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सावधान! फिर बन गया 'लो प्रेशर' सिस्टम; इन राज्यों में चार दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट, आंधी-तूफान भी

IMD Red Alert: मौसम विभाग ने ओडिशा के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है, जहां 29 और 30 अगस्त को कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश (204.4 मिमी से अधिक) होने की आशंका जताई गई है। I

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नमक-शकर-फैट ज्यादा हुआ तो पैकेट पर चेतावनी लिखनी होगी:लाल षटकोण छपेगा; FSSAI का प्रस्ताव, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश

अब अगर पैकेड फूड में सेचुरेटेड फैट, शुगर और नमक की मात्रा तय लिमिट से ज्यादा है, तो कंपनियों को पैकेट पर षटकोण आकार का लाल निशान लगाना होगा। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा पेश कर इसकी जानकारी दी है। इसका मकसद उपभोक्ताओं को खाने-पीने की उन चीजों के प्रति जागरूक करना है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। SC ने FSSAI को नियमों में देरी के लिए फटकार लगाई थी '3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' नाम के एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर डिब्बा बंद या पैकेट वाले खाने पर अनिवार्य वार्निंग लेबल लगाने की मांग की थी। इस मामले की पिछली सुनवाई (13 अगस्त) के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI को नियमों में देरी के लिए फटकार लगाई थी और पूछा था कि क्या सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें? इसके बाद FSSAI ने यह हलफनामा पेश किया है। सवाल-जवाब में समझते हैं पूरा मामला क्या है और इससे आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा... सवाल 1: FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में क्या प्रस्ताव दिया है? जवाब: FSSAI ने शीर्ष अदालत को सूचित किया है कि वह ज्यादा फैट, ज्यादा चीनी और नमक वाले खाने-पीने की चीजों के पैकेट पर सामने की तरफ एक लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह लेबल लोगों को आसानी से समझ आने वाली चेतावनी देगा। सवाल 2: यह लाल रंग का वार्निंग लेबल दिखने में कैसा होगा? जवाब: FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, यह वार्निंग लेबल लाल रंग के षट्कोण (हेक्सागोनल- 6 कोनों वाला) आकार का होगा। इसे पैकेट के फ्रंट यानी ठीक सामने की तरफ लगाया जाएगा। सवाल 3: नियमों को तय करने का आधार या पैमाना क्या है? जवाब: कोई भी फूड प्रोडक्ट हाई फैट, हाई शुगर या हाई साल्ट (HFSS) की श्रेणी में आता है या नहीं, इसका फैसला ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (ICMR-NIN) द्वारा जारी 'डायट्री गाइडलाइंस फॉर इंडियंस, 2024' के मानकों के आधार पर किया जाएगा। सवाल 4: क्या यह नियम सभी पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स पर एक साथ लागू होगा? जवाब: नहीं, FSSAI ने इसे अलग-अलग फेज में लागू करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि इंडस्ट्री को अपने प्रोडक्ट्स को सुधारने का मौका मिले। सवाल 5: क्या कुछ खाद्य पदार्थों को इस लाल लेबल से छूट भी मिली है? जवाब: हां, कुछ चुनिंदा कैटगरी को इससे बाहर रखने का प्रस्ताव है। सिंगल-इंग्रीडिएंट (सिर्फ एक सामग्री वाले) प्रोडक्ट्स और ऐसे पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से ही फैट, शुगर या नमक से भरपूर होते हैं, उन्हें छूट मिलेगी। उदाहरण के लिए शुद्ध घी, खाद्य तेल, साधारण नमक, चीनी, गुड़ और शहद को इस फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग से छूट दी जाएगी। सवाल 6: FSSAI के मुताबिक इस नए नियम का सबसे बड़ा फायदा किसे होगा? जवाब: FSSAI ने कोर्ट को बताया है कि इस उपभोक्ता-अनुकूल लेबलिंग व्यवस्था से लोग जागरूक होकर भोजन का चुनाव कर सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा बच्चों और समाज के संवेदनशील या कमजोर वर्गों को होगा, जो अनजाने में अत्यधिक अस्वस्थ चीजें खा लेते हैं। सवाल 7: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ क्या है? जवाब- फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) वह लेबल है, जो किसी फूड प्रोडक्ट के पैकेट के आगे के हिस्से में लिखा रहता है। इसमें खाने के मेन इंग्रीडिएंट्स जैसे शुगर, नमक और फैट की जानकारी को आसान और जल्दी समझ आने वाले तरीके से दिखाया जाता है। इसका मकसद ये है कि ग्राहक तुरंत समझ सके कि वो जो फूड खरीद रहा है, वह स्वास्थ्य के लिए कितना सही है। ये जानकारी पैकेट के बैक पर लिखे लंबे‑चौड़े न्यूट्रिशनल फैक्ट्स से अलग होती है। इसमें सिर्फ जरूरी जानकारी को सरल ग्राफिक्स या रंगों के जरिए दिखाया जाता है। सवाल 8: मौजूदा पैकेज्ड फूड पर फूड से जुड़ी न्यूट्रिशनल जानकारी कहां लिखी होती है? जवाब- यह आमतौर पर पैकेज्ड फूड के पीछे या किनारे पर एक टेबल के फॉर्म में लिखी होती है। यह जानकारी प्रोडक्ट के 100 ग्राम, 100 मिलीलीटर या हर सर्विंग में मौजूद न्यूट्रिशनल वैल्यू जैसे- कैलोरी, फैट, प्रोटीन, शुगर और सोडियम की मात्रा बताती है। सवाल 9: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ से क्या पता चलता है? जवाब- फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग से पता चलता है कि फूड हेल्दी है या अनहेल्दी। उसमें कितनी कैलोरी, शुगर, नमक और फैट है और क्या वह स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– सवाल 10: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ क्यों जरूरी है? जवाब- ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ इसलिए जरूरी है ताकि लोग पैकेज्ड फूड खरीदते समय जल्दी और स्पष्ट रूप से उसके हेल्थ इम्पैक्ट को समझ सकें। इससे उनके लिए हेल्दी ऑप्शन्स चुनना आसान हो जाएगा और अनहेल्दी फूड के अधिक सेवन को रोका जा सकेगा। सवाल 11: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ से हमें क्या फायदा होगा? जवाब- फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग का मकसद न्यूट्रिशन की जटिल जानकारी को सरल बनाना है, ताकि ग्राहक खरीदते समय ही बेहतर फैसला ले सकें और अनहेल्दी विकल्पों से बच सकें। नीचे दिए ग्राफिक से इसके फायदे समझिए- सवाल 12: सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को लोगो का निर्देश क्यों दिया? जवाब- देश में लाइफस्टाइल बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह अनहेल्दी खान-पान है। पैकेज्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड में मौजूद अधिक शुगर, नमक और फैट की मात्रा इन बीमारियों का बड़ा कारण बन रही है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से कहा है कि वह पैकेज्ड फूड पर ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ लागू करने पर गंभीरता से विचार करे, ताकि लोग खरीदते समय ही संभावित हेल्थ रिस्क समझ सकें। ग्राफिक से समझते हैं कि भारत में लाइफस्टाइल बीमारियों की स्थिति कितनी गंभीर है- ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… चांदी इस हफ्ते ₹2,738 सस्ती, ₹2.44 लाख पर आई:सोना ₹1,042 घटकर ₹1.60 पर आया; जानें अपने शहर के दाम सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी के दाम 2,738 रुपए गिरकर 2.44 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 21 अगस्त को 2.47 लाख रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड के दाम 1,60,620 रुपए से गिरकर 1,59,578 लाख रुपए पर आ गए हैं। यानी इसकी कीमत 1,042 रुपए कम हुई। पूरी खबर पढ़ें…

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Suryakumar Yadav ने T20 World Cup के बाद बाहर होने पर तोड़ी चुप्पी, सामने आई अंदर की बात

भारत के कप्तान बनने के बाद से एक भी सीरीज़ न हारना, टीम को T20 वर्ल्ड कप और एशिया कप जिताना, और फिर भी टीम से बाहर हो जाना—सूर्यकुमार यादव ने यह सब देखा है। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं कि उन्हें हैरानी हुई, भले ही सिलेक्टर्स ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि वे आगे बढ़ रहे हैं—और यह सब तब हुआ जब वे कप्तान के तौर पर T20 वर्ल्ड कप जीतने वाले सिर्फ़ तीसरे भारतीय बने थे।
 

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सूर्यकुमार यादव ने आखिरकार उस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है, जिस पर अब तक कोई बात नहीं हो रही थी। उन्होंने इस साल की शुरुआत में टूर्नामेंट जीतने के तुरंत बाद नेशनल टीम से बाहर किए जाने पर बात की। अजीत अगरकर की अगुवाई वाली सिलेक्शन कमिटी ने SKY को नज़रअंदाज़ करते हुए आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ़ सीरीज़ के लिए श्रेयस अय्यर को अगला कप्तान चुना। सूर्यकुमार को टीम से बाहर करने की सबसे बड़ी वजह पिछले दो सालों में उनकी बैटिंग फ़ॉर्म थी; इस दौरान दाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ के लिए रन बनाना मुश्किल हो गया था।

2025 में, सूर्यकुमार भारतीय टीम के लिए एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए। T20 वर्ल्ड कप में भी इस बल्लेबाज़ की ओर से सिर्फ़ एक ही अहम पारी देखने को मिली, जो उनके घरेलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम में USA के ख़िलाफ़ खेली गई थी। हालाँकि, कप्तान के तौर पर सूर्यकुमार ने कोई ग़लती नहीं की; उनकी कप्तानी में भारत कोई सीरीज़ नहीं हारा और आख़िरकार घरेलू ज़मीन पर T20 वर्ल्ड कप भी जीता।

सूर्यकुमार ने माना कि टीम से बाहर किए जाने पर उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया ज़्यादा नाराज़गी वाली नहीं थी, क्योंकि उन्होंने चयनकर्ताओं की जगह से सोचने और यह समझने की कोशिश की कि वे क्यों उन्हें टीम से हटाकर भविष्य के लिए एक नई टीम बनाना चाहते थे। भारत के पूर्व बल्लेबाज़ आकाश चोपड़ा के यूट्यूब चैनल पर उनसे बातचीत के दौरान सूर्यकुमार ने कहा कि जब मेरा नाम लिस्ट में नहीं था, तो मैं मुस्कुराया। क्योंकि जब मैंने एक-दो साल टीम के साथ क्रिकेट खेला, और जब भी मैं खेला हूँ, तो दबाव वाली स्थितियों में या जब चीज़ें मेरे मन-मुताबिक नहीं हो रही थीं, तब भी मैं हमेशा मुस्कुराया हूँ। मैं शांत रहा हूँ। और मैंने यह देखा है कि अतीत में जब भी मुझे अच्छा करने के मौके मिले, तो मैंने हमेशा शुक्रगुज़ार महसूस किया है।
 

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उन्होंने आगे कहा कि जाहिर है, अभी जो हालात बने हैं, उनके बारे में मैंने भी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। 2026 तक आने के बाद, मुझे लगा था कि आगे भी मैं इस टीम को दो और साल तक आगे ले जाऊँगा। ओलंपिक आएगा। फिर एक और T20 वर्ल्ड कप होगा, आगे एक और चुनौती होगी। लेकिन साथ ही, आप क्या सोचते हैं और दूसरा व्यक्ति क्या सोचता है, ये दो अलग-अलग बातें हैं। उनके लिए अपनी सोच का सम्मान करना ज़रूरी है। अगर उन्हें लगा कि आगे के लिए यह बेहतर फ़ैसला है, तो उन्होंने वह फ़ैसला लिया। लेकिन मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। क्योंकि मुझे लगा कि यह उनका फ़ैसला था। उन्होंने उस पल में वह फ़ैसला लिया। आगे चलकर, अगर यह टीम किसी और की देखरेख में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है, तो कोई समस्या नहीं है।
 
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Sat, 29 Aug 2026 16:11:00 +0530

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