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Explainer: 126 गेंदें... लगातार 21 मेडन ओवर... 0 रन, टेस्ट क्रिकेट का वो 'अजेय' रिकॉर्ड, जब एक भारतीय ने अंग्रेजों को रुलाया!
Test Records: आज का क्रिकेट पूरी तरह से बदल चुका है. अब टी20 क्रिकेट का बोलबाला है और टेस्ट क्रिकेट भी 3 या 4 दिनों में खत्म हो जा रहे हैं, क्योंकि बल्लेबाज बेहद आक्रामक होकर खेल रहे हैं. आधुनिक क्रिकेट में बल्लेबाज अब पहली ही गेंद से बड़े-बड़े शॉट्स लगाने और रिवर्स स्वीप या रैंप शॉट खेलने से भी नहीं हिचकते हैं. इस दौर में, टी20 में अगर कोई गेंदबाज लगातार 3 या 4 गेंदें भी डॉट फेंक देता है, तो इसे एक अच्छी वापसी माना जाता है. टेस्ट क्रिकेट में भी अगर कोई गेंदबाज 2 या 3 ओवर मेडन डाल दे, तो उसे शानदार गेंदबाजी कहा जाता है. लेकिन क्रिकेट इतिहास के पन्नों में एक ऐसा जादुई रिकॉर्ड दर्ज है, जो आज के इस चकाचौंध वाले खेल को एक कड़ा आईना दिखाता है. यह कहानी एक भारतीय गेंदबाज की है, जिसने अपनी अनुशासित और बेहद सटीक गेंदबाजी की कला से वर्ल्ड क्रिकेट को हैरान कर दिया था. हम बात कर रहे हैं भारतीय स्पिनर रमेशचंद्र गंगाराम नाडकर्णी की, जिन्होंने एक टेस्ट मैच की पारी में लगातार 21 मेडन ओवर फेंकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था जो आज भी कायम है. तो आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि उन्होंने यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड कब और किसके खिलाफ बनाया था.
भारतीय स्पिनर रमेशचंद्र गंगाराम नाडकर्णी, जिन्हें दुनिया बेहद सम्मान से 'बापू नाडकर्णी' के नाम से जानती है. उन्होंने एक टेस्ट मैच की पारी में वो कारनामा किया था, जिसे करना आज के क्रिकेट में अकल्पनीय है. उन्होंने लगातार 21 मेडन ओवर फेंकने का वो अटूट वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था, जिसे आज की तारीख में तोड़ना तो दूर, उसके आस-पास पहुंचना भी किसी भी गेंदबाज के लिए नामुमकिन है.
12 जनवरी 1964 को शुरु हुआ भारत-इंग्लैंड का वो ऐतिहासिक टेस्ट मैच
भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला चेन्नई के कॉर्पोरेशन स्टेडियम (नेहरू स्टेडियम) में खेला जा रहा था. चेन्नई की पिच बल्लेबाजी के लिए अनुकूल लग रही थी, क्योंकि वहां न तो तेज गेंदबाजों के लिए कोई खास स्विंग थी और न ही मैच के शुरुआती दिनों में स्पिनर्स के लिए कोई बड़ी टर्न मौजूद थी. इंग्लैंड की टीम अपनी पहली पारी में मजबूत स्थिति में आगे बढ़ रही थी. क्रीज पर केन बैरिंगटन और ब्रायन बूथ जैसे दिग्गज अंग्रेज बल्लेबाज मौजूद थे. भारतीय कप्तान मंसूर अली खान पटौदी को खेल की गति को रोकने और अंग्रेजों पर दबाव बनाने के लिए एक ऐसे गेंदबाज की जरूरत थी जो रनों की गति पर पूरी तरह से लगाम लगा दे. पटौदी ने गेंद अपने सबसे भरोसेमंद और कसी हुई गेंदबाजी करने वाले बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर बापू नाडकर्णी को थमाई.
बापू नाडकर्णी का वो चमत्कारी स्पेल जब फ्रीज हो गया स्कोरबोर्ड
बापू नाडकर्णी ने जब गेंद थामी, तो किसी ने सोचा नहीं होगा कि वह कुछ ही घंटों में इंग्लिश बल्लेबाजों को रुलाकर वर्ल्ड क्रिकेट में एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं. नाडकर्णी का गेंदबाजी एक्शन बेहद सीधा, सरल और थका देने वाला था. उन्होंने आते ही अपनी जादुई लाइन और लेंथ पर गेंदें फेंकनी शुरू कर दीं. गेंद ठीक उसी जगह टप्पा खाती, जहां से बल्लेबाज न तो आसानी से आगे बढ़कर खेल सकता था और न ही बैकफुट पर जाकर शॉट खेलने की जगह बना सकता था.
