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राजस्थान में घरेलू पर्यटकों की पहली पसंद बना सीकर, पहले छह महीनों में पहुंचे 1.56 करोड़ से अधिक श्रद्धालु

संदीप दहिया जयपुर, 30 अगस्त जयपुर के राजसी महलों, उदयपुर की झीलों और जैसलमेर के अंतहीन रेतीले धोरों के लिए मशहूर राजस्थान का पर्यटन परिदृश्य अब धीरे-धीरे बदल रहा है। धार्मिक पर्यटन के साथ अब आस्था के केंद्रों पर होने वाली शादियों ने सीकर को घरेलू पर्यटकों के एक नए और तेजी से उभरते ठिकाने के रूप में पहचान दिलाई है। जनवरी से जून 2026 के आधिकारिक पर्यटन आंकड़ों ने राजस्थान के पर्यटन मानचित्र की बदलती तस्वीर को सामने रखा है।

इस दौरान सीकर में 1,56,18,987 घरेलू पर्यटक पहुंचे, जो राज्य के सभी जिलों में सबसे अधिक है। यह संख्या जयपुर में दर्ज 81,49,183 घरेलू पर्यटकों की तुलना में करीब दोगुनी है। चित्तौड़गढ़ 1,33,75,121 घरेलू पर्यटकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

इसके बाद जैसलमेर में 1,18,34,038 और अजमेर में 99,28,270 लाख घरेलू पर्यटक पहुंचे। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है, ‘‘ये आंकड़े राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र की एक उभरती तस्वीर दिखाते हैं। जहां जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर अब भी विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा ठिकाने बने हुए हैं, वहीं आस्था से जुड़े स्थल राज्य के कहीं बड़े घरेलू पर्यटन बाजार को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं।’’ राजस्थान पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक (विपणन) अजय शर्मा ने कहा कि साल की पहली छमाही के ये आंकड़े राज्य की पर्यटन संभावनाओं की कहीं व्यापक तस्वीर पेश करते हैं।

शर्मा ने कहा, ‘‘घरेलू पर्यटकों की बढ़ती संख्या राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध विविध पर्यटन अनुभवों की लोकप्रियता को दर्शाती है। वहीं, विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी राज्य की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पहचान को और मजबूत कर रही है।’’ उन्होंने कहा कि घरेलू पर्यटन के आंकड़े ही राजस्थान के पर्यटन बाजार की विविधता की कहानी बयां करते हैं। सीकर और करौली जैसे आस्था के केंद्रों से लेकर चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक विरासत, सवाई माधोपुर के वन्यजीव पर्यटन, जैसलमेर के रेगिस्तानी आकर्षण और सिरोही व उदयपुर के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक स्थलों तक, पर्यटकों की पसंद काफी व्यापक है।

सीकर की बढ़ती लोकप्रियता में सबसे बड़ा योगदान खाटू श्यामजी का है, जो उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। हालांकि, जिले के अधिकारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अब सीकर की लोकप्रियता केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं रह गई है। खाटू श्यामजी, जीण माता, शाकंभरी माता और हर्ष पर्वत मिलकर धीरे-धीरे एक धार्मिक पर्यटन परिपथ का रूप ले रहे हैं।

वहीं, पड़ोसी जिले चूरू का प्रसिद्ध सालासर बालाजी मंदिर भी शेखावाटी क्षेत्र से होकर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सीकर की अहमियत बढ़ा रहा है। इससे सीकर तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने के साथ-साथ आगे की यात्रा के प्रमुख पड़ाव के रूप में उभर रहा है। सीकर के जिलाधिकारी आशीष मोदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘धार्मिक पर्यटन की वजह से सीकर की लोकप्रियता बढ़ रही है और राज्य सरकार पर्यटन परिपथ विकसित करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।’’ उन्होंने बताया कि खाटू श्यामजी, जीण माता, शाकंभरी माता और करीब 1,200 वर्ष पुराने शिव मंदिर वाला हर्ष पर्वत जिले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन ने हर्ष पर्वत को पारिस्थितिकी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राजस्थान सरकार को भेजा है। राज्य सरकार के जनवरी से जून तक के पर्यटन आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के पहले छह महीनों में राजस्थान में कुल 10.9 करोड़ पर्यटक आए जिनमें 10.8 करोड़ घरेलू पर्यटक रहे, जबकि विदेशी पर्यटक की संख्या महज 8.4 लाख रही। विदेशी पर्यटकों की तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है।

