के जे एम वर्मा
बीजिंग, 29 अगस्त तिब्बत में भारी संख्या में फंसे भारतीय तीर्थयात्रियों की शनिवार को एक वैकल्पिक सीमा मार्ग से नेपाल वापसी शुरू हुई। बाढ़ के कारण ग्यिरोंग सीमा चौकी नष्ट हो गई। ग्यिरोंग-नेपाल सीमा चौकी, नेपाल के रास्ते तिब्बत में प्रवेश करने और वहां से बाहर निकलने का मुख्य मार्ग है।
बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ में यह चौकी नष्ट हो जाने के बाद सैकड़ों विदेशी पर्यटक फंस गए। इनमें ज्यादातर कैलाश मानसरोवर यात्रा में शामिल तीर्थयात्री थे। इस बाढ़ में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
फंसे हुए तीर्थयात्रियों ने झांगमु सीमा चौकी के रास्ते नेपाल में प्रवेश करना शुरू कर दिया, जिसे इस क्षेत्र में आए भूकंप और भूस्खलनों के कारण पहले बंद कर दिया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी उन भारतीय तीर्थयात्रियों में शामिल थे, जो शनिवार को झांगमु के रास्ते नेपाल सीमा पर लौटे। रेड्डी ने यहां सीमा चौकी की ओर जाते समय ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैं देख सकता हूं कि कई बस और वाहन झांगमु सीमा चौकी के रास्ते नेपाल की ओर जा रहे हैं।’’
रेड्डी हैदराबाद से गए 31 सदस्यों वाले एक समूह का हिस्सा थे, जो 23 अगस्त को तिब्बत गया था।
उन्होंने ग्यिरोंग-नेपाल सीमा के रास्ते तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश किया था और शुक्रवार को उसी मार्ग से लौटने वाले थे। इससे पहले, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया था कि ग्यिरोंग काउंटी से निकाले गए 1,000 लोगों में 555 पर्यटक शामिल थे। रेड्डी ने बताया कि बुधवार को जब वह और उनका परिवार हजारों अन्य लोगों के साथ पवित्र कैलाश पर्वत की ‘परिक्रमा’ कर रहे था, तब उन्हें अचानक आई बाढ़ की खबर मिली।
उन्हें दूतावास के अधिकारियों के जरिए ग्यिरोंग-नेपाल सीमा चौकी पर आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बारे में जानकारी दी गई। रेड्डी ने कहा कि कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील—जो ग्यिरोंग से 700 किलोमीटर दूर हैं—अचानक आई बाढ़ से प्रभावित नहीं हुए।
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नेपाल में आई भयानक बाढ़ में 600 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 320 भारतीय हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी आगे के खतरों को लेकर भी सतर्क हैं। इस तबाही के बीच, धाडिंग में एक अजीब घटना ने सबका ध्यान खींचा है। बाढ़ के पानी में बहकर आया एक बैंक लॉकर त्रिशूली नदी के किनारे मिला, जिसके बाद उसके अंदर रखे कैश को लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। पुलिस ने इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनसे 92 लाख नेपाली रुपये से ज़्यादा की रकम बरामद की है; यह रकम भारतीय मुद्रा में लगभग 58 लाख रुपये के बराबर है।
बाढ़ में बह गया बैंक लॉकर
यह घटना तब हुई जब बाढ़ का पानी रसुवा से एक बैंक लॉकर बहा ले गया। यह लॉकर बहते हुए धाडिंग ज़िले की गल्छी रूरल म्युनिसिपैलिटी-4 में बेलखुखोला के पास त्रिशूली नदी के किनारे जा पहुँचा। जब लॉकर मिला, तो लोगों ने उसमें से कैश निकालना शुरू कर दिया, जिससे पैसे के लिए होड़ मच गई। पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में 29 लोगों को गिरफ़्तार किया। गिरफ़्तार किए गए लोगों से कुल 92,68,505 नेपाली रुपये (भारतीय मुद्रा में लगभग 58 लाख रुपये) बरामद किए गए।
गिरफ़्तार किए गए 29 लोगों में पवन पौडे, बीर बहादुर राणा मगर, बिनोद गिरी, नवराज भेटुवाल, पूर्ण लाल श्रेष्ठ, विष्णुमणि अधिकारी, कृष्णा मगर, शिव बहादुर राणा मगर, युवराज अधिकारी, सुशांत श्रेष्ठ, सुचिमबहादुर राणा मगर, सबिन श्रेष्ठ, प्रेम बहादुर राणा मगर और अनिल भेटुवाल शामिल थे। पुलिस बरामद पैसे के स्रोत और इसमें किसी और के शामिल होने की संभावना की जांच कर रही है।
बाढ़ के बाद नेपाल पर अभी भी खतरा बना हुआ है
भयानक बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडरा रहा खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन ने नेपाल को चेतावनी दी है कि ल्हेंडे नदी प्रणाली के ऊपरी इलाकों में बनी एक झील के किनारे कभी भी टूट सकते हैं। चीन ने पानी का रंग बदलने पर भी चिंता जताई है और इसे खतरे का संभावित संकेत बताया है। नदी के बहाव की दिशा में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि अधिकारी स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब नेपाल बाढ़ के व्यापक असर से जूझ रहा है और लापता लोगों की तलाश का काम भी जारी है।
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