‘एक देश, एक समय’: सरकार ने IST को सामान्य समय बनाने के लिए नियम अधिसूचित किए
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं. इसके साथ ही पूरे देश में कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य आधिकारिक उद्देश्यों के लिए भारतीय मानक समय (आईएसटी) को सामान्य समय (कॉमन टाइम) बनाने का रास्ता साफ हो गया है. इन नियमों को 27 अगस्त को अधिसूचित किया गया. ये सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे. यह अवधि सरकारी विभागों, कारोबारों, संस्थानों और अन्य संगठनों को अपनी प्रणालियों और प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने के लिए समय देने के उद्देश्य से रखी गई है.
प्रणालियों के सुचारू संचालन के लिए बेहद अहम
यह कदम तकनीक आधारित प्रणालियों में सटीक और समन्वित समय की बढ़ती जरूरत के बीच उठाया गया है. बैंकिंग और डिजिटल भुगतान, दूरसंचार, रेलवे, बिजली नेटवर्क, कंप्यूटर सिस्टम और सरकारी रिकॉर्ड तेजी से सटीक टाइमस्टैम्प पर निर्भर हो रहे हैं. ऐसे में समय की गणना में एकरूपता इन प्रणालियों के सुचारू संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
नेटवर्क की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा
नई व्यवस्था के तहत सामान्य समय से बैंकिंग और डिजिटल भुगतान लेनदेन में टाइमस्टैम्प की सटीकता बेहतर होने की उम्मीद है. साथ ही, यह रेलवे और हवाई अड्डों जैसी परिवहन प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय में मदद करेगा और दूरसंचार एवं इंटरनेट नेटवर्क की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा. सटीक और समन्वित समय बिजली प्रणालियों, सरकारी और कानूनी रिकॉर्ड के साथ-साथ आपातकालीन और अन्य समय-संवेदनशील सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण होगा.
बुनियादी ढांचा विकसित कर रही
यह व्यवस्था सरकार की व्यापक ‘एक देश, एक समय’ पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में सुरक्षित और एक समान समय-वितरण प्रणाली स्थापित करना है. सरकार भारतीय संस्थानों और लीगल मेट्रोलॉजी प्रयोगशालाओं के माध्यम से सटीक भारतीय मानक समय के प्रसार के लिए बुनियादी ढांचा विकसित कर रही है.
विदेशी सैटेलाइट आधारित स्रोतों पर निर्भर
नियमों में सुरक्षित और विश्वसनीय समय प्रसार के लिए भारत की सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली 'नाविक' के साथ-साथ अन्य स्वीकृत भारतीय टाइमिंग स्रोतों के इस्तेमाल का भी प्रावधान किया गया है. फिलहाल कई प्रणालियां समय निर्धारण के लिए विदेशी सैटेलाइट आधारित स्रोतों पर निर्भर हैं. स्वदेशी समय-वितरण बुनियादी ढांचे के विकास से महत्वपूर्ण प्रणालियों को समय का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होने और बाहरी टाइमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है.
इस पहल के तहत जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी में व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी आधारित इंडियन स्टैंडर्ड टाइम डिसेमिनेशन डेमोंस्ट्रेशन नेटवर्क शुरू किया गया था. इस प्रणाली ने बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों के लिए आईएसटी के प्रसार की क्षमता का प्रदर्शन किया है.
स्रोत: आईएएनएस
भारत के लिए रूस बड़े पेट्रोल निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा, शिपमेंट करीब एक मिलियन बैरल पहुंची
नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के लिए रूस एक बड़े पेट्रोल निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा है और बीते दो महीने में देश ने करीब एक मिलियन बैरल की शिपमेंट की है। इसकी वजह रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन की ओर से लगातार हमले करना है, जिससे रूस को घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पेट्रोल को आयात करना पड़ रहा है। यह जानकारी शिप-ट्रैकिंग फर्म वोर्टेक्सा की रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस का समुद्री रास्ते से होने वाला पेट्रोल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 470,000 टन हो गया। यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूसी इलाके के अंदर रिफाइनरियों के बंद होने से ईंधन की कमी हो गई है, जिसकी वजह से स्थानीय फिलिंग स्टेशनों पर कारों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। रूस में घरेलू ईंधन उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इस भारी कमी से निपटने के लिए रूस को पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोक लगा दी है।
वोर्टेक्सा ने बताया कि जुलाई और अगस्त के दौरान रूसी रिफाइनरियों पर 32 हमले हुए।
रूस में ईंधन के घरेलू उत्पादन की कमी को पूरा करने में मदद करने वाले अहम आपूर्तिकर्ताओं में तुर्की और मोरक्को के साथ-साथ भारतीय रिफाइनर भी शामिल थे। ट्रेड से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत की ज्यादातर आपूर्ति गुजरात के तट पर स्थित नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी से आई, जिसमें रूस की बड़ी तेल कंपनी रोजनेफ्ट की हिस्सेदारी है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि ग्लोबल रिफाइनिंग क्षमता को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रिफाइनर के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और अपनी क्षमता को 272 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करने जा रहा है।
इस बीच, ईरान युद्ध शुरू होने और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात के लिए अपने स्रोतों का दायरा बढ़ाया है। सामान्य समय में दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात इसी रास्ते से होता है।
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट आने से हाल के महीनों में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात तेजी से बढ़ा है। जुलाई में, देश के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी आधे से अधिक रही, जिससे वह यूएई और सऊदी अरब को पीछे छोड़कर भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया।
शिपिंग इंटेलिजेंस और रिसर्च फर्म केप्लर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात लगभग 2.1 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। हालांकि, यह इस साल जून और जुलाई में देखे गए लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन के रिकॉर्ड स्तर से काफी कम है।
अगस्त में गिरावट के बावजूद, रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है और भारत के कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा है। रूस के बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएआई) का नंबर आता है, जो 6,11,000 बैरल प्रति दिन सप्लाई करता है। इसके बाद सऊदी अरब (3,85,000 बैरल प्रति दिन ), वेनेजुएला (3,83,000 बैरल प्रति दिन), नाइजीरिया (1,29,000 बैरल प्रति दिन ) और ब्राजील (1,20,000 बैरल प्रति दिन) का स्थान है।
--आईएएनएस
एबीएस
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