डिश सोप और गर्म या गुनगुने पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। हालांकि लकड़ी के बोर्ड को लंबे समय तक गर्म पानी में भिगोकर न रखें। इससे वह खराब हो सकता है। सवाल- क्या एक ही स्पंज से बोर्ड और बर्तन साफ करना सही है? जवाब- एक ही स्पंज से बोर्ड और बर्तन साफ करने से बैक्टीरिया एक सतह से दूसरी सतह तक पहुंच सकते हैं। इसलिए स्पंज को साफ और सूखा रखें। सवाल- चॉपिंग बोर्ड के इस्तेमाल और सफाई को लेकर FSSAI और फूड सेफ्टी एक्सपर्ट क्या सलाह देते हैं? जवाब- FSSAI और फूड सेफ्टी एक्सपर्ट क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचने के लिए कच्चे और पके या रेडी-टू-ईट फूड के लिए अलग चॉपिंग बोर्ड इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। साथ ही बोर्ड को हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ करने, सुखाने और गहरे कट या दरार पड़ने पर बोर्ड बदलने की बात कहते हैं। **************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- जंग लगा चाकू तुरंत फेंकें:कंटेमिनेशन का रिस्क, FSSAI की चेतावनी, 6 संकेत दिखें तो चाकू बदलें, 9 फूड सेफ्टी टिप्स आपके किचन में रखा चाकू अगर जंग खा गया है तो उसे तुरंत हटाएं। जंग लगा या टूटा-फूटा चाकू फूड कंटैमिनेशन की वजह बन सकता है।इसे लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर के फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) के लिए एडवाइजरी जारी की है। पूरी खबर पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- कमर–जांघों की चर्बी सिर्फ मोटापा नहीं:हो सकता है लिपेडेमा, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके
कुछ महिलाओं की जांघों और कूल्हों पर जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है। डाइटिंग और रेगुलर एक्सरसाइज से भी यह चर्बी कम नहीं होती। अक्सर लोग इसे मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह लिपेडेमा (Lipedema) का संकेत हो सकता है। यह एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें शरीर के निचले हिस्से में असामान्य रूप से फैट जमा होता है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। 'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 11% वयस्क महिलाएं इससे प्रभावित हैं। इसलिए आज 'फिजिकल हेल्थ' में लिपेडेमा को विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अंकित पोतदार, कंसल्टेंट, लेप्रोस्कोपी, बेरियाट्रिक एंड रोबोटिक सर्जन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- लिपेडेमा क्या है? जवाब- लिपेडेमा फैट टिश्यू से जुड़ा एक क्रॉनिक डिसऑर्डर है। इसमें शरीर के कुछ हिस्सों (खासकर जांघों, कूल्हों, नितंबों और पैरों) में असामान्य रूप से फैट जमा होने लगता है। सवाल- लिपेडेमा क्यों होता है? जवाब- लिपेडेमा की सटीक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि 20-60% मरीजों में इसकी फैमिली हिस्ट्री मिलती है। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जेनेटिक फैक्टर्स इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव भी इससे जुड़े हो सकते हैं। ग्राफिक में रिस्क फैक्टर देखिए- सवाल- लिपेडेमा कितने प्रकार का होता है? जवाब- लक्षण के आधार पर लिपेडेमा को 5 प्रकारों में बांटा गया है– ध्यान रखें, किसी भी व्यक्ति को एक ही समय में कई प्रकार का लिपेडेमा हो सकता है। सवाल- लिपेडेमा और सामान्य मोटापे में क्या अंतर है? जवाब- लिपेडेमा और मोटापा एक जैसे दिखते हैं, लेकिन दोनों अलग कंडीशंस हैं। सभी अंतर ग्राफिक में देखिए- सवाल- लिपेडेमा के लक्षण क्या हैं? जवाब- लिपेडेमा में शरीर के निचले हिस्से में असामान्य रूप से फैट जमा होने लगता है। इसके साथ दर्द, भारीपन और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- इन स्थितियों में डॉक्टर से कंसल्ट करें- सवाल- डॉक्टर लिपेडेमा का पता कैसे लगाते हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए– सवाल- लिपेडेमा का इलाज क्या है? जवाब- लिपेडेमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन इसके लक्षणों को मैनेज करने के लिए डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव, थेरेपी या अन्य उपचार की सलाह देते हैं। इसमें ये विकल्प शामिल हो सकते हैं- सवाल- अगर लिपेडेमा का इलाज न कराएं तो क्या कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं? जवाब- समय पर इलाज न कराने पर लिपेडेमा धीरे-धीरे बढ़ सकता है और कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसेकि- सवाल- लिपेडेमा का जोखिम कम करने के लिए क्या करें? जवाब- समय पर पहचान और हेल्दी लाइफस्टाइल से लिपेडेमा की रफ्तार और लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- लिपेडेमा से पीड़ित व्यक्ति की दिनचर्या और खानपान कैसा होना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- लिपेडेमा से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- भारत में यह बीमारी कितनी कॉमन है? जवाब- भारत में लिपेडेमा के मामलों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि डॉक्टर अब पहले की तुलना में इस बीमारी की पहचान ज्यादा कर रहे हैं। फिर भी कई लोग इसे सामान्य मोटापा समझ लेते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में केस डायग्नोस नहीं हो पाते। सवाल- क्या BMI सामान्य होने पर भी लिपेडेमा हो सकता है? जवाब- हां, सामान्य BMI वाले लोगों में भी लिपेडेमा हो सकता है। सवाल- क्या लिपेडेमा में दर्द होता है? जवाब- हां, पैरों में दर्द, भारीपन और छूने पर दर्द महसूस होना इसके आम लक्षण हैं। सवाल- क्या यह बीमारी जानलेवा है? जवाब- नहीं, लिपेडेमा जानलेवा नहीं है। लेकिन इलाज न कराने पर इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। सवाल- क्या लिपेडेमा में वजन कम नहीं होता है? जवाब- हां, लिपेडेमा से प्रभावित हिस्सों में जमा फैट पूरी तरह कम नहीं होता है। सवाल- क्या एक्सरसाइज से लिपेडेमा ठीक हो सकता है? जवाब- नहीं, हालांकि इससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में सुधार हो सकता है। सवाल- कौन-सी एक्सरसाइज लिपेडेमा में फायदेमंद है? जवाब- वॉकिंग, स्विमिंग, साइकिलिंग और लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज फायदेमंद मानी जाती है। **************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ………………………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन को हुआ कनकशन:डॉक्टर से जानें ये क्या है, क्यों होता है, लक्षण और बचाव के लिए जरूरी सावधानियां हाल ही में टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन ने बताया कि 'खतरों के खिलाड़ी 15' के एक स्टंट के बाद कुछ समय के लिए उनकी याददाश्त चली गई थी। टेस्ट में उन्हें ‘माइल्ड कनकशन’ डायग्नोज हुआ। पूरी खबर पढ़ें…
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