सोने-चांदी पर फिर मंडराया मंदी का साया: हफ्ते भर में सोने में 3.79% तो चांदी में 4% की बड़ी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और अपेक्षा से अधिक मजबूत आर्थिक आंकड़ों के चलते कीमती धातुओं की कीमतों में इस सप्ताह दबाव बना रहा. सप्ताह भर के कारोबार में सोने की कीमतों में लगभग 1.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, तो वहीं चांदी में कमजोरी देखने को मिली.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव शुक्रवार (28 अगस्त) को 1,56,281 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो करीब 2,600 रुपए यानी 1.6 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. वहीं इससे पहले हफ्ते शुक्रवार (21 अगस्त) को यह सोना 1,62,438 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, यानी एक हफ्ते में एमसीएक्स पर सोने का भाव 6,157 रुपए यानी 3.79 प्रतिशत गिर गया है. वहीं चांदी की बात करें तो एमसीएक्स पर बीते शुक्रवार (28 अगस्त) को सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 4,000 रुपए से ज्यादा यानी करीब 1.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,36,704 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई. वहीं इससे पहले हफ्ते शुक्रवार (21 अगस्त) को यह चांदी 2,36,704 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, यानी एक हफ्ते में चांदी का रेट 9,893 रुपए यानी 4.01 प्रतिशत गिर गया.
वहीं इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार, बाते शुक्रवार (28 अगस्त) को 999 प्यूरिटी वाले सोने का भाव 1,59,578 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि इससे पहले हफ्ते गोल्ड का रेट 1,60,620 रुपए प्रति 10 ग्राम था। यानी एक हफ्ते में सोने का भाव 1,042 रुपए यानी 0.64 प्रतिशत कम हो गया है।
वहीं, आईबीजेए के अनुसार, शुक्रवार (28 अगस्त) को 999 प्यूरिटी वाली चांदी का रेट 2,43,892 रुपए प्रति किलोग्राम रहा, जबकि इससे पहले हफ्ते शुक्रवार (21 अगस्त) को यह चांदी 2,46,630 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी. यानी एक हफ्ते में चांदी का रेट 2,738 रुपए यानी 1.12 प्रतिशत गिर गया. विशेषज्ञों के अनुसार, बाजारों ने जुलाई के अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श के जैक्सन होल सम्मेलन में दिए गए पहले भाषण को सख्त मौद्रिक नीति के संकेत के रूप में देखा. इससे निवेशकों की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव आया और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी पर दबाव बढ़ गया. शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 1.63 प्रतिशत गिरकर 1,56,400 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 1.66 प्रतिशत फिसलकर 2,36,651 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी.
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव शुक्रवार को 1,59,578 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि सप्ताह की शुरुआत में सोमवार को यह 1,62,603 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था. इससे स्पष्ट है कि सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है. सप्ताह के शुरुआती दिनों में सोने में तेज तेजी देखने को मिली थी। अमेरिकी मुद्रा के अवमूल्यन को लेकर बढ़ती चिंताओं और लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड को लेकर संभावित सरकारी समर्थन की खबरों से सोना कई महीनों के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. लेकिन बाद में मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने बाजार की दिशा बदल दी. अमेरिका में जुलाई की पीसीई मुद्रास्फीति दर 3.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो बाजार की अपेक्षाओं से अधिक थी. इसके साथ ही रोजगार और व्यापार से जुड़े आंकड़ों ने भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दिया. इससे निवेशकों को लगा कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है.
फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के भाषण के बाद बाजार में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बड़ा बदलाव आया. विश्लेषकों के अनुसार, उनके भाषण के कुछ ही मिनटों के भीतर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 70 डॉलर प्रति औंस तक गिर गया, हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी देखने को मिली. चांदी ने भी सप्ताह के दौरान शुरुआती बढ़त गंवा दी. बाजार सहभागियों के बीच अब यह धारणा मजबूत हुई है कि सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. यही कारण है कि निवेशकों ने सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश साधनों में मुनाफावसूली की. उधर, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी सोने को सीमित समर्थन ही दिया. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कूटनीतिक प्रगति के संकेतों के बाद तेल की कीमतों में हाल की ऊंचाइयों से गिरावट आई, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कुछ कमी आई.