विदेशी पर्यटकों के मामले में जयपुर काफी आगे है। जनवरी से जून के दौरान जयपुर में 2.5 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। इसके बाद उदयपुर में 1.84 लाख, जोधपुर में 82,846 और जैसलमेर में 66,433 विदेशी पर्यटक पहुंचे।

इन आंकड़ों से राजस्थान के पर्यटन की दो अलग-अलग धाराएं साफ दिखाई देती हैं। एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका विरासत, राजमहलों, वन्यजीव और रेगिस्तानी पर्यटन का परंपरागत परिपथ है, तो दूसरी ओर घरेलू पर्यटकों के बीच तेजी से फैल रहा धार्मिक पर्यटन है। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक देवेंद्र चौधरी ने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र में पर्यटन तेजी से विकसित हो रहा है।

सीकर का प्रभार संभाल रहे चौधरी ने कहा, “पहले शेखावाटी की पहचान मुख्य रूप से अपनी हवेलियों के लिए थी। अब बड़ी संख्या में पर्यटक सीकर के धार्मिक स्थलों का रुख भी कर रहे हैं। सड़क संपर्क अच्छा है और सालासर बालाजी जाने वाले लोग भी सीकर से होकर गुजरते हैं।” जयपुर के टूर ऑपरेटर भी पर्यटकों की बदलती पसंद को महसूस कर रहे हैं।

‘राजपूताना हॉलिडे मेकर’ के संचालक संजय कौशिक ने बताया कि जयपुर आने वाले कई पर्यटक अब अपने यात्रा कार्यक्रम में सीकर को भी शामिल करने लगे हैं। इनमें ज्यादातर लोग खाटू श्यामजी और दूसरे मंदिरों के दर्शन के लिए सीकर जाते हैं। हालांकि, उन्होंने एक ऐसी चुनौती की ओर इशारा किया जो यह तय कर सकती है कि पर्यटकों की इतनी बड़ी संख्या से सीकर को वास्तव में कितना आर्थिक लाभ मिलता है।

कौशिक ने कहा, “फिलहाल ज्यादातर लोग यहां केवल एक दिन के लिए आते हैं।” खाटू में भी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने और उनके लंबे समय तक नहीं रुकने का यह अंतर साफ दिखाई देता है। खाटू स्थित ‘श्याम लीला’ होटल के संचालक आर.के. जैन ने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ी है और यह सिलसिला लगातार जारी है। लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में पर्यटकों की इस भारी संख्या से मिलने वाला आर्थिक लाभ पूरी तरह हासिल नहीं हो पा रहा है।

जैन ने कहा, “पर्यटकों की भारी भीड़ के बावजूद सुविधाओं में सुधार नहीं हो रहा है। बिजली की आपूर्ति भी एक समस्या है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए उचित बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है, तभी यहां की पर्यटन संभावनाओं का पूरा लाभ उठाया जा सकेगा।” इस बढ़ती पर्यटक आवाजाही ने अब जिले के आतिथ्य क्षेत्र का स्वरूप भी बदलना शुरू कर दिया है।

होटल उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या और धार्मिक यात्रा के साथ परिवार के साथ घूमने की प्रवृत्ति बढ़ने से सीकर और खाटू के आसपास नए होटल और रिजॉर्ट खुल रहे हैं। जयपुर स्थित ‘आर्या हॉस्पिटैलिटी’ के प्रबंध निदेशक एवं ‘होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान’ के पूर्व अध्यक्ष तरुण बंसल ने कहा कि धार्मिक पर्यटन इस क्षेत्र में होटल और आतिथ्य क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कारक बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘धार्मिक पर्यटन बढ़ रहा है और सीकर में नए होटल खुल रहे हैं।

जयपुर आने वाले लोग भी अब खाटू श्यामजी और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए सीकर का रुख अधिक करने लगे हैं।’’ सीकर के पर्यटन विस्तार में एक और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है-धार्मिक स्थलों पर होने वाली ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’। राजस्थान में अब तक ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का चलन मुख्य रूप से उदयपुर, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के राजमहलों, विरासत संपत्तियों और आलीशान होटलों के आसपास केंद्रित रहा है। हालांकि, पर्यटन अधिकारियों का कहना है कि अब खाटू श्यामजी भी ऐसे परिवारों को आकर्षित करने लगा है, जो शादी के साथ धार्मिक आस्था को भी जोड़ना चाहते हैं।

