Ground Report: त्रिशूली में सेना का बड़ा एयर-रेस्क्यू ऑपरेशन, 400 से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए, हेलीकॉप्टर बने फरिश्ते
Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. त्रिशूली नदी पर बने प्रमुख पुल ढह जाने और बांध टूटने के कारण नदी के पार के क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह से टूट गया है. इस आपदा में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना और प्रशासन की ओर से बेस कैंप तैयार कर बड़े पैमाने पर एयर-रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
सड़क संपर्क कट जाने के कारण सेना और निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टर आपदा क्षेत्र में जीवनदायिनी साबित हो रहे हैं. बेस कैंप से हर मिनट हेलीकॉप्टर उड़ान भर रहे हैं ताकि प्रभावित इलाकों से लोगों को बाहर निकाला जा सके. पर्यटकों और नागरिकों का रेस्क्यू: अब तक 400 से अधिक फंसे हुए लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है. आपदा के बीच स्थानीय लोगों और परिजनों में अपनों की सलामती को लेकर भारी बेचैनी देखी जा रही है. त्रिशूली क्षेत्र में स्थित एक मदरसे और स्कूल में 10 से 12 साल की उम्र के लगभग 50 बच्चे फंसे हुए थे. मलबे और पानी के तेज बहाव में इमारतें प्रभावित होने के बाद बच्चों को एक सुरक्षित कॉलोनी में ले जाया गया. हालांकि, क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप होने के कारण सुबह के बाद परिजनों का बच्चों से संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे परिवारों की चिंता बढ़ गई है.
Explainer: आखिर किसी फिल्म को Hit, Superhit और Blockbuster कौन घोषित करता है? यहां जानिए इसकी पूरी डिटेल
Film Superhit-Flop and Blockbuster: कभी आपने सोचा है कि एक फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये कमाने पड़ते हैं, जबकि दूसरी फिल्म इससे काफी कम कमाई करके भी सुपरहिट कहलाती है? आखिर ऐसा कैसे होता है? क्या सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा करोड़ कमाने से कोई फिल्म हिट या ब्लॉकबस्टर बन जाती है? दरअसल, फिल्म की सफलता का सीधा कनेक्शन उसके कुल बजट और उससे होने वाली रिकवरी से होता है. यही वजह है कि 800 करोड़ रुपये कमाने वाली कोई फिल्म भी सिर्फ हिट हो सकती है, जबकि 180-200 करोड़ रुपये कमाने वाली कम बजट की फिल्म सुपरहिट या ब्लॉकबस्टर बन सकती है.
फिल्मों को आमतौर पर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर, ब्लॉकबस्टर, सुपरहिट, हिट, एवरेज, फ्लॉप और डिजास्टर जैसी कैटेगरी में रखा जाता है. लेकिन इन कैटेगरी को समझने के लिए सबसे पहले फिल्म के बजट और उसके बिजनेस को समझना जरूरी है. तो चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर किसी फिल्म की सफलता का फैसला कैसे होता है.
एक साल में कितनी फिल्में होती हैं रिलीज?
भारत दुनिया के सबसे बड़े फिल्म बाजारों में से एक है. यहां हर साल अलग-अलग भाषाओं में बड़ी संख्या में फिल्में रिलीज होती हैं. इनमें बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ इंडियन और रीजनल लैंग्वेज की फिल्में भी शामिल हैं. लेकिन रिलीज होने वाली हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल हो ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ फिल्में जबरदस्त कमाई करके ब्लॉकबस्टर बन जाती हैं, कुछ अपनी लागत निकालने में सफल रहती हैं, जबकि कई फिल्में अपना बजट भी रिकवर नहीं कर पातीं. उदाहरण के तौर पर 2025 में ‘धुरंधर’, ‘छावा’ और ‘सैयारा’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया, जबकि ‘सिकंदर’ और ‘देवा’ जैसी फिल्मों को कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. अब सवाल है कि इन फिल्मों को अलग-अलग कैटेगरी में रखने का आधार क्या है?
सबसे पहले समझिए फिल्म की कॉस्ट
किसी फिल्म को हिट या फ्लॉप समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है उसकी कुल कॉस्ट. फिल्म बनाने में सिर्फ कलाकारों की फीस ही नहीं लगती. डायरेक्टर, राइटर, सिनेमैटोग्राफर, टेक्नीशियन, सेट, लोकेशन, VFX, पोस्ट-प्रोडक्शन, गाने, शूटिंग और प्रमोशन समेत कई चीजों पर पैसा खर्च होता है. इसके अलावा फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचाने और मार्केटिंग में भी बड़ी रकम खर्च हो सकती है. इसलिए जब फिल्म की कमाई की तुलना की जाती है तो उसके बजट और उससे हुई वास्तविक रिकवरी को देखा जाता है.
ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर
किसी फिल्म के लिए ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर होना सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है. ऐसी फिल्में अपनी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा कमाई करती हैं और लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड में चर्चा में रहती हैं. मिसाल के तौर पर ‘दंगल’ को ही लें. फिल्म का निर्माण बजट लगभग 70-80 करोड़ रुपये के आसपास बताया गया था, जबकि फिल्म ने भारत और विदेशों में मिलाकर करीब 2000 करोड़ रुपये के आसपास का कारोबार किया. इसी तरह ‘कांतारा’ कम बजट में बनी फिल्म थी, लेकिन इसने अपनी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा कमाई की. यानी यहां सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि फिल्म ने कितने करोड़ कमाए, बल्कि ये देखा जाता है कि उसने अपनी लागत के मुकाबले कितना ज्यादा बिजनेस किया.
ब्लॉकबस्टर
ब्लॉकबस्टर फिल्म वो होती है जो अपनी कॉस्ट के मुकाबले बहुत ज्यादा कमाई करती है और मेकर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और थिएटर बिजनेस के लिए शानदार मुनाफा लेकर आती है. उदाहरण के लिए ‘छावा’ को लिया जा सकता है. फिल्म का बजट करीब 130 करोड़ रुपये बताया गया और फिल्म ने इससे कई गुना ज्यादा कारोबार किया. इसके अलावा ‘गदर 2’, ‘एनिमल’, ‘संजू’ और ‘पद्मावत’ जैसी फिल्मों को भी बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल करने वाली फिल्मों में गिना जाता है. यहां ये समझना जरूरी है कि ब्लॉकबस्टर का कोई एक सरकारी फॉर्मूला नहीं है. अलग-अलग ट्रेड एनालिस्ट फिल्म की लागत, डिस्ट्रीब्यूटर शेयर और कुल रिकवरी को देखकर इसका आकलन करते हैं.
सुपरहिट
इसके बाद आती है सुपरहिट कैटेगरी. जब कोई फिल्म अपनी कॉस्ट से काफी ज्यादा कमाई करके अच्छा मुनाफा देती है, लेकिन उसकी कमाई ब्लॉकबस्टर स्तर तक नहीं पहुंचती, तो उसे सुपरहिट कहा जा सकता है. उदाहरण के लिए ‘भूल भुलैया 3’ को लिया जा सकता है. फिल्म का बजट करीब 150 करोड़ रुपये बताया गया और फिल्म ने करीब 400 करोड़ रुपये का कारोबार किया. इसी तरह ‘कल्कि 2898 एडी’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की. फिल्म का बजट करीब 600-650 करोड़ रुपये के आसपास बताया गया था और फिल्म ने दुनियाभर में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया. यानी फिल्म की सफलता तय करते समय उसके कलेक्शन के साथ बजट को देखना बेहद जरूरी है.
हिट फिल्म
अब बात करते हैं हिट फिल्म की. जब कोई फिल्म अपनी लागत और उससे जुड़े खर्चों को निकालने के बाद मुनाफे में पहुंचती है, लेकिन उसकी कमाई बहुत ज्यादा नहीं होती तो उसे हिट कहा जाता है. उदाहरण के लिए ‘भारत’ का बजट करीब 165 करोड़ रुपये बताया गया था और फिल्म ने दुनियाभर में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया. इसी तरह ‘सूर्यवंशी’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और इसे सफल फिल्मों में गिना गया. लेकिन यहां भी सिर्फ कुल कलेक्शन देखना पर्याप्त नहीं है. असली तस्वीर जानने के लिए फिल्म की लागत और डिस्ट्रीब्यूटर को मिली रिकवरी को देखना पड़ता है.
एवरेज फिल्म
अगर कोई फिल्म अपनी लागत के आसपास ही कमाई कर पाती है और मेकर्स को बहुत ज्यादा मुनाफा नहीं होता, तो उसे आमतौर पर एवरेज कहा जाता है. ऐसी फिल्में पूरी तरह फ्लॉप नहीं होतीं, लेकिन उन्हें बड़ी सफलता भी नहीं माना जाता. ‘रेस 3’ और ‘साहो’ जैसी फिल्मों के उदाहरण इसलिए दिए जाते रहे हैं, हालांकि अलग-अलग ट्रेड सोर्सेस में इन फिल्मों की कैटेगरी को लेकर अंतर मिल सकता है.
फ्लॉप और डिजास्टर
अब आती है सबसे खराब कैटेगरी फ्लॉप और डिजास्टर. अगर कोई फिल्म अपनी लागत और बिजनेस रिकवरी तक नहीं पहुंच पाती तो उसे फ्लॉप कहा जा सकता है. वहीं जब किसी बड़े बजट की फिल्म बहुत बुरी तरह से असफल होती है और मेकर्स या डिस्ट्रीब्यूटर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो ट्रेड में उसे डिजास्टर कहा जाता है. ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ और ‘आदिपुरुष’ जैसी फिल्मों को उनके प्रदर्शन के संदर्भ में फ्लॉप या डिजास्टर की कैटेगरी में रखा गया है. यहां भी अलग-अलग ट्रेड रिपोर्ट्स में कैटेगरी बदल सकती है.
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