उत्तराखंड में सरकारी जमीन की सुरक्षा पर बड़ा अभियान, 13 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि अतिक्रमण मुक्त
Uttarakhand News: उत्तराखंड में सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान को राज्य सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिना रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है. उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के साथ-साथ प्रदेश में कानून का राज मजबूत करना है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और माफिया गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि जनता ने अपने वोट के जरिए ऐसे लोगों को सत्ता से बाहर किया और अब सरकार सरकारी जमीन को वापस लेने के साथ अवैध कब्जों पर भी लगातार कार्रवाई कर रही है.
सरकार के इस अभियान को केवल जमीन खाली कराने की कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखने और भविष्य में उसके बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है. सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार बढ़ी है. मार्च 2026 में सरकार की ओर से बताया गया था कि 12 हजार एकड़ से ज्यादा सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जा चुकी है. हालिया सरकारी जानकारी में यह आंकड़ा करीब 13 हजार एकड़ वन भूमि तक पहुंचने की बात कही गई है.
हमारी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की 13,000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। जिन लोगों ने वर्षों तक अपने स्वार्थ के लिए प्रदेश में माफिया राज और अवैध कब्जों को बढ़ावा दिया, जनता ने अपने एक वोट से उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था। आज हमारी डबल इंजन… pic.twitter.com/tId11uBqOw
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 29, 2026
भू-कानून के जरिए जमीन की सुरक्षा
उत्तराखंड सरकार ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के साथ जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर भी नियमों को सख्त किया है. राज्य में 2025 में लागू किए गए नए भूमि कानून के तहत 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा कृषि और बागवानी भूमि खरीदने पर रोक लगाई गई है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों की जमीन के दुरुपयोग को रोकना और स्थानीय हितों की रक्षा करना है.
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मुख्यमंत्री धामी कई मौकों पर अधिकारियों को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने और भू-कानून के उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं. मई 2026 में भी उन्होंने जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर ऐसे मामलों में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए थे.
सुशासन के साथ विकास पर भी फोकस
धामी सरकार अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को अपने व्यापक सुशासन अभियान से जोड़ती है. सरकार के अनुसार, पिछले वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 30 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है.
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं. सरकारी जानकारी के अनुसार, राज्य में 2.54 लाख से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. स्वयं सहायता समूहों को ब्याज मुक्त ऋण देने जैसी योजनाओं के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
आगे भी जारी रहेगा अभियान
मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा. सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि सरकारी भूमि का इस्तेमाल जनहित और विकास कार्यों के लिए किया जा सके. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ सख्त भूमि कानून, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण जैसी योजनाओं को जोड़कर सरकार उत्तराखंड में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रही है. ऐसे में 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का आंकड़ा सरकार के लिए जमीन और प्रशासन से जुड़ी नीतियों के असर को दिखाने वाला प्रमुख उदाहरण बन गया है.
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