इस मैच का खेल धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया और बापू नाडकर्णी के मेडन ओवरों की संख्या भी बढ़ती गई. चेन्नई के मैदान का स्कोरबोर्ड जैसे एक ही जगह पर आकर जम गया था. अंग्रेज बल्लेबाज गेंद को रक्षात्मक तरीके से खेलते, गेंद सीधे फील्डर के हाथ में जाती और ओवर समाप्त हो जाता. यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. नाडकर्णी ने लगातार 21 मेडन ओवर फेंककर इंग्लैंड के बल्लेबाजों को एक-एक रन के लिए रुला दिया. इसका मतलब यह हुआ कि उन्होंने लगातार 126 आधिकारिक गेंदें ऐसी फेंकी, जिन पर इंग्लैंड का कोई भी बल्लेबाज एक सिंगल रन तक नहीं चुरा सका.
बापू नाडकर्णी ने 131 गेंदों तक अंग्रेजों को रनों के लिए तरसाया
अंग्रेज बल्लेबाजों ने उनकी लगातार 131 गेंदों का सामना किया और बल्ले से एक भी रन नहीं बना पाए. बता दें कि 21 लगातार ओवर से पहले वाले ओवर की आखिरी 5 गेंद भी उन्होंने डॉट डाली थी. इस तरह उन्होंने लगातार 131 गेंदों पर बल्लेबाजों को रन नहीं दिया. स्टेडियम में मौजूद दर्शक और कमेंटेटर्स हर ओवर के बाद अपनी उंगलियों पर गिनती कर रहे थे. क्रिकेट के इतिहास में मैदान पर इतनी कड़क और बेबस कर देने वाली लाचारी पहले कभी नहीं देखी गई थी.
बापू नाडकर्णी के इस जादुई स्पेल का विश्लेषण
क्रिकेट इतिहास में न्यूनतम 10 ओवर फेंकने के नियम (Cut-off) के साथ, टेस्ट मैच की एक पारी में सबसे बेहतरीन इकॉनमी रेट (0.15) का वर्ल्ड रिकॉर्ड आज भी बापू नाडकर्णी के ही नाम दर्ज है. उन्होंने इस मैच में अपने 32 ओवर के स्पेल में कुल 27 ओवर मेडल डाले थे, जिसमें सिर्फ 5 रन दिए थे. भले ही उन्हें इस स्पेल में कोई विकेट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इंग्लैंड की रन गति को इस कदर रोक दिया कि बाकी गेंदबाजों के लिए दबाव बनाना बेहद आसान हो गया.
बापू नाडकर्णी ने बनाया था मनोवैज्ञानिक दवाब
क्रिकेट सिर्फ बल्ले और गेंद का खेल नहीं है, यह दिमाग की भी जंग है। डॉट बॉल को किसी भी गेंदबाज का सबसे बड़ा और छुपा हुआ हथियार माना जाता है. जब एक बल्लेबाज लगातार 5 या 6 गेंदें डॉट खेलता है, तो उस पर रन बनाने का मानसिक दबाव बढ़ने लगता है. लेकिन जब यह दबाव लगातार 20 या 30 गेंदों तक बढ़ जाए, तो बल्लेबाज का सब्र जवाब देने लगता है. बापू नाडकर्णी ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों के साथ यही मनोवैज्ञानिक खेल खेला था. केन बैरिंगटन जैसे दिग्गज बल्लेबाज, जो दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने की क्षमता रखते थे, वे भी नाडकर्णी के सामने पूरी तरह असहाय और लाचार नजर आ रहे थे.
इंग्लिश बल्लेबाजों के मन में यह खौफ बैठ गया था कि अगर उन्होंने नाडकर्णी की इस सटीक लाइन को तोड़ने के लिए कोई भी आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश की, तो वे अपना विकेट गंवा बैठेंगे. नतीजा यह हुआ कि अंग्रेजों ने पूरी तरह से घुटने टेक दिए और पूरी तरह से रक्षात्मक मोड में आ गए. उन्होंने रन बनाने का प्रयास ही छोड़ दिया, जिससे मैच का पूरा नियंत्रण भारत के हाथों में आ गया.
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