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2,965 लोगों ने एआई से ज्यादा इंसानी कला को चुना:एआई की चमक के बीच ‘मानवीय निशान’ वाली कला पर भरोसा बढ़ा

एआई के दौर में कुछ सेकंड में सैकड़ों तस्वीरें और डिजाइन बन रहे हैं। फिर भी कला में इंसान के हाथ से बने काम की अहमियत बढ़ रही है। पेंटिंग में उंगलियों के निशान, सुधारे गए हिस्से या कहीं छूटा रंग अब कलाकृति के असली होने का सबूत माने जा रहे हैं। एआई पल भर में कई विकल्प देता है, लेकिन इससे बनी तस्वीरों पर लोगों का भरोसा घट सकता है। 2024 की सीएचआई कॉन्फ्रेंस में पेश एक अध्ययन में 60 लोगों ने डिजाइन बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया। उन्होंने एआई के शुरुआती उदाहरणों को ज्यादा अपनाया। इससे नए और अलग तरीके से सोचने की गुंजाइश कम हुई। अध्ययन के मुताबिक, एआई के तैयार जवाब इंसान को मुश्किल सवालों पर सोचने और नए विचार खोजने से पहले ही रोक सकते हैं। रिसर्च, एआई से आइडिया कम मौलिक हो रहे छह अलग-अलग प्रयोगों में 2,965 लोगों पर हुए परीक्षण में लोगों ने एआई के मुकाबले इंसानों की बनाई कला को ज्यादा पसंद किया, जबकि दोनों तस्वीरें देखने में समान थीं। 2015 के एक अध्ययन के मुताबिक, लोगों को हाथ से बनी चीजें इसलिए ज्यादा पसंद आती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बनाने वाले ने इसमें समय, मेहनत और प्यार लगाया है। असली कला में दिखने वाले छोटे निशान बताते हैं कि कलाकार ने इसे बनाते समय कई फैसले लिए। एआई नकल करेगा, फिर भी असली परीक्षा ‘इतिहास’ की होगी आगे चलकर एआई नकली थंबप्रिंट, पुरानी फिनिशिंग और ब्रश के निशान बनाकर खुद को प्रामाणिक दिखाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन सिर्फ गड़बड़ियों की नकल काफी नहीं होगी। जैसे-जैसे बनावट देखकर सच्चाई पहचानना मुश्किल होगा, वैसे-वैसे कलाकृति के पीछे का रचनात्मक इतिहास और उसकी प्रामाणिकता ज्यादा अहम हो जाएगी। भविष्य: एआई टूल बनेगा, जीत ‘मानवीय संघर्ष’ की होगी फोटोग्राफी और डिजिटल टूल्स ने भी कभी कलाकारों के हुनर को चुनौती दी थी। बाद में कलाकारों ने इन्हें अपनी सोच दिखाने का नया तरीका बनाया। आगे भी एआई का बेहतर इस्तेमाल वही करेंगे, जो उसके बनाए ढर्रे से अलग सोचेंगे। एक जैसी तस्वीरों के बीच लोग ऐसी कला पसंद करेंगे, जिसमें इंसान की कमी, गलतियां और संघर्ष साफ दिखे।

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आप भी बाथरूम के सॉकेट में ट्रिमर लगाकर छोड़ देते हैं? ये छोटी सी आदत बन सकती है खतरनाक

बाथरूम में ट्रिमर चार्ज करना सुविधाजनक जरूर लगता है, लेकिन नमी और बिजली का संपर्क खतरनाक हो सकता है. जानें बाथरूम में ट्रिमर चार्ज करने से बैटरी, चार्जिंग पोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को क्या नुकसान हो सकता है.

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125 रन पर आधी टीम लौट चुकी थी पवेलियन, फिर वैभव सूर्यवंशी की टीम के खिलाफ रिंकू सिंह 'संकटमोचक'

Rinku Singh fifty against Vaibhav Sooryavanshi: दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में ईस्ट जोन के तेज गेंदबाजों के आगे सेंट्रल जोन ने महज 125 रन पर अपने 5 अहम विकेट गंवा दिए थे. ऐसे मुश्किल वक्त में रिंकू सिंह ने संकटमोचक की भूमिका निभाई. तेज गेंदबाज मुकेश कुमार और शमी का डटकर सामना करते हुए रिंकू ने 60 रनों की जुझारू पारी खेली. उन्होंने निचले क्रम के साथ मिलकर टीम को संभाला और स्कोर 266 रनों तक पहुंचाया. Sun, 30 Aug 2026 19:17:35 +0530

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