Term Insurance: क्या सिर्फ टर्म इंश्योरेंस काफी है? जानिए कब दूसरी लाइफ इंश्योरेंस जरूरी
लाइफ इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही होता है कि क्या सिर्फ टर्म इंश्योरेंस लेना काफी है या इसके साथ कोई दूसरी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी भी होनी चाहिए? बाजार में टर्म प्लान, एंडोमेंट, मनी-बैक पॉलिसी, ULIP और कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में सही चुनाव करना आसान नहीं होता।
ज्यादातर कामकाजी लोगों और उन परिवारों के लिए जहां दूसरे सदस्य कमाने वाले व्यक्ति की आय पर निर्भर हैं, टर्म इंश्योरेंस को जीवन बीमा की पहली जरूरत माना जाता है। इसका उद्देश्य निवेश या रिटर्न देना नहीं, बल्कि कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना है।
टर्म इंश्योरेंस का काम क्या है?
मान लीजिए परिवार में एक व्यक्ति मुख्य कमाने वाला है। उस पर होम लोन, बच्चों की पढ़ाई और माता-पिता की जिम्मेदारी है। अगर उसकी अचानक मृत्यु हो जाती है तो परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी आय की भरपाई करना होती।
टर्म इंश्योरेंस इसी जोखिम को कवर करता है। इसमें बीमा और निवेश को अलग रखा जाता है, इसलिए इसका प्रीमियम आमतौर पर कई पारंपरिक जीवन बीमा उत्पादों की तुलना में कम होता है। इसी वजह से समान प्रीमियम में ज्यादा बीमा राशि लेना संभव हो सकता है।
क्या एंडोमेंट या दूसरी पॉलिसी टर्म प्लान की जगह ले सकती?
एंडोमेंट या सेविंग्स से जुड़ी बीमा पॉलिसी उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो बीमा के साथ बचत या निश्चित रिटर्न चाहते हैं। लेकिन इन्हें पर्याप्त लाइफ कवर का विकल्प मानना सही नहीं होगा।
ऐसी पॉलिसियों में मिलने वाला लाइफ कवर कई मामलों में टर्म प्लान की तुलना में कम हो सकता। इसलिए बीमा और निवेश को अलग-अलग वित्तीय फैसलों के तौर पर देखना बेहतर है। परिवार की सुरक्षा के लिए पर्याप्त बीमा और भविष्य के लक्ष्यों के लिए अलग निवेश-दोनों की जरूरत हो सकती है।
कब दूसरी पॉलिसी रखना सही हो सकता?
कुछ लोगों के पास पहले से एंडोमेंट या दूसरी जीवन बीमा पॉलिसी होती है, जिसे वे जारी रखना चाहते हैं। इसी तरह नौकरी से मिलने वाला ग्रुप लाइफ कवर भी व्यक्तिगत टर्म प्लान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि नौकरी बदलने पर यह कवर खत्म हो सकता है।
अगर होम लोन बढ़ गया है, परिवार में बच्चा आया है या आय में बड़ा इजाफा हुआ है, तो मौजूदा लाइफ कवर की समीक्षा करनी चाहिए। सिर्फ इसलिए नई पॉलिसी खरीदना जरूरी नहीं है कि दूसरी पॉलिसी पहले से मौजूद है।
हर कुछ साल में बीमा कवर की समीक्षा जरूरी
शादी, बच्चों की जिम्मेदारी, बढ़ता कर्ज और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल जैसी परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं। इसलिए लाइफ इंश्योरेंस भी एक बार खरीदकर भूल जाने वाली चीज नहीं है।
सबसे अहम सवाल यह होना चाहिए कि अगर कल आपकी मृत्यु हो जाए तो क्या परिवार के पास अपनी मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने और भविष्य के खर्च पूरे करने के लिए पर्याप्त पैसा होगा? ज्यादातर परिवारों के लिए टर्म इंश्योरेंस वित्तीय सुरक्षा की बुनियाद हो सकता है। दूसरी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी तभी लेनी चाहिए जब उसका कोई स्पष्ट वित्तीय उद्देश्य हो।
आसान सवाल-जवाबों में समझें टर्म इंश्योरेंस से जुड़ी सारी जानकारी
सवाल: क्या ज़्यादातर परिवारों के लिए टर्म इंश्योरेंस काफ़ी है?
जवाब: कई परिवारों के लिए, एक सही साइज़ की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लाइफ़ इंश्योरेंस प्रोटेक्शन का मुख्य हिस्सा होती है क्योंकि यह काफ़ी सस्ते प्रीमियम पर ज़्यादा सम एश्योर्ड देती है।
सवाल: क्या मुझे टर्म इंश्योरेंस के साथ एंडोमेंट प्लान खरीदना चाहिए?
जवाब: यह आपके फ़ाइनेंशियल लक्ष्यों पर निर्भर करता है। अगर आप बचत या गारंटीड रिटर्न ढूंढ रहे हैं, तो सिर्फ़ इंश्योरेंस के लिए खरीदने के बजाय प्रोडक्ट को ध्यान से देखें।
सवाल: क्या एम्प्लॉयर द्वारा दिया गया लाइफ़ इंश्योरेंस काफ़ी है?
जवाब: एम्प्लॉयर ग्रुप कवर मददगार हो सकता है, लेकिन यह काफ़ी नहीं हो सकता है और आमतौर पर आपकी नौकरी से जुड़ा होता है। कई लोग इंडिविजुअल टर्म प्लान भी खरीदते हैं।
सवाल: मुझे अपने लाइफ़ इंश्योरेंस कवर का रिव्यू कब करना चाहिए?
जवाब: शादी, बच्चे का जन्म, होम लोन लेना या इनकम में काफ़ी बढ़ोतरी जैसी ज़िंदगी की बड़ी घटनाओं के बाद इसका रिव्यू करें ताकि यह चेक किया जा सके कि मौजूदा कवर अभी भी काफ़ी है या नहीं।
(प्रियंका कुमारी)
Russia को Petrol Export में भारत बना प्रमुख आपूर्तिकर्ता, दो माह में भेजे 10 लाख बैरल
यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूस की रिफाइनरी में ईंधन उत्पादन प्रभावित होने के बीच भारत, रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। जहाज निगरानी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। ऊर्जा विश्लेषक कंपनी वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस का समुद्री रास्ते से पेट्रोल आयात करीब 1,25,000 बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड पर पहुंच गया।
यह पूरे माह के लिए लगभग 4.7 लाख टन के बराबर है। रूस की रिफाइनरी पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों से घरेलू ईंधन उत्पादन में भारी गिरावट आई है। व्यापार सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरी इकाइयों ने पिछले दो माह में रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल की आपूर्ति की है।
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इसमें मुख्य भूमिका गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी की रही है, जिसका संचालन नयारा एनर्जी करती है। नयारा एनर्जी में रूस की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी रोसनेफ्ट की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
जून और जुलाई में भारत ने प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक रूसी कच्चा तेल आयात किया, जो फरवरी में करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा। ऐसी संभावना है कि रूस को निर्यात किया गया कुछ पेट्रोल भी रूसी कच्चे तेल से ही भारत में तैयार किया गया हो।
इस तरह रूस से भारत आने वाला कच्चा तेल शोधन के बाद पेट्रोल के रूप में वापस रूस पहुंच रहा है। रूस दुनिया के बड़े कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल है, लेकिन यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण उसकी रिफाइनिंग क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। घरेलू पेट्रोल उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट के चलते रूस को अब इसका आयात करना पड़ रहा है।
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इसके साथ ही देश में ईंधन बिक्री पर भी अंकुश जारी हैं। वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले देशों में भारत, तुर्किये और मोरक्को शामिल रहे। रूस ने जुलाई में पेट्रोल के निर्यात पर लागू पूर्ण प्रतिबंध को उत्पादकों और गैर-उत्पादकों दोनों के लिए जनवरी, 2027 के अंत तक बढ़ा दिया था।
डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध भी एक सितंबर, 2026 तक बढ़ाया गया है। रूस के अगस्त के पेट्रोल आयात में करीब 55 प्रतिशत, यानी लगभग 2.6 लाख टन, ऐसा माल था जिसे प्रतिबंधित जहाजों के जरिये पहुंचाया गया। वॉर्टेक्सा के मुताबिक, अगस्त में भारत से रूस पहुंचने वाले पेट्रोल के सभी कार्गो प्रतिबंधित बेड़े के जहाजों पर लाए गए और भूमध्यसागर में जहाज-से-जहाज (एसटीएस) हस्तांतरण के जरिये रूस पहुंचे।
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रूस के अगस्त में कुल पेट्रोल आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जहाज-से-जहाज हस्तांतरण के जरिये पहुंचा। इनमें अधिकांश हस्तांतरण के दौरान जहाजों ने अपना स्वचालित पहचान तंत्र (एआईएस) बंद रखा। इस बीच, रूस के डीजल निर्यात पर भी भारी असर पड़ा है।
वॉर्टेक्सा के अनुसार, 25 अगस्त तक अगस्त में रूस का समुद्री डीजल/गैसऑयल निर्यात करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है। मासिक आधार पर यह स्थिर रहा है, लेकिन एक साल पहले की समान अवधि के आंकड़े 6.10 लाख बैरल प्रतिदिन से काफी कम है। साथ ही यह पांच साल के औसत स्तर से 81 प्रतिशत कम हैं वॉर्टेक्सा के अनुसार, जुलाई और अगस्त में रूसी की रिफाइनरी पर करीब 32 हमले हुए हैं।
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