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Explainer: पानी-पानी हुआ पाकिