दिल्ली लक्ष्मी योजना: आरडी की परिपक्वता अवधि 31 जुलाई 2029 तय, दो साल बाद होगी समीक्षा
दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत आवर्ती जमा (आरडी) की परिपक्वता तिथि फिलहाल 31 जुलाई, 2029 तय की गई है। योजना शुरू होने के दो साल बाद इसकी समीक्षा कर मंत्रिपरिषद को इस तारीख में बदलाव करने का अधिकार होगा। यह तारीख अगले लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में आती है।
एक दस्तावेज से यह जानकारी मिली। दस्तावेज में कहा गया है कि जिन आवेदकों के पास आधार कार्ड नहीं है, वे भी दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीकरण करा सकती हैं। इसके लिए उन्हें उपलब्ध होने पर आधार नामांकन पर्ची के साथ कोई वैकल्पिक दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जमा करना होगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग उन लाभार्थियों के लिए अपने जिला कार्यालयों के माध्यम से आधार नामांकन की सुविधा उपलब्ध कराएगा, जिन्होंने अभी तक यह पहचान संख्या प्राप्त नहीं की है। दस्तावेज में कहा गया है कि इसलिए आवेदक दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीकरण पूरा करते समय ही आधार नामांकन के लिए आवेदन कर सकती हैं। दस्तावेज में कहा गया है, ‘‘मंत्रिपरिषद को दिल्ली लक्ष्मी योजना शुरू होने के दो साल बाद इसके तहत आवर्ती जमा की परिपक्वता अवधि की समीक्षा करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार होगा।’’ फिलहाल, आवर्ती जमा की ‘लॉक-इन’ अवधि 31 जुलाई, 2029 तक निर्धारित है, जो अगले लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में आती है।
दस्तावेज में बताया गया है कि इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये मिलेंगे। इसमें से 1,500 रुपये आवर्ती जमा खाते में जमा किए जाएंगे, जबकि 1,000 रुपये लाभार्थी के बैंक खाते से जुड़े केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) वॉलेट के माध्यम से अंतरित किए जाएंगे। दस्तावेज में कहा गया है कि लाभार्थी चाहें तो चुने गए बैंकिंग साझेदार के माध्यम से हर महीने पूरी 2,500 रुपये की राशि आवर्ती जमा खाते में जमा कराने का विकल्प चुन सकती हैं।
आरडी की ‘लॉक-इन’ अवधि 31 जुलाई, 2029 तक होगी और इस पर मौजूदा दर के अनुसार ब्याज मिलेगा। दिल्ली सरकार ने 26 अगस्त को दिल्ली लक्ष्मी योजना की औपचारिक शुरुआत की। योजना के तहत पहली मासिक राशि का वितरण एक सितंबर से किया जाना है।
इस योजना के तहत 26 अगस्त को करीब 4,000 लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए थे। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाते हैं और इसका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में 17 लाख तक लाभार्थियों की मदद करना है।
विदेश में विविधता की बात, भारत में क्यों नहीं? Mohan Bhagwat के भाषण पर कपिल सिब्बल का तीखा हमला
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के बाद भारत में नई सियासी बहस शुरू हो गई है। भाजपा के कई नेता जहां उनके भाषण की तारीफ कर रहे हैं और समर्थन में खड़े हैं, वहीं कांग्रेस ने भागवत की टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भागवत के ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर निशाना साधा है।
यह राहुल गांधी का भाषण है या आरएसएस प्रमुख का?
कपिल सिब्बल ने मोहन भागवत के भाषण पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी बातें सुनकर उन्हें लगा कि यह राहुल गांधी का भाषण है या आरएसएस प्रमुख का। सिब्बल ने कहा कि विदेश में विविधता को स्वीकार करने की बात की जाती है, लेकिन भारत में इसी भावना को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर विदेश में विविधता को स्वीकार किया जाता है तो अपने देश में विविधता को क्यों बर्दाश्त नहीं किया जाता?
मॉब लिंचिंग का भी उठाया मुद्दा
सिब्बल ने कहा कि जब मोहन भागवत न्यूयॉर्क में भारत के लोगों के एक-दूसरे के प्रति संवेदना और एकता की बात कर रहे थे, तो उन्हें राहुल गांधी के बयानों की याद आ गई। उन्होंने मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब भारत में ऐसी घटनाएं होती हैं, तब क्या लोगों के प्रति वही संवेदना दिखाई जाती है, जिसकी बात विदेश में की जा रही है?
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राम मंदिर का भी किया जिक्र
कपिल सिब्बल ने राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंदू और राम भक्त होने पर गर्व किया जा सकता है, लेकिन जो लोग विविधता के सम्मान की बात करते हैं, उन्हें मंदिर निर्माण से पहले हुई घटनाओं पर भी बोलना चाहिए।
विविधता को लेकर भारत में कितनी बार आवाज उठाई?
सिब्बल ने मोहन भागवत के भाषण में इस्तेमाल किए गए चार शब्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भागवत ने विविधता का जश्न मनाने, सम्मान करने, स्वीकार करने और संरक्षण की बात कही। इसके बाद सिब्बल ने सवाल किया कि भारत में जब विविधता कथित तौर पर खतरे में होती है, तब आरएसएस प्रमुख ने कितनी बार इसके खिलाफ आवाज उठाई?
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अलग दर्शकों के सामने अलग संदेश
कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि मोहन भागवत ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं, जो उनके मुताबिक विविधता को स्वीकार, सम्मान और संरक्षित नहीं करती। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में एक अलग दर्शक वर्ग के सामने अलग संदेश दिया जा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने भागवत के विदेश में दिए गए भाषण और भारत की राजनीति में उनके रुख के बीच अंतर पर सवाल उठाए।
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