चौधरी ने कहा, ‘‘खाटू में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ में बढ़ोतरी हुई है। लोग अब शादी के लिए धार्मिक स्थलों को अधिक पसंद करने लगे हैं।’’ ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ ऐसी शादी को कहा जाता है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार अपने शहर या निवास स्थान से दूर किसी खास जगह पर जाकर विवाह समारोह आयोजित करते हैं। आमतौर पर इसके लिए ऐतिहासिक स्थल, समुद्र तट, पहाड़ी क्षेत्र, राजमहल, होटल या धार्मिक स्थल जैसे आकर्षक स्थान चुने जाते हैं।

उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यह नया चलन खाटू और उसके आसपास रिजॉर्ट, विवाह स्थल, होटल, खानपान और आतिथ्य से जुड़े अन्य कारोबारों के लिए एक नया बाजार खोल सकता है। आलीशान होटलों और ऐतिहासिक विरासत को केंद्र में रखकर होने वाली पारंपरिक ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के विपरीत यहां आकर्षण का केंद्र आस्था है। परिवार किसी देवी-देवता के साय में विवाह समारोह आयोजित कर सकते हैं और उत्सव के साथ उनका आशीर्वाद भी ले सकते हैं।

छह महीनों में 1.56 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटकों के पहुंचने के बावजूद तीर्थयात्रियों का एक बड़ा वर्ग अब भी केवल एक दिन के लिए आता है। ऐसे में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बेहतर आवास, जन सुविधाओं और पर्यटन ढांचे के विकास से पर्यटकों को अधिक समय तक रोकने में मदद मिल सकती है। इससे स्थानीय कारोबार और अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

हर्ष पर्वत इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है जहां प्राचीन शिव मंदिर और धार्मिक महत्व के अलावा पारिस्थितिकी पर्यटन की भी संभावनाएं हैं। अधिकारियों का मानना है कि इसे विकसित करने से सीकर के मुख्य रूप से धार्मिक पर्यटन पर आधारित परिपथ में प्रकृति और पर्यावरण से संबंधित एक नया आकर्षण जोड़ा जा सकता है।

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Tashkent में PM Modi का दिखा अलग अंदाज, लोगों के साथ किया योग और फिर ली सेल्फी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दो दिवसीय उज्बेकिस्तान दौरे पर हैं। रविवार को ताशकंद में उनका एक अलग अंदाज देखने को मिला। पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन की ओर से आयोजित एक खास योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों और योग साधकों के साथ योग किया। पीएम मोदी ने खुद भी योगाभ्यास किया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों को योग के अलग-अलग अभ्यास कराए।

योग कार्यक्रम में दिखा लोगों में उत्साह

ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी विशेष योग सत्र में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उज्बेकिस्तान के कई योग साधकों ने भी हिस्सा लिया। योग सत्र के दौरान लोगों में काफी उत्साह नजर आया। पीएम मोदी ने प्रतिभागियों के साथ योग किया और उन्हें योग के अभ्यास कराते भी दिखाई दिए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों के साथ सेल्फी ली।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, “Uzbekistan loves Yoga!” यानी ‘उज्बेकिस्तान योग से प्यार करता है।’

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पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को दी बधाई

कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों की तारीफ करते हुए कहा, “आप लोगों ने बहुत बढ़िया योग किया।” उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को भी बधाई दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर योग कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं।

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उज्बेकिस्तान की योग में बढ़ती भागीदारी का किया जिक्र

पीएम मोदी ने बताया कि इस साल की शुरुआत में अहमदाबाद में पहली वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप आयोजित की गई थी, जिसमें उज्बेकिस्तान ने भी गर्व के साथ हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले कुछ खिलाड़ी भी ताशकंद के इस कार्यक्रम में मौजूद थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये खिलाड़ी भारत और चैंपियनशिप से शानदार यादें लेकर लौटे हैं। उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाने की दिशा में किए जा रहे काम के लिए उज्बेकिस्तान योग महासंघ की भी सराहना की।

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