अगली बार शायद आप मुझे CM के रूप में देखें, मेरी तो महत्वाकांक्षा है, तय तो पार्टी करेगी: केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य ने खुलकर मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा जाहिर कर दी है. उन्होंने कहा कि मेरी तो महत्वाकांक्षा है, लेकिन तय तो पार्टी ही करेगी.
मंदिर घंटा किसी और के लिए न बजाना क्यों माना जाता है सही? जानें घंटा बजाने से जुड़े धार्मिक नियम
Mandir ghanta bajane ka niyam: हिंदू धर्म में मंदिरों में लगे बड़े घंटे को अत्यंत पवित्र माना जाता है, और इसे बजाने की भी एक विशेष धार्मिक परंपरा और नियम है। मान्यता है कि यह घंटा सिर्फ एक साधारण उपकरण नहीं, बल्कि मंदिर की पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इसे बजाने के लिए भी उचित समय और भाव का ध्यान रखना आवश्यक बताया गया है।
घंटा बजाने से जुड़ी धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मंदिर के घंटे की गूंजती हुई ध्वनि को दूर-दूर तक फैलने वाली दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जब भक्त श्रद्धापूर्वक मंदिर के घंटे को बजाता है, तो इसकी ध्वनि से पूरे परिसर में सकारात्मकता का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि घंटे की ध्वनि को देवी-देवताओं के जागरण और उनके आह्वान का माध्यम माना जाता है।
घंटा बजाने का सही समय और तरीका
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंदिर के घंटे को प्रवेश करते समय, आरती के दौरान और मंदिर से बाहर निकलते समय बजाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि घंटे को हमेशा शांत और श्रद्धापूर्ण मन से बजाना चाहिए, न कि जल्दबाजी या उतावलेपन में। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि घंटा बजाते समय मन में भगवान का ध्यान करना और सकारात्मक भावना रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
किन समयों पर घंटा बजाने से बचना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के पट बंद होने के बाद और रात्रि के समय अनावश्यक रूप से घंटा बजाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दौरान देवी-देवताओं को विश्राम करने वाला माना जाता है। इसके अलावा मंदिर परिसर में शांति भंग करने के उद्देश्य से या खेल-तमाशे के तौर पर घंटा बजाना भी अनुचित माना जाता है, क्योंकि इसे मंदिर के अनुशासन के विपरीत बताया गया है।
घंटे की ध्वनि के वैज्ञानिक फायदे भी हैं खास
धार्मिक महत्व के साथ-साथ मंदिर के घंटे की ध्वनि को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि घंटे की गूंज से उत्पन्न ध्वनि तरंगें वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने में सहायक होती हैं, साथ ही यह मस्तिष्क को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में भी मदद करती हैं।
आज भी हर मंदिर में गूंजती है घंटे की मधुर ध्वनि
समय के साथ भले ही मंदिरों की संरचना और व्यवस्थाओं में कई बदलाव आए हों, लेकिन बड़े घंटे को श्रद्धापूर्वक बजाने की यह परंपरा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज भी देशभर के मंदिरों में भक्त दर्शन के दौरान इस पवित्र घंटे को बजाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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