नेपाल में बाढ़ की वजह से धार्मिक पर्यटन को भारी नुकसान, पशुपतिनाथ से लेकर मनोकामना मंदिर तक के जानें हालात
नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ ने देश में तबाही मचा दी है. अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है. चिंता का विषय है कि मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. नेपाल में आई बाढ़ की वजह से सिर्फ तबाही ही नहीं आई है बल्कि पर्यटन में भी गिरावट आई है. नेपाल के प्रमुख धार्मिक तीर्थों की रंगत भी फीकी पड़ गई है. एक वक्त था, जब मंदिर में घंटियों की आवाज गूंजती थी और पूरा माहौल धूप और अगरबत्ती से सुगंधित रहते थे पर तबाही के बाद वैसी चहल-पहल नहीं रह गई.
पशुपतिनाथ में भारतीय कांवड़ियों की लंबी कतारें अब याद ही रह गई है. मनोकामना मंदिर तक पहुंचने वाली केबल कार में यात्री आधे ही रह गए हैं. लुंबिनी स्थित भगवान बुद्ध की जन्मस्थली के दर्शन करने आने वाले यात्रियों की संख्या घटकर नाम मात्र रह गई है. नेपाल के मंदिर में दीप आज भी जल रहे हैं और श्रद्धालु भगवान के सामने शीश भी झुका रहे हैं लेकिन रौनक वैसी नहीं रह गई है.
पहले 600 भारतीय श्रद्धालु आते थे परशुपतिनाथ मंदिर, अब सिर्फ 50
नेपाल के धार्मिक पर्यटन पर बाढ़ का भारी असर पड़ा है. पशुपतिनाथ मंदिर के बाहर प्रसाद की दुकान लगाने वाले रमेश थापा की आंखें अब मंदिर के रास्ते पर ही रहती है. उन्होंने कहा कि पहले रोजाना करीब 600 भारतीय श्रद्धालु यहां आते थे लेकिन अब भारतीय श्रद्दालुओं की संख्या घटकर 50 रह गई है. अब सिर्फ स्थानीय लोग ही पूजा-पाठ और दर्शन करने आ रहे हैं.
पहले हर रोज 15 हजार कमाते थे, अब दो हजार भी मुश्किल- फूल-माला बेचने वाले व्यापारी
फूल-माला बेचने वाले शमशेर गुरुंग का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या में आई गिरावट का असर सीधा चूल्हे तक दिख रही है. पहले हर रोज करीब 15 हजार की बिक्री होती थी. अब दो हजार रुपये जुटाना भी मुश्किल हो गया है. अब दुकान के बाहर सजाई जा रही फूल-मालाएं शाम तक मुरझा जा रही हैं. कोई खरीददार ही नहीं मिल रहा है.
मनोकामना मंदिर और लुंबिनी में भी पसरी शांति
नेपाल के मनोकामना मंदिर में भी हादसे का असर दिखाई दे रहा है. शनिवार को पोखरा से सिर्फ 10 भारतीय श्रद्धालु ही आए थे. रविवार को तो यह संख्या भी शून्य हो गई. वहीं, भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में शांति पसर गया है. लुंबिनी होटल संघ के अध्यक्ष लीलामणि शर्मा का कहना है कि बाढ़ की वजह से भारत और श्रीलंका के कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं. परिवहन और होटल कारोबारियों को इसका दंश झेलना पड़ रहा है.
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी परेशान
बाढ़ की वजह से कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालु सबसे अधिक परेशान हैं. दरअसल, रसुवागढ़ी रोड पूरी तरह से ठप हो गई हैं. इस रास्ते से यात्रा पर गए कई पर्यटकों के हताहत होने की आशंका है. महीने भर पहले जिन श्रद्धालुओं ने यात्रा की तैयारी कर ली थी, अब वे परेशान हैं कि वह यात्रा पर कैसे जाएं और उनके जन्म भर का सपना टूट रहा है पर वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं.
धार्मिक पर्यटन से नेपाल को हर साल 12 हजार करोड़ का फायदा
नेपाल पर्यटन बोर्ड की मानें तो धार्मिक पर्यटन से देश को सालान लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की कमाई होती है. मौजूदा त्रासदी की वजह से अगले दो महीने तक धार्मिक पर्यटन में करीब 40 प्रतिशत नुकसान की आशंका है. आसान भाषा में कहें तो मंदिर में कम होती भीड़ का असर सिर्फ दर्शन और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. इससे उन सैकड़ों-हजारों परिवारों की रोजी-रोटी को भी खतरा आया है, जो मंदिर में आने वाले श्रद्दालुओं के बल पर अपना घर चलाते थे.
ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगीः मदन कौशिक
राज्य में स्थित ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने ग्लेशियर झीलों की निगरानी एवं जोखिम न्यूनीकरण के लिए विश्वभर में उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने के निर्देश दिए हैं. रविवार को उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचकर उत्तराखंड में स्थित ग्लेशियर झीलों की स्थिति तथा संभावित जोखिम की विस्तृत जानकारी ली. मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्लेशियर एवं ग्लेशियर झीलों की स्थिति में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी अत्यंत आवश्यक है.
आधुनिक तकनीक का उपयोग
उन्होंने निर्देश दिए कि ग्लेशियर झीलों की निरंतर एवं रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए. ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार, जलभराव की स्थिति तथा उनमें होने वाले संभावित बदलावों पर लगातार नजर रखी जाए. इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन, सेंसर आधारित निगरानी तथा अन्य आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का अध्ययन कर इन्हें आवश्यकता के अनुसार अपनाया जाए.
पहले से सतर्क किया जा सके
मंत्री ने निर्देश दिए कि ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों एवं तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए. उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जाएं, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाकर संभावित प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सतर्क किया जा सके.
आपात परिस्थिति में हो तुरंत कार्रवाई
मंत्री मदन कौशिक ने बैठक में प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा तथा बारिश के कारण उत्पन्न परिस्थितियों की भी विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें. उन्होंने राज्यभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली. विभिन्न जनपदों में हुई वर्षा, संभावित मौसम पूर्वानुमान तथा आगामी दिनों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए
उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए तथा भूस्खलन संभावित एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए. जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण एवं तकनीकी दल तैनात किए जाएं, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके.
आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंप एवं अन्य आवश्यक उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए. उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता से कार्य करने को कहा, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. कहा कि बिजली, पेयजल एवं संचार सेवाओं की बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाए. यदि कहीं भी ये सेवाएं प्रभावित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आमजन को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी संबंधित विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें. दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े. बैठक में मा0 उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति श्री विनय रुहेला, मा0 उपाध्यक्ष ले. कर्नल (अ.प्रा.) रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा, श्री रोहित कुमार, सुश्री प्रतिभा पुरोहित, मोहित माथुर आदि उपस्थित रहे.
यात्रा संचालन मौसम एवं मार्ग की स्थिति के आधार पर हो
मंत्री ने निर्देश दिए कि मौसम की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए. यदि अत्यधिक वर्षा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए.
नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी के निर्देश
मंत्री ने नदियों के जलस्तर पर चैबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक किया जाए तथा खतरे की आशंका होने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए. उन्होंने निर्देश दिए कि डैम एवं बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए. आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट किया जाए, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके.
वैकल्पिक संचार व्यवस्था हर समय तैयार रहे
मंत्री ने कहा कि यदि भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण किसी क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होती है तो वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय की जाए. उन्होंने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होने की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध होने चाहिए, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए.
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों एवं गंभीर रोगियों की विशेष निगरानी
मंत्री ने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं से युक्त स्थानों पर पहुंचाया जाए. जहां आवश्यकता हो वहां हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध कराई जाए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए.
डेंगू की रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर अभियान के निर्देश
मा0 मंत्री ने प्रदेश में डेंगू की रोकथाम की भी समीक्षा की. उन्होंने इसे राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए. सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
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