जयपुर- NEET PG के दौरान हंगामा, बार-बार बंद हुए कंप्यूटर:दावा- 2 घंटे में 10 बार पेपर रुका; सेंटर पर फिर से होगी परीक्षा
जयपुर में NEET PG-2026 परीक्षा के सीतापुरा के ION डिजिटल जोन सेंटर के एक केंद्र पर हंगामा हो गया। कैंडिडेट्स ने आरोप लगाया कि कंप्यूटर बार-बार बंद हुए, जिससे परीक्षा प्रभावित हुई। दो घंटे में 10 बार तक एग्जाम बाधित हुआ। छात्रों ने पेपर लीक की भी आशंका जताई है। परीक्षा खत्म होने के बाद से सैकड़ों की संख्या में परीक्षार्थी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। हंगामा बढ़ता देख इस सेंटर की परीक्षा कैंसिल कर दी गई है। इस केंद्र पर अब 5 सितंबर को फिर से परीक्षा होगी। सबसे पहले देखिए- हंगामे से जुड़े PHOTOS 9 बजे की परीक्षा 10 बजे शुरू होने का आरोप छात्रों के अनुसार, परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होनी थी, लेकिन इसे करीब 10 बजे शुरू किया गया। बार-बार बंद होने के बाद कुछ कंप्यूटर्स को फिर से स्टार्ट करने के बाद स्क्रीन पर 3 से 4 सवाल ही दिखाई दिए। जबकि कुछ छात्रों के सिस्टम पर 5 से 6 सवाल आने के बाद फिर कंप्यूटर बंद हो गए। छात्रों का आरोप है कि सेंटर के स्टाफ ने तो तकनीकी खराबी का कोई कारण नहीं बताया। FIR की धमकी देने का आरोप विरोध कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया- पुलिस से मामले की शिकायत की तो विरोध प्रदर्शन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। छात्रों का दावा है कि उनसे कहा गया कि यदि वे बाहर प्रदर्शन जारी रखते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। पेपर लीक का शक जताया, जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग विरोध कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान बार-बार सिस्टम बंद होने और अलग-अलग कंप्यूटरों पर सवाल दिखाई देने के बाद उन्हें परीक्षा की गोपनीयता को लेकर भी संदेह है। छात्रों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि परीक्षा की गोपनीयता या निष्पक्षता से समझौता होने की पुष्टि होती है तो परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से आयोजित किया जाए।
भारत में ध्रुवीकरण की राजनीति करने वालों को मोहन भागवत का बड़ा मैसेज, न्यूयॉर्क में क्या बोले संघ प्रमुख
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम संबंधों, विविधता और इंसानी गरिमा पर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता. भागवत ने कहा कि भारत की पहचान एकता में विविधता की है और इसे भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहार से दुनिया के सामने रखना होगा. उन्होंने राजनीति को स्वार्थ का खेल बताते हुए सामाजिक स्तर पर संवाद और सेवा से बदलाव शुरू करने की बात कही. उनका यह मैसेज दरअसल भारत ध्रुवीकरण की राजनीति करने वालों के लिए साफ था.
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