Raksha Bandhan 2026: कलाई से राखी कब उतारें? जानिए सही समय, विधि और पुरानी राखी का क्या करें
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य तथा लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी बहन की हर परिस्थिति में साथ देने और उसकी रक्षा करने का संकल्प लेता है। राखी को आमतौर पर सिर्फ एक धागा नहीं माना जाता, बल्कि इसे भाई-बहन के बीच स्नेह और सुरक्षा के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। जिस तरह राखी बांधने की विधि और शुभ समय का महत्व बताया गया है, उसी तरह इसे कलाई से उतारने को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि राखी कितने समय तक बांधकर रखनी चाहिए और उतारने के बाद उसका क्या किया जाए। आइए जानते हैं इससे जुड़ी जरूरी बातें।
कलाई से राखी कब उतारनी चाहिए?
धार्मिक परंपराओं में राखी उतारने के समय को लेकर अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग रक्षाबंधन के अगले दिन राखी उतार लेते हैं, जबकि कई परिवारों में इसे कुछ दिनों तक कलाई पर रखने की परंपरा है। कुछ क्षेत्रों में भाई जन्माष्टमी के दिन राखी उतारते हैं, जबकि कहीं-कहीं इसे अनंत चतुर्दशी तक कलाई पर बांधकर रखने की परंपरा भी मिलती है। इसलिए राखी उतारने का नियम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।
पुरानी राखी उतारने के बाद क्या करें?
- राखी को कलाई से निकालने के बाद उसे इधर-उधर फेंकना उचित नहीं माना जाता। धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पुराने रक्षासूत्र को सम्मान के साथ रखने या विसर्जित करने की परंपरा है।
- राखी को किसी साफ और पवित्र स्थान पर कुछ समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
- यदि आपकी पारिवारिक परंपरा हो तो इसे किसी पेड़ की शाखा पर बांधा जा सकता है। कुछ लोग इस दौरान पेड़ के पास सिक्का रखने की परंपरा भी निभाते हैं।
- प्राकृतिक धागे से बनी राखी को नदी, तालाब या अन्य स्वच्छ जल में श्रद्धापूर्वक प्रवाहित किया जा सकता है।
- राखी को बगीचे या किसी साफ स्थान की मिट्टी में दबाने की परंपरा भी कुछ जगहों पर प्रचलित है।
- पूजा से जुड़ी अन्य सामग्री के साथ भी राखी को सम्मानपूर्वक रखा जा सकता है।
- यदि राखी अच्छी स्थिति में है और आपके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, तो उसे लाल या साफ कपड़े में लपेटकर सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है।
राखी उतारते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- राखी उतारने को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। यदि आप इन परंपराओं का पालन करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं।
- भगवान का स्मरण करें: राखी निकालने से पहले ईश्वर का ध्यान करने और मन में सकारात्मक भाव रखने की परंपरा है।
- शुभ समय चुनें: संभव हो तो सुबह या किसी शुभ समय में राखी उतारें। कुछ लोग राहुकाल में राखी उतारने से भी बचते हैं।
- राखी को खींचकर न तोड़ें: इसे अचानक खींचने या काटने के बजाय धीरे और सम्मानपूर्वक कलाई से निकालना बेहतर माना जाता है।
- धातु और प्लास्टिक वाली राखी का ध्यान रखें: ऐसी राखियों को जल में प्रवाहित करने से बचना चाहिए। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए उनका उचित तरीके से निपटान करें।
- परंपरा का सम्मान करें: कुछ परिवारों में मंगलवार और शनिवार को राखी उतारने से बचने की मान्यता है। यदि आपके घर में भी ऐसी परंपरा है तो उसका पालन कर सकते हैं।
क्या राखी को पेड़ के नीचे रख सकते हैं?
कई स्थानों पर पुराने रक्षासूत्र को पेड़ के पास रखने या मिट्टी में दबाने की परंपरा है। यदि ऐसा करते हैं तो जगह साफ होनी चाहिए और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। पीपल, बरगद या तुलसी जैसे पवित्र पौधों से जुड़ी मान्यताएं भी अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं। हालांकि किसी भी धार्मिक सामग्री को सार्वजनिक स्थान पर छोड़ने के बजाय साफ-सफाई और पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है। विशेष रूप से प्लास्टिक, धातु, मोती या अन्य गैर-जैविक सामग्री वाली राखी को जल या मिट्टी में नहीं डालना चाहिए।
राखी उतारने का मुख्य भाव क्या है?
रक्षाबंधन की राखी भाई-बहन के रिश्ते और आपसी स्नेह का प्रतीक है। इसलिए इसे उतारते समय सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और सम्मान का भाव रखना है। राखी को कब उतारना है और उसके बाद क्या करना है, यह काफी हद तक परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं पर निर्भर करता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर बनेंगे कई शुभ संयोग, इन 4 राशियों की होगी बल्ले-बल्ले
Krishna Janmashtami 2026: सितंबर महीने में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से जन्माष्टमी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी इसे खास बना रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार जन्माष्टमी के दिन कई प्रमुख ग्रह अपनी अनुकूल स्थिति में रहेंगे। चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च अवस्था में होंगे, जबकि देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च के रहेंगे। सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में मौजूद होंगे और शुक्र भी अपनी राशि तुला में स्थित रहेंगे। बुध की स्थिति भी अनुकूल रहने वाली है।
इसके अलावा मंगल और शुक्र के बीच नवपंचम योग का निर्माण होगा। इस तरह सात प्रमुख ग्रहों में से पांच ग्रहों की स्थिति शुभ मानी जा रही है। ग्रहों के इन विशेष संयोगों का असर सभी राशियों पर अलग-अलग दिखाई दे सकता है, लेकिन चार राशियों के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों को जन्माष्टमी पर शुभ परिणाम मिलने की संभावना है।
वृषभ राशि
जन्माष्टमी के दिन वृषभ राशि वालों के लिए चंद्रमा की स्थिति बेहद खास रहने वाली है। चंद्रमा आपकी राशि में उच्च अवस्था में रहेंगे, जिससे मन में सकारात्मकता और भावनात्मक संतुलन बढ़ सकता है। लंबे समय से चल रही मानसिक उलझनों से राहत मिलने की संभावना है। परिवार के साथ समय बिताने के लिए भी यह अवसर अच्छा रहेगा। घर में सुखद माहौल बन सकता है और अपनों के साथ संबंधों में मधुरता आएगी। आर्थिक मोर्चे पर भी परिस्थितियां आपके पक्ष में रह सकती हैं। आय के नए साधन मिलने या अचानक किसी स्रोत से धन प्राप्त होने के संकेत मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। स्वास्थ्य के मामले में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुल मिलाकर जन्माष्टमी का यह पर्व आपके लिए सुख, शांति और समृद्धि का संदेश लेकर आ सकता है।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए जन्माष्टमी का दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि गुरु आपकी राशि में उच्च अवस्था में मौजूद होंगे। गुरु की यह स्थिति आत्मविश्वास, ज्ञान, भाग्य और आर्थिक मामलों में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। वहीं चंद्रमा आपके लाभ भाव में उच्च अवस्था में रहेंगे, जिससे आमदनी बढ़ने या लाभ के नए अवसर मिलने की संभावना बन सकती है। सूर्य का धन भाव में होना आर्थिक मामलों में मजबूती देने वाला माना जा सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। व्यापार करने वाले लोगों को भी अच्छे अवसर मिल सकते हैं। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहने की संभावना है। जन्माष्टमी का पर्व आपके लिए उत्साह और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए भी जन्माष्टमी का दिन उपलब्धियों से भरा हो सकता है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति का प्रभाव आपके करियर और कारोबार पर देखने को मिल सकता है। खास तौर पर गुरु की स्थिति आर्थिक लाभ के लिहाज से आपके लिए अच्छी मानी जा सकती है। आय में वृद्धि के नए रास्ते बन सकते हैं और लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना भी है। यदि किसी महत्वपूर्ण काम को लेकर लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं तो उसमें प्रगति दिखाई दे सकती है। कारोबारियों के लिए समय विशेष रूप से अनुकूल रह सकता है। विदेश से जुड़े व्यापार या विदेशी कंपनियों के साथ काम करने वाले लोगों को कोई बड़ा अवसर मिल सकता है। परिवार के सदस्यों के साथ सुखद समय बिताने का मौका मिलेगा। आपकी मेहनत का परिणाम मिलने से मन प्रसन्न रहेगा।
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए जन्माष्टमी का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष हो सकता है। पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यक्रम या आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ सकती है। किसी धार्मिक स्थान की यात्रा की योजना भी बन सकती है। व्यापार करने वालों के लिए समय सकारात्मक रह सकता है। आपकी बनाई हुई योजनाएं सही दिशा में आगे बढ़ सकती हैं और किसी पुराने प्रयास का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरी करने वाले लोगों को भी अपने काम में संतोषजनक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। प्रेम जीवन में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में फिर से अपनापन बढ़ सकता है। विवाहित लोगों के लिए भी समय सुखद रहने के संकेत हैं। संतान से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल बनेगा। स्वास्थ्य के लिहाज से भी समय बेहतर रह सकता है। खुद को ऊर्जावान महसूस करेंगे और जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया मजबूत होगा।
जन्माष्टमी पर क्या करें?
जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की श्रद्धापूर्वक पूजा करना शुभ माना जाता है। भक्त व्रत रखकर भगवान कृष्ण का स्मरण कर सकते हैं और रात में जन्मोत्सव के समय विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है
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