Nepal Floods: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, भोटे कोशी नदी में तेज हुआ बहाव, अलर्ट जारी
Nepal Floods: नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 पहुंच गई है. वहीं प्रभावित इलाकों में अभी भी बचाव अभियान जारी है. इसी बीच, नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव बढ़ने को लेकर नई चेतावनी जारी की है. रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय को नदी में बाढ़ का बहाव बढ़ने की आवाज के बारे में जानकारी मिली है. जिला प्रशासन कार्यालय ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में नदी के आस-पास के इलाकों में लोगों से सतर्क रहने को कहा है.
अब तक 675 लोगों की मौत, 2400 अभी भी लापता
नेपाल में आई बाढ़ में आठ जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. जिनमें मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 675 हो गई है. जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. वहीं राहत बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश और शवों को निकालने में लगा हुआ है. नेपाल पुलिस और बचाव कर्मियों के मुताबिक, चितवन से 246, नवलपरासी पूर्व से 165, नवलपरासी पश्चिम से 63 और गोरखा से 57 शव बरामद किए गए हैं. इसके अलावा धाडिंग से 45, नुवाकोट से 51, तनाहु से 35 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए. 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं.
भोटे कोशी नदी को लेकर नई चेतावनी
NDRRMA ने बताया कि रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय को सूचना मिली थी कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव तेज होने की आवाज सुनी गई है. अधिकारियों ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में नदी के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने को कहा है. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा है कि और जानकारी मिलने पर आगे की अपडेट दी जाएगी. यह चेतावनी उन इलाकों में और बाढ़ आने की आशंका के बीच दी गई है जो पहले से ही इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हैं.
कैसे आई नेपाल में अचानक बाढ़?
बता दें कि बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से हुए बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन (एवलांच) के कारण बाढ़ आ आई. इस घटना से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया, जिससे कई शहर और गांव तबाह हो गए. जबकि जरूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. अचानक आई इस बाढ़ में कई डाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी बह गए.
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नेपाल की तबाही तो बस शुरुआत, जम्मू-कश्मीर के 5 जिलों में लैंडस्लाइड की डरावनी भविष्यवाणी
नेपाल की हालिया तबाही के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है. यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू के वैज्ञानिकों ने करीब 43 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके का लैंडस्लाइड सस्पेक्टिबिलिटी मैप तैयार किया है. स्टडी में 24.4 प्रतिशत क्षेत्र हाई रिस्क और 3.6 प्रतिशत वेरी हाई रिस्क जोन में मिला. डोडा, किश्तवाड़, पुंछ, राजौरी और रामबन सबसे संवेदनशील जिलों में हैं. खास बात यह है कि पुराने 669 लैंडस्लाइड मामलों में 87 प्रतिशत घटनाएं हाई या वेरी हाई रिस्क इलाकों में हुईं. वैज्ञानिकों के मुताबिक भारी बारिश और पहाड़ों की कटिंग खतरा बढ़ा सकती है.
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