कोलकाता में 2002 में हुए अमेरिकन सेंटर हमले के मुख्य साजिशकर्ता एवं सजायाफ्ता आफताब अहमद अंसारी की जेल की कोठरी से तीन मोबाइल फोन, वाई-फाई उपकरण और 31,000 रुपये जब्त किए गए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। यहां जेल में हुई इस बरामदगी के बाद अधिकारियों ने हेस्टिंग्स थाने में मामला दर्ज कराया, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है।
अमेरिकन सेंटर हमला मामले में दोषी अंसारी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और वह कोठरी नंबर 14 में बंद है। अमेरिकन सेंटर में 22 जनवरी 2002 को मोटरसाइकिल सवार दो बंदूकधारियों द्वारा की गई गोलीबारी में पुलिस कांस्टेबलों सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी और 20 अन्य घायल हो गए थे। जेल के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि खुफिया जानकारी मिली थी कि अंसारी जेल के अंदर कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है और उसके पास इंटरनेट की सुविधा भी है जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
अधिकारी ने कहा, ‘‘उसके कपड़ों और बिस्तरों से तीन मोबाइल फोन मिले, जबकि दो राउटर, एक वाई-फाई उपकरण, एक पेन ड्राइव और एक इयरफोन भी जब्त किया गया।’’
अधिकारी ने बताया कि उसकी कोठरी से 31,000 रुपये भी बरामद किए गए। उन्होंने कहा कि जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अंसारी ने देश के बाहर अपने संपर्कों को फोन किए थे। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जेल के अधीक्षक और मुख्य नियंत्रक को निलंबित किए जाने के कुछ महीनों बाद सामने आया है, जब कैदियों द्वारा परिसर के अंदर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में 15 मई को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि जेल के अंदर स्मार्टफोन सहित मोबाइल फोन का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है और जेल अधिकारियों का एक वर्ग इसमें संलिप्त है। शुभेंदु ने कहा था कि जेल अधिकारियों और कोलकाता पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान जेल परिसर से 23 मोबाइल फोन जब्त किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पूरे राज्य में आपराधिक नेटवर्क जेल के अंदर से ही संचालित किए जा रहे हैं।
वर्षों से यह जारी है। इस भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसे खत्म करने में समय लगेगा।
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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर दलित-विरोधी सोच रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि BJP शासित राज्यों में दलित समुदाय के लोगों पर बार-बार होने वाले हमलों के पीछे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन होता है। उनका यह बयान उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ी एक कथित घटना पर मचे विवाद के जवाब में आया है।
रमेश ने कहा कि अगर उत्तराखंड में BJP की डबल-इंजन सरकार उन लोगों को किसी तरह सम्मानित या पुरस्कृत करती है जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे जी के प्रति ऐसी दलित-विरोधी नफ़रत दिखाई है, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी। ऐसी हिम्मत तभी आती है जब ऊपर से समर्थन हो। वरना, BJP शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों होती हैं? BJP-RSS की विचारधारा के मूल में ही दलितों के प्रति नफ़रत है। वे चाहे कितना भी मुखौटा पहन लें, यह सोच बार-बार सामने आ ही जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि BJP सरकार संविधान में दी गई गरिमा और समानता को बनाए रखने में नाकाम रही है और इस कथित घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। रमेश ने कहा कि बाबा साहेब के संविधान ने वंचित दलित समाज को इतनी ताकत दी कि उस समाज का कोई व्यक्ति देश की राजनीति में इतने ऊँचे पद तक पहुँच सका। लेकिन जो लोग संविधान-विरोधी सोच रखते हैं, वे कभी भी इस समानता को स्वीकार नहीं कर सकते। और देश के इतने वरिष्ठ दलित नेता की गरिमा पर हुए इस हमले के बारे में प्रधानमंत्री से एक शब्द की भी उम्मीद करना—जिन्होंने अपना समय अपनी झूठी प्रतिष्ठा बनाने और बचाने में बिताया है—तो सवाल ही नहीं उठता। इसके उलट, जो लोग ऐसी नफ़रत और छुआछूत फैलाते हैं, उन्हें अक्सर ऐसी ही जगहों से प्रेरणा और बढ़ावा मिलता है।
उसी दिन, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड में श्री खड़गे के दौरे के बाद 'शुद्धिकरण' की रस्म निभाने में कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत तुरंत FIR दर्ज करने की मांग की। दिल्ली में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह हरकत SC/ST एक्ट का उल्लंघन है। 'शुद्धिकरण' की रस्म निभाना एक अपराध है। फिर भी, कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसलिए, हम मांग करते हैं कि उत्तराखंड में जिन्होंने यह शुद्धिकरण की रस्म निभाई, उनके खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए।
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