दिल्ली में RSS मुख्यालय के बाहर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, अध्यक्ष उदय भानु चिब हिरासत में
भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं ने यहां झंडेवालान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने भाजपा और संघ की विचारधारा को ‘भेदभावपूर्ण और जातिवादी’ बताया तथा इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने मनुस्मृति के पन्ने भी जलाए। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने प्रदर्शन की अगुवाई की।
उनके हाथ में संविधान की एक प्रति थी और उन्होंने युवा कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मनुस्मृति के खिलाफ नारे लगाए। तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों को संविधान की प्रस्तावना की प्रतियां, मनुस्मृति का विरोध करने वाले पोस्टर और इस प्राचीन ग्रंथ की प्रतियां लिये हुए देखा गया। कुछ प्रदर्शनकारियों को मनुस्मृति के पन्ने जलाते हुए देखा गया, जबकि आधी जली हुई प्रतियां और ‘मनुस्मृति को नकारो’ लिखे पोस्टर जमीन पर पड़े थे।
इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat ने New York में उद्योग जगत से की वार्ता, भारत-अमेरिका रिश्तों पर हुई चर्चा
चिब ने आरोप लगाया कि देश में संविधान की विचारधारा और भाजपा-संघ की विचारधारा के बीच लड़ाई चल रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा-संघ की विचारधारा मनुस्मृति से प्रेरित है और ‘‘दलित-विरोधी’’ है। चिब ने कहा, ‘‘यह देश संविधान से चलेगा, मनुस्मृति से नहीं।’’ उन्होंने उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक कार्यक्रम के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ की भी आलोचना की।
इसे भी पढ़ें: सच्चाई vs भ्रम: मनुस्मृति में नारी को लेकर ऐसा लिखा क्या है? जिस पर होता है बवाल
उन्होंने कहा कि यह घटना दलितों और संविधान का अपमान है। भारतीय युवा कांग्रेस के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने चिब को हिरासत में ले लिया और पहाड़गंज पुलिस स्टेशन ले गई। इस मौके पर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरि कृष्ण और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।
युवा कांग्रेस के दावों पर आरएसएस की ओर से तत्काल कोई बयान नहीं आया।
बेंगलुरु: ISIS आतंकी साजिश मामले में दोषी सैयद फसिउर रहमान को 7 साल की सजा
एनआईए की अदालत ने एक व्यक्ति को आईएसआईएस से जुड़ी आतंकी साजिश में शामिल होने के लिए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे सांप्रदायिक दंगे भड़काने के उद्देश्य से लक्षित हत्याओं की साजिश रचने में शामिल होने का दोषी ठहराया था। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच के अनुसार, इस साजिश का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी महबूब पाशा था।
उसने बेंगलुरु के गुरप्पनपाल्या स्थित अपने आवास पर कई बैठकें आयोजित की थीं। एनआईए के रविवार को जारी बयान में कहा गया कि इन बैठकों में आरोपियों ने सांप्रदायिक दंगे भड़काने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस के राष्ट्रविरोधी एजेंडा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लक्षित हत्याओं की साजिश रची थी। बयान में कहा गया कि दोषी करार दिए गए आरोपी सैयद फसिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान ने इन साजिश संबंधी बैठकों में हिस्सा लिया था।
इसे भी पढ़ें: KPSC भर्ती गड़बड़ी मामले में CID ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को हिरासत में लिया
उसने अल-हिंद समूह के सदस्यों के जंगल प्रशिक्षण शिविर के लिए डेकाथलॉन स्पोर्ट्स स्टोर से टेंट और चाकू खरीदे थे। एनआईए ने कहा कि इस साजिश का मकसद आईएसआईएस/दाएश का एक ‘विलायाह’ (प्रशासनिक क्षेत्र या प्रांत) स्थापित करना था। रहमान को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है और उस पर 48 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
इसे भी पढ़ें: NIA चार्जशीट पर Delhi Court ने लिया संज्ञान, Red Fort blast में 13 आरोपी
यह मामला शुरुआत में कर्नाटक पुलिस ने 10 जनवरी, 2020 को बेंगलुरु में दर्ज किया था। इसके बाद उसी साल 23 जनवरी को एनआईए ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए इसे फिर से दर्ज किया। अब तक एनआईए ने 20 आरोपियों के खिलाफ तीन आरोपपत्र दाखिल किए हैं।
इससे पहले, 14 जुलाई, 2026 को हनीफ खान को दोषी ठहराया गया था। उसने अक्टूबर 2025 में शुरू हुई सुनवाई के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi







