PPF की सरकारी गारंटी या SIP की ज्यादा कमाई:₹10 हजार की मंथली बचत पर समझें रिस्क-रिटर्न का गणित; एक्सपर्ट्स ने बताया 70:30 का फॉर्मूला
अगर आप हर महीने 10 हजार रुपए की बचत करना चाहते हैं और आपका लक्ष्य अगले 15 साल में बड़ा फंड तैयार करने का हैं, तो आपके सामने दो सबसे पसंदीदा विकल्प हैं। सरकारी गारंटी वाला PPF और दूसरा बाजार आधारित SIP। PPF जहां बिना किसी रिस्क के 100% टैक्स-फ्री रिटर्न की गारंटी देता है, वहीं SIP लॉन्ग टर्म में वेल्थ कंपाउंडिंग के जरिए बड़ा फंड बनाने की ताकत रखती है। आइए 15 साल के रियल कैलकुलेशन और टैक्स कटने के बाद के आंकड़े से समझते हैं कि किसमें कितना फायदा है। राहुल और अमित के उदाहरण से समझें पूरा गणित… मान लीजिए दो दोस्त, राहुल और अमित, 15 साल के लिए हर महीने 10 हजार की बचत करने की योजना बनाते हैं। इस पूरी अवधि में दोनों की जेब से कुल ₹18 लाख का निवेश होगा। 15 साल पूरे होने पर किसके खाते में कितना पैसा आएगा… PPF में अभी 7.1% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज पीपीएफ का रास्ता चुनने वाले राहुल को 15 साल बाद ₹32.54 लाख इन-हैंड मिलेंगे। ये निवेश पूरी तरह सुरक्षित है इसलिए राहुल को पहले ही दिन से पता होगा कि मैच्योरिटी पर कितनी रकम मिलेगी। इक्विटी SIP में 12.5% LTCG टैक्स कटेगा म्यूचुअल फंड में रिटर्न फिक्स नहीं होता, बल्कि यह शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। साथ ही 1 साल से अधिक समय बाद पैसे निकालने पर 12.5% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स कटता है। अमित के निवेश को 3 अलग-अलग रिटर्न स्तरों पर देखें: 1. अगर 8% सालाना रिटर्न मिला 2. अगर 10% सालाना रिटर्न मिला 3. अगर 12% सालाना रिटर्न मिला आपके प्रोफाइल के हिसाब से क्या बेहतर?
Vastu Tips For Money: महीने के अंत तक खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? धन बचाने के लिए आजमाएं ये आसान वास्तु उपाय
Vastu Tips For Money: महीने की शुरुआत में खाते में सैलरी या कारोबार से हुई आमदनी आते ही आर्थिक स्थिति मजबूत महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे महीने के दिन बीतते जाते हैं, खर्च बढ़ने लगता है और आखिर में बचत के लिए बहुत कम पैसा रह जाता है। ऐसी स्थिति का कारण केवल कम आय होना नहीं है। खर्च करने का तरीका, बजट की कमी और पैसों का सही प्रबंधन न कर पाना भी इसके पीछे बड़ी वजह हो सकता है।
इसके साथ ही भारतीय वास्तु परंपरा में घर की साफ-सफाई, दिशा और वस्तुओं की व्यवस्था को भी सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि घर में अनावश्यक सामान और अव्यवस्था रखने से नकारात्मक वातावरण बन सकता है। अगर आप वास्तु की मान्यताओं में विश्वास रखते हैं, तो आर्थिक अनुशासन के साथ कुछ आसान उपाय भी अपना सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
मुख्य दरवाजे को रखें साफ
वास्तु में घर के प्रवेश द्वार को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि घर में ऊर्जा का प्रवेश मुख्य द्वार से होता है। इसलिए दरवाजे के आसपास गंदगी, कूड़ा-कचरा, पुराने जूते, टूटे सामान या कबाड़ जमा करने से बचें। मुख्य द्वार को साफ रखने के साथ वहां पर्याप्त रोशनी का भी ध्यान रखें। दरवाजे के आसपास की अव्यवस्था हटाने से घर व्यवस्थित भी दिखाई देता है और रोजमर्रा के जीवन में साफ-सफाई की आदत मजबूत होती है।
घर से हटाएं बेकार और टूटी वस्तुएं
घर में लंबे समय से पड़ी खराब चीजों को लेकर वास्तु में नकारात्मक मान्यता है। इसलिए ऐसी वस्तुओं की समय-समय पर छंटाई करते रहना चाहिए। टूटे बर्तन, खराब घड़ी, टूटा शीशा, काम न करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऐसे सामान जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें घर में जमा न करें। इससे घर में जगह भी खाली होगी और जरूरी चीजों को व्यवस्थित रखना आसान होगा।
नमक से सफाई की परंपरा
नमक को भारतीय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में नकारात्मकता दूर करने से जोड़ा जाता है। इसी वजह से कई घरों में सप्ताह में एक बार पोछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक मिलाकर सफाई करने की परंपरा है। हालांकि, इस उपाय को धन प्राप्ति या आर्थिक समस्या दूर करने का वैज्ञानिक प्रमाणित तरीका नहीं माना जाता। इसे केवल पारंपरिक वास्तु मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उत्तर दिशा में न रखें कबाड़
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को कुबेर से संबंधित दिशा माना जाता है और इसे धन-संपत्ति के लिए महत्वपूर्ण बताया जाता है। इसलिए इस हिस्से में भारी सामान, बेकार फर्नीचर या अनावश्यक कबाड़ रखने से बचने की सलाह दी जाती है। अगर घर की उत्तर दिशा में काफी सामान जमा है, तो उसकी छंटाई करके जगह को साफ और व्यवस्थित रखा जा सकता है। इससे घर में आने-जाने की जगह भी बेहतर बनी रहती है।
तिजोरी रखने को लेकर क्या है वास्तु मान्यता?
धन और कीमती सामान रखने वाली अलमारी या तिजोरी की दिशा को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। सामान्य तौर पर दक्षिण दिशा की दीवार के पास तिजोरी रखने और उसका दरवाजा उत्तर दिशा की ओर खुलने को शुभ माना जाता है। हालांकि, हर घर का नक्शा और संरचना अलग होती है। इसलिए केवल वास्तु के लिए घर में बड़ा बदलाव करने से पहले किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है। तिजोरी या पैसे रखने वाली जगह को भी साफ-सुथरा रखें। फटे हुए नोट, बेकार कागज, पुरानी रसीदें और अनावश्यक दस्तावेज वहां लंबे समय तक जमा न होने दें।
शाम के समय दीपक जलाने की परंपरा
सनातन परंपरा में संध्या के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शाम के समय दीपक जलाने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने की भावना जुड़ी हुई है। शाम के समय घर को साफ रखना, पूजा स्थल को व्यवस्थित करना और घर में अनावश्यक अंधेरा न रहने देना एक अच्छी घरेलू आदत भी मानी जा सकती है।
सिर्फ वास्तु उपायों पर निर्भर न रहें
वास्तु से जुड़े ये उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आर्थिक समस्या का निश्चित समाधान नहीं माना जा सकता। अगर महीने के अंत में लगातार पैसे की कमी रहती है, तो सबसे पहले अपनी आय और खर्च का हिसाब बनाएं। बजट तैयार करना, गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करना, नियमित बचत करना और जरूरत के अनुसार वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लेना आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में अधिक व्यावहारिक कदम हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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