लंदन में बोले CJI Surya Kant, सुप्रीम कोर्ट ने Digital Arrest धोखाधड़ी का स्वत संज्ञान लिया है
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते अपराध पर संसद की ओर से कानून बनाए जाने का इंतजार करने के बजाय सक्रियता से प्रतिक्रिया दी है। प्रधान न्यायाधीश ने लंदन में आयोजित 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हाल में ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ धोखाधड़ी का स्वत: संज्ञान लिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध में जालसाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या नौकरशाह बताकर लोगों को ठगते हैं।
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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके जवाब में न्यायालय ने केंद्र व राज्यों को इस समस्या की व्यापकता का आकलन करने का निर्देश दिया और ऐसा अलग अपराध बनाने का आह्वान किया है, जिसमें नुकसान की गंभीरता के अनुरूप दंड का प्रावधान हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका उभरते धोखाधड़ी वाले अपराधों पर सक्रियता से प्रतिक्रिया देती है, न कि संसद द्वारा इस पर कदम उठाए जाने का इंतजार करती है।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए समय के साथ बदलती चुनौतियों को समझना और उनके अनुरूप प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
Bhotekoshi Flood Alert: भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ा; नेपाल में नई जलप्रलय और भारी तबाही की आहट!
नेपाल अभी लांगतांग लिरुंग ग्लेशियर के टूटने से आई भीषण बाढ़ के जख्मों से उबरा भी नहीं था कि भोटेकोशी नदी के उफान ने एक बार फिर खौफ का माहौल बना दिया है। नेपाल और तिब्बत सीमा के ऊपरी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और मलबे के खिसकने से नदी का जलस्तर दोबारा तेजी से बढ़ रहा है।
मौसम विभाग (DHRJ) ने नदी के आसपास के इलाकों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। खतरे को देखते हुए सीमावर्ती रसुवा और नुवाकोट जिलों के तटीय क्षेत्रों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
भोटेकोशी का जलस्तर बढ़ा, नई आपदा की आहट से सहमे लोग
उपग्रह तस्वीरों और जमीनी मॉनिटरिंग के अनुसार, भोटेकोशी नदी में पानी और मलबे का प्रवाह फिर से बढ़ गया है। ऊपरी पहाड़ी हिस्सों में प्राकृतिक रुकावटों के फिर से बनने और टूटने की आशंका जताई जा रही है।
नदी के बढ़ते जलस्तर ने त्रिशूली और भोटेकोशी नदी घाटी के आसपास चल रहे राहत कार्यों में बड़ी बाधा खड़ी कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने लाउडस्पीकर और एनटीसी (NTC) के इमरजेंसी एसएमएस अलर्ट के जरिए तटीय गांवों को तुरंत खाली करने की चेतावनी दी है।
टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए रात-दिन जारी रेस्क्यू
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में स्थित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की टनल (सुरंग) के भीतर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। भारी मलबे, पानी के रिसाव और कीचड़ की वजह से रेस्क्यू टीम को टनल के भीतर प्रवेश करने में अत्यधिक मशक्कत करनी पड़ रही है।
आपातकालीन ऑक्सीजन पाइपलाइन और भारी ड्रिलिंग उपकरणों के सहारे मजदूरों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि लगातार बढ़ते जलस्तर से टनल के अंदर पानी भरने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, राहत सामग्री और एनडीआरएफ तैनात
नेपाल में आए इस मानवीय संकट को देखते हुए भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान शुरू किया है। भारत की ओर से एनडीआरएफ की विशेष रेस्क्यू टीमों को आधुनिक खोज एवं बचाव उपकरणों के साथ नेपाल भेजा जा रहा है। इसके साथ ही खाद्य सामग्री, पीने का पानी, टेंट, दवाएं और इमरजेंसी मेडिकल किट्स की बड़ी खेप सीमावर्ती रास्तों और वायुसेना के विमानों के जरिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही है।
प्रशासन की अपील: नदियों के किनारे न जाएं, अलर्ट पर रहें
नेपाल सरकार, DHRJ और नेपाल टेलीकॉम (NTC) की ओर से संयुक्त रूप से एडवाइजरी जारी कर नागरिकों से नदी के किनारों, पुलों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूर रहने की अपील की गई है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ऊपरी इलाकों में बनी अस्थिर प्राकृतिक झीलें फिर से फूटती हैं, तो निचले इलाकों में भारी तबाही आ सकती है। फिलहाल सेना, पुलिस और अंतर्राष्ट्रीय राहत एजेंसियां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
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