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड के लिए 4,600 डॉलर से 4,630 डॉलर प्रति औंस का स्तर निकटतम प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है. वहीं 4,500 डॉलर से 4,470 डॉलर प्रति औंस का क्षेत्र महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान कर सकता है. घरेलू बाजार में एमसीएक्स सोने के लिए 1,59,200 रुपए से 1,60,000 रुपए प्रति 10 ग्राम का क्षेत्र प्रमुख प्रतिरोध माना जा रहा है। दूसरी ओर 1,56,200 रुपए से 1,55,500 रुपए का दायरा तत्काल समर्थन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी ब्याज दरों, मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीति से जुड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है और ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना बढ़ती है, तो सोने पर निकट अवधि में दबाव जारी रह सकता है.
Input: IANS
इजरायल ने फिर दी ईरान को धमकी, अमेरिका से डील होने पर भी हमला करने की चेतावनी
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी भारी तनाव बना हुआ है. इस बीच इजरायल ने ईरान को फिर से धमकी दी है. इजरायल का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच डील हो भी गई तब भी तेहरान पर हमला किया जाएगा. दरअसल, इजरायल के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिका डील भी कर ले, तो भी इजरायल ईरान पर दोबारा हमला करेगा.
इजरायल ने ईरान को दी हमले की चेतावनी
दरअसल, इजराइल के ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि अगर ईरान अपने न्यूक्लियर या बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को फिर से शुरू करने की कोशिश करता है, तो इजरायल उस पर दोबारा हमला करेगा, भले ही तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई समझौता हो जाए. शनिवार को इजराइली न्यूज साइट Ynet को दिए एक इंटरव्यू में एली कोहेन से ईरान के साथ युद्ध के बारे में पूछा गया, तब ये बात कही.
उन्होंने कहा, "अगर ईरान गलती करता है और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम या बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को फिर से शुरू करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका के साथ समझौता होने के बावजूद हम उस पर हमला करेंगे."
कोहेन ने कहा कि अगर इजरायल ने हमला न किया होता तो ईरान न्यूक्लियर हथियार हासिल कर चुका होता, और इजरायली इंटेलिजेंस का अनुमान है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने इस प्रोग्राम को दो से चार साल पीछे धकेल दिया है. उन्होंने कहा, "हमने अपनी क्षमताएं पहले ही साबित कर दी हैं."
हम अमेरिकी प्रतिबंधों को का डटकर करेंगे सामना- ईरान
वहीं ईरानी सरकार का कहना है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों का डटकर सामना करेगी और अपने हितों की रक्षा के लिए कूटनीति और रक्षा, दोनों पर समान रूप से निर्भर रहेगी. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर उसका मजबूत नियंत्रण है. उसने अमेरिकी नेताओं पर आरोप लगाया है कि वे ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित करने के लिए इस रास्ते के बारे में गलत बयान फैला रहे हैं. व्हाइट हाउस ने अल जजीरा को बताया है कि अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह से लागू है. उसने दोहराया कि जलडमरूमध्य खुला है और वहां कोई बारूदी सुरंग (माइन) नहीं है, जबकि वाशिंगटन की ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है.
डेमोक्रेटिक सीनेटर ने की ट्रंप की आलोचना
वहीं दूसरी ओर डेमोक्रेटिक अमेरिकी सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने ट्रंप को "अमेरिकी इतिहास का अब तक का सबसे भ्रष्ट राष्ट्रपति" कहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप से जुड़ी बड़ी तेल कंपनियों को ईरान के साथ हुए युद्ध से फायदा हुआ है. मैसाचुसेट्स के एक जूनियर सीनेटर के लिए आयोजित चुनावी रैली में उन्होंने कहा, "तो सवाल यह उठता है कि हम इसके बारे में क्या करें? जब डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्ध शुरू करते हैं और उनके तेल उद्योग से जुड़े दोस्त- जिन्होंने उनके चुनाव प्रचार के लिए दस लाख डॉलर दिए थे बेहिसाब मुनाफा कमाने लगते हैं, तो हमारा काम है कि हम इसके खिलाफ़ आवाज उठाएं और लड़ें. हम यही करते हैं."
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बता दें कि आरोप के घेरे में आईं अमेरिकी तेल कंपनियों ने युद्ध शुरू होने के बाद से भारी मुनाफ़ा कमाया है, जिसकी आलोचना ट्रंप ने भी इस महीने की शुरुआत में की थी. सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की वित्तीय जानकारी के खुलासे से पता चलता है कि वे तेल और प्राकृतिक गैस कंपनियों के शेयर लगातार खरीदते और बेचते रहे हैं. व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप इन सौदों में शामिल नहीं हैं. वॉरेन ने कहा, "क्या आप पेट्रोल की कीमतें कम करना चाहते हैं? ईरान में युद्ध खत्म करें. बस इसे खत्म करें."
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