स्वतंत्रता संग्राम का श्रेय किसी एक व्यक्ति या पार्टी को नहीं: योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीरांगना अवंती बाई लोधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रविवार को कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का श्रेय कोई एक व्यक्ति, पार्टी या क्षेत्र नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए पूरे भारत ने एक स्वर और एक दिशा में संघर्ष किया, जिसके सामने ब्रिटिश सत्ता का सिंहासन भी डोल उठा था। मुख्यमंत्री ने यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में जिला लोधी क्षत्रिय राजपूत सभा, लखनऊ द्वारा वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की लखनऊ में स्थापित प्रतिमा के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कही।
आदित्यनाथ ने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बैरकपुर में मंगल पांडेय ने जो चिंगारी प्रज्वलित की थी, उसे झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने आगे बढ़ाया और मेरठ में धन सिंह गुर्जर ने नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि झांसी और ग्वालियर के बीच उस संघर्ष का नेतृत्व वीरांगना अवंती बाई लोधी ने मात्र 26 वर्ष की आयु में किया और वह देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख सेनानियों में शामिल थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना अवंती बाई लोधी, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना ऊदा देवी और झलकारी बाई के बलिदान यह साबित करते हैं कि मातृशक्ति किसी से कम नहीं है।
यदि महिलाओं को अवसर मिले तो वे जीवन के हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं और नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं। आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार ने जिस प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) को समाप्त करने का काम किया था, उसे उनकी सरकार ने पुनर्गठित किया है। उन्होंने कहा कि पीएसी की 54 कंपनियों को फिर से सक्रिय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने यह भी तय किया है कि पीएसी में बेटियां भी नेतृत्व करेंगी। इसके तहत तीन महिला पीएसी बटालियन का गठन किया गया है, जिनमें एक लखनऊ, दूसरी गोरखपुर और तीसरी बदायूं में है। उन्होंने बताया कि बदायूं में गठित महिला पीएसी बटालियन का नाम वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर रखा गया है और इसका काम अंतिम चरण में है।
वहीं, लखनऊ की महिला पीएसी वाहिनी का नाम वीरांगना ऊदा देवी और गोरखपुर की महिला पीएसी वाहिनी का नाम वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर रखा गया है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि 50 हजार बेटियों को महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी देने की योजना भी शुरू की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रदेश के खजाने से गया एक-एक पैसा वसूल कर वापस लाया जाएगा। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग लोधी समाज से जुड़े नेताओं और महापुरुषों का उल्लेख करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी हमला बोला। आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि तक नहीं दी।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का आचरण महापुरुषों के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। इस समारोह को केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह और संदीप सिंह समेत कई प्रमुख नेताओं ने भी संबोधित किया।
सामाजिक सद्भाव और रिश्ते दांव पर लगाकर सत्ता हासिल करना राजनीति नहीं: एकनाथ खडसे
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता एकनाथ खडसे ने राज्य के राजनीतिक माहौल में आई भारी गिरावट पर खेद जताते हुए रविवार को कहा कि राजनीति को व्यक्तिगत रिश्ते और सामाजिक सद्भाव दांव पर लगाकर केवल सत्ता पाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। खडसे ने अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज के कटु माहौल के विपरीत, 2014 से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष आपसी सम्मान बनाए रखते हुए मिलकर काम करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2014 तक अगर आप महाराष्ट्र की राजनीति को देखें, तो माहौल साफ-सुथरा और सौहार्दपूर्ण था।
विपक्ष और सत्तारूढ़ दल साथ रहते थे, एक-दूसरे से संवाद करते थे और साथ मिलकर काम करते थे। वे एक-दूसरे की आलोचना तो करते थे, लेकिन व्यक्तिगत मतभेद कभी इस हद तक नहीं पहुंचे।’’ उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत संबंध बनाए गए और वे आज भी कायम हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व नेता और अब राकांपा (शप) में शामिल हो चुके खडसे ने कहा कि भले ही समय के साथ सरकारें और राजनीतिक जुड़ाव बदलते रहते हैं, लेकिन अतीत और वर्तमान की राजनीतिक चर्चाओं में जो बदलाव आया है, वह बेहद खेदजनक है।
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उन्होंने कहा, ‘‘सरकारें आती-जाती रहती हैं, कार्यकर्ता बदलते रहते हैं, और लोग एक तरफ से दूसरी तरफ तथा एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाते रहते हैं।’’ राजनीति में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए खडसे ने कहा कि प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे और कई अन्य नेताओं ने महाराष्ट्र में भाजपा का संगठन खड़ा करने के लिए कड़ी मेहनत की थी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं उस दौर की राजनीति की तुलना आज की राजनीति से करता हूं, तो मुझे दुख होता है। मैं राजनीति के बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन आज के हालात देखकर मुझे दुख होता है।’’ राज्य के पूर्व मंत्री ने कहा कि जब 2000 और 2014 के बीच महाराष्ट्र में भाजपा सत्ता में नहीं थी, तब विपक्ष में रहने के बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रेरित रखने की कोशिशें की गईं।
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कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद पवार और खडसे के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं और राजनीति में कोई भी शत्रुता स्थायी नहीं होनी चाहिए। आठवले ने कहा, ‘‘मैं हमेशा कहता हूं कि राजनीति में कभी भी दुश्मनी नहीं रखनी चाहिए। भारतीय लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर देश चलाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने खडसे को शामिल नहीं किया होता, तो वह खुशी-खुशी उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल कर लेते।
आठवले ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि शायद खडसे को उनकी पार्टी से विधायक का टिकट नहीं मिल पाता।
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