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BJP नेता R Ashoka ने Karnataka सरकार को घेरा, B Nagendra के बचाव पर उठाए सवाल

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता आर. अशोक ने शनिवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह बी. नागेंद्र (जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है) का बचाव करने के लिए ‘दलित पहचान’ के मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री ने तभी इस्तीफा दिया, जब विपक्ष ने कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में दस्तावेजी सबूत पेश किए। नागेंद्र ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया था।

विपक्ष लगातार मांग कर रहा था कि उन्हें राज्य कैबिनेट से हटाया जाए, क्योंकि उन पर 89 करोड़ रुपये के महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले का आरोप था। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अशोक ने कहा कि सरकार पी. चंद्रशेखरन को न्याय दिलाने में नाकाम रही है। चंद्रशेखरन निगम में लेखा अधीक्षक के पद पर थे और जून 2024 में उनकी मौत के बाद ही कथित अनियमितताएं सामने आई थीं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद नागेंद्र को पीड़ित के तौर पर क्यों दिखाया जा रहा है। खासकर विपक्षी भाजपा-जनता दल (सेक्युलर) के बढ़ते दबाव के कारण नागेंद्र ने इस्तीफा दिया, लेकिन उन्होंने उन पर एक ‘दलित’ का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते और न ही ‘मनुवादियों’ को हावी होने देना चाहते हैं।

नागेंद्र अनुसूचित जनजाति से हैं, लेकिन कर्नाटक में ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल व्यापक अर्थ में (खासकर राजनेताओं द्वारा) किया जाता है, जिसमें दबे-कुचले समुदायों को शामिल किया जाता है। अशोक ने आरोप लगाया, ‘‘पी. चंद्रशेखरन भी एक दलित थे, जिन्होंने घोटाले का खुलासा करने के बाद आत्महत्या कर ली। आप उन्हें न्याय नहीं प्रदान कर रहे हैं।

उनके परिवार को कोई न्याय नहीं मिला है। उनके बच्चे बेसहारा हो गए हैं।’’ उन्होंने दावा किया कि चंद्रशेखरन की मौत से ही फंड के दुरुपयोग का मामला सामने आया और कहा कि अगर ऐसा न होता तो भुगतान के समायोजन के जरिए इस मामले को दबा दिया जाता। उन्होंने मृत अधिकारी के परिवार को पेंशन और ग्रेच्युटी न देने, और उनके बेटे को वादा की गई सरकारी नौकरी दिलाने में सरकार के नाकाम रहने को लेकर सवाल उठाए।

अशोक ने कहा कि उन्होंने विधानसभा और मीडिया के सामने 37 दस्तावेज जारी किए हैं। इनमें कथित तौर पर किए गए तबादले, मृत व्यक्ति का आधिकारिक नोट, बैंक से किए गए संवाद और फोन पर हुई बातचीत से जुड़ी फॉरेंसिक जांच का चार्ट शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रभारी मंत्री के शामिल हुए बिना या बगैर उनकी जानकारी के लगभग 600 खातों में पैसे कैसे अंतरित किए जा सकते थे।

साथ ही उन्होंने कथित ‘सुसाइड नोट’ का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें मंत्री के ज़ुबानी निर्देशों के आधार पर तबादला किए जाने की बात कही गई है। अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि 4 मार्च से 23 मार्च के बीच बैंकों को भेजे गए सरकारी पत्रों से एक ऐसी व्यवस्था का पता चलता है, जिसके तहत बैंकों में जमा पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर उतनी ही रकम का कर्ज लेने के लिए किया गया था। कांग्रेस के इस तर्क को खारिज करते हुए कि नागेंद्र को ‘दलित’ होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है, अशोक ने कहा कि गलत काम के आरोपों से बचने के लिए जातिगत पहचान को ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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  Sports

Lords Test में हार के बाद भड़के Rashid Latif, Babar Azam और Selection Committee पर साधा तीखा निशाना

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड दौरा अब तक बेहद निराशाजनक रहा है। लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में 194 रन से मिली करारी हार के बाद पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और उसके मौजूदा अध्यक्ष मोहसिन नकवी पर तीखा हमला बोला है। लतीफ का कहना है कि टीम के खराब प्रदर्शन के लिए सिर्फ खिलाड़ियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बोर्ड, चयन समिति और प्रशिक्षकों की भूमिका पर भी सवाल उठने चाहिए।

लतीफ ने पाकिस्तान की मौजूदा टीम को पिछले 50 वर्षों की सबसे कमजोर विदेशी दौरा करने वाली टीम बताए जाने की चर्चा से सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने इसी के साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कार्यप्रणाली को भी निशाने पर लिया। जियो न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस तरह टीम को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसी तरह मौजूदा बोर्ड को भी पिछले 70 वर्षों में सबसे खराब बोर्ड के रूप में देखा जाना चाहिए।

पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा कि चयन समिति और प्रशिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा जरूरी है। उनके मुताबिक टीम के लगातार खराब प्रदर्शन के पीछे कई स्तरों पर फैसलों की कमजोरी दिखाई दे रही है। लतीफ ने कहा कि अगर टीम, बोर्ड, चयन समिति और प्रशिक्षकों से जुड़े सभी पहलुओं को एक साथ देखा जाए तो यह समझना आसान होगा कि पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

गौरतलब है कि इंग्लैंड के खिलाफ जारी तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में पाकिस्तान की बल्लेबाजी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। टीम अब तक एक बार भी 200 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सकी है। लॉर्ड्स टेस्ट में भी पाकिस्तान की दूसरी पारी 194 रन पर सिमट गई, जबकि जीत के लिए उसे 389 रन बनाने थे।

कप्तान बाबर आजम की वापसी से पाकिस्तान की बल्लेबाजी को मजबूती मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने लॉर्ड्स टेस्ट की पहली और दूसरी पारी में आठ और छह रन बनाए। दूसरी पारी में तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की उछाल लेती गेंद के सामने बाबर काफी असहज नजर आए और जल्द ही पवेलियन लौट गए।

बता दें कि लॉर्ड्स टेस्ट मैदान के बाहर के विवादों के कारण भी चर्चा में रहा। मुकाबले के दौरान प्रसारणकर्ता स्काई स्पोर्ट्स ने इमरान खान के बेटों कासिम और सुलेमान का माइकल एथर्टन के साथ साक्षात्कार प्रसारित किया था। रिपोर्टों में दावा किया गया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इससे नाराज था और उसने मैच के दूसरे सत्र में टीम को मैदान पर नहीं भेजने की चेतावनी तक दी थी।

हालांकि, बाबर आजम और मुख्य प्रशिक्षक सरफराज अहमद दोनों ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया। पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच श्रृंखला का तीसरा और अंतिम टेस्ट नौ सितंबर से बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जाएगा, जहां पाकिस्तान की टीम हार के सिलसिले को रोकने के साथ अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश करेगी।
Mon, 31 Aug 2026 20:10:00 +0530

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