South Carolina में घरेलू विवाद पर पहुंची पुलिस पर हमला, एक अधिकारी और संदिग्ध की मौत
अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में घरेलू विवाद की सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर की गई ‘‘गोलीबारी’’ में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। कोलंबिया के पुलिस प्रमुख डब्ल्यू. एच. स्किप होलब्रुक ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 33 वर्षीय संदिग्ध हमलावर भी मारा गया है।
उसका कई राज्यों में लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। गोलीबारी की घटना का तब पता चला जब शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक महिला ने पुलिस को फोन कर बताया कि एक व्यक्ति उसके घर में संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है। महिला ने उस व्यक्ति के खिलाफ अदालत से प्रतिबंधात्मक आदेश ले रखा था।
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एक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि संदिग्ध फरार हो चुका है। महिला ने अधिकारी को संदिग्ध व्यक्ति का हुलिया और उसके वाहन की पहचान बताई।
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होलब्रुक ने बताया कि पूर्वाह्न करीब साढ़े 10 बजे अधिकारी को महिला द्वारा बताए गए हुलिए से मेल खाता एक व्यक्ति और एक वाहन दिखा। इसके बाद उन्होंने रेडियो पर संदिग्ध व्यक्ति के बारे में सूचना दी। सहायता के लिए एक दूसरा अधिकारी भी मौके पर पहुंचा।
कुछ ही मिनट बाद उसने रेडियो पर संदेश दिया कि ‘‘अधिकारियों को गोली लगी है और संदिग्ध को मार गिराया है।’’ गोलीबारी में मारे गए 29 वर्षीय पुलिस अधिकारी के बारे में होलब्रुक ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से विभाग में कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज की शाम हम सभी के लिए काफी पीड़ादायक है।’’ उन्होंने बताया कि घायल अधिकारी की हालत स्थिर बनी हुई है।
कोर्ट से ट्रंप प्रशासन को झटका, Israel-Gaza पर बोलने वालों को डिपोर्ट नहीं कर सकेंगे अमेरिकी प्रेजिडेंट
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की उस कार्रवाई को संविधान के खिलाफ बताया है, जिसमें इजरायल के गाजा युद्ध की आलोचना करने और अन्य राजनीतिक विचार रखने वाले गैर-अमेरिकी नागरिकों को डिपोर्ट करने का मामला सामने आया था।
कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला जज नोएल वाइज ने कहा कि सरकार की कार्रवाई से संविधान में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (First Amendment) और कानूनी प्रक्रिया के अधिकार (Fifth Amendment) को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने डिपोर्टेशन की कार्रवाई में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया।
स्टैनफोर्ड के छात्र अखबार को मिली बड़ी जीत
यह फैसला स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र अखबार की ओर से दायर मुकदमे में आया। अखबार ने तर्क दिया था कि ट्रंप प्रशासन की डिपोर्टेशन नीतियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच डर का माहौल बन गया है।
अखबार के मुताबिक, कई अंतरराष्ट्रीय छात्र सार्वजनिक तौर पर अपनी राय रखने से डर रहे थे, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि ऐसा करने पर उन्हें अमेरिका से बाहर भेजा जा सकता है।
मुकदमा दायर करने वाली संस्था फायर (Foundation for Individual Rights and Expression) के वकील कॉनर फिट्जपैट्रिक ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ उन लोगों के लिए नहीं है, जिनकी बात से सरकार सहमत हो।
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अभिव्यक्ति और प्रेस की आजादी लोकतंत्र की नींव
जज नोएल वाइज ने अपने फैसले में कहा कि भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता अमेरिका के लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने सरकार की उन कार्रवाइयों का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल की कार्रवाई की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ बदले की कार्रवाई के तौर पर देखा।
उन्होंने उन लोगों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का भी उल्लेख किया, जिन्होंने चार्ली किर्क की आलोचना की थी। चार्ली किर्क टर्निंग पॉइंट यूएसए के सह-संस्थापक थे और पिछले सितंबर में उनकी हत्या कर दी गई थी।
आज या कल निशाना कोई भी बन सकता है
जज वाइज ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ऐसे लोगों को निशाना बनाती रही जिनकी राय उसे पसंद नहीं है, तो आगे चलकर अमेरिका में कोई भी व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।
उन्होंने कहा कि आज या कल उन लोगों को भी निशाना बनाया जा सकता है जो सिर्फ ऐसी राय रखते हैं, जिसे सरकार पसंद नहीं करती। जज ने कहा कि इस तरह की स्थिति संविधान की उस भावना के खिलाफ है, जो लोगों को खुलकर बोलने का अधिकार देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की राय से किसी को बहुत ज्यादा असहमति हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद उसके अपनी बात कहने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
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करीब एक साल पुराने फैसले की तरह ही है आदेश
कैलिफोर्निया के इस फैसले में करीब एक साल पहले बोस्टन की एक संघीय अदालत के दिए गए फैसले जैसी ही बात कही गई है। उस मामले में भी अदालत ने माना था कि ट्रंप प्रशासन ने फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल की आलोचना करने के आधार पर गैर-अमेरिकी नागरिकों को डिपोर्ट करने की कोशिश करके संविधान का उल्लंघन किया था।
इस फैसले से स्टैनफोर्ड के छात्र अखबार और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है, क्योंकि इससे राजनीतिक विचार रखने के कारण डिपोर्टेशन के डर से जुड़ी चिंताओं को राहत मिल सकती है।
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