'भारत में टकराव पैदा करने के नए तरीके खोज रहे', BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा
BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने शनिवार को दावा किया कि उत्तराखंड में 'शुद्धिकरण' विवाद से जुड़े वीडियो में "जाति का कोई पहलू" नहीं था. उन्होंने कांग्रेस पर हिंदू समाज में बंटवारा पैदा करने के लिए बार-बार जाति और इसी तरह के दूसरे मुद्दे उठाने का आरोप लगाया. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, त्रिवेदी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा.
राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड के हल्द्वानी दौरे के बाद शुद्धिकरण की रस्म में कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की डिमांड की थी. त्रिवेदी ने कहा, "इन दो वीडियो से यह बिल्कुल साफ हो चुका है कि इसमें जाति का किसी तरह का पहलू नहीं था. मगर... मैंने कहा था कि उनकी क्रिएटिविटी खत्म हो गई है. इसलिए वे हर बार अपनी घिसी-पिटी बातों के आधार पर भारत में टकराव पैदा करने के नए तरीके खोज रहे हैं."
कांग्रेस ने समाज में बंटवारा किया
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने समाज में बंटवारा करने को लेकर जाति, भाषा, क्षेत्र, लिंग और अगड़े-पिछड़े वर्गों के बीच अंतर जैसे मामलों का सहारा लिया. त्रिवेदी ने कहा, "उनका एकमात्र एजेंडा हिंदुओं को आपस में लड़ाना और पर्दे के पीछे से मैकाले, मार्क्स और मौलाना के एजेंडे को आगे बढ़ाना है." त्रिवेदी ने दलितों के साथ कथित व्यवहार पर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर खासी आलोचना की. उन्होंने राजस्थान में दलित समुदाय के लोगों पर हुए कथित हमलों और कर्नाटक में कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर 2020 में हुए हमले का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने ही नेता का ठीक से समर्थन करने में नाकाम रही.
हरीश जाटव पर जानलेवा हमला
त्रिवेदी ने कहा, "18 जुलाई 2019 को भिवाड़ी में हरीश जाटव पर जानलेवा हमले हुए और 15 अगस्त को उन्होंने आत्महत्या कर ली. उस वक्त किसी की सरकार थी? कांग्रेस की सरकार थी. 15 सितंबर 2021 को अलवर में एक भीड़ ने योगेश जाटव पर अटैक किया. 18 सितंबर को अस्पताल में उनकी मौत हो गई. 1 जुलाई 2021 को झालावाड़ में सड़क पर कृष्णा वाल्मीकि की पिटाई की गई और 6 जुलाई को अस्पताल में उनकी मौत हो गई. क्यों? उस समय आपकी सरकार थी."
हताश होकर पार्टी छोड़ दी
उन्होंने आगे कहा, "कर्नाटक में PFI सदस्यों ने कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर हमला किया, जो अनुसूचित जाति से आते हैं. कार्रवाई करने की तो बात छोड़िए, इन लोगों ने अपनी ही पार्टी के नेता का साथ तक नहीं दिया. उन्हें अदालत में अकेले ही केस लड़ना पड़ा और बाद में अदालत में अकेले ही केस लड़ना पड़ा और बाद में हताश होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी. यही उनकी असलियत है."
सदस्यों के पैर धोने का भी जिक्र किया
उन्होंने कांग्रेस के कथित रिकॉर्ड की तुलना भाजपा के सामाजिक सद्भाव और वंचित समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के दावों से की. त्रिवेदी ने 1989 में राम मंदिर के शिलान्यास समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि दलित समुदाय से आने वाले स्वर्गीय कामेश्वर चौपाल ने शिलान्यास किया था. उन्होंने वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वाल्मीकि समुदाय के सदस्यों के पैर धोने का भी ज़िक्र किया.
रिश्तों को लेकर पार्टी की आलोचना
BJP नेता ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के संग कांग्रेस के ऐतिहासिक रिश्तों को लेकर पार्टी की आलोचना की और 1952 में चुनाव हारने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ओर से कथित तौर पर लिखे गए एक पत्र का जिक्र किया. त्रिवेदी ने राहुल गांधी की ओर से बार-बार सामाजिक बंटवारे पर जोर देने पर भी सवाल उठाए और कहा कि राजनीतिक दलों को समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सद्भाव के लिए काम करना चाहिए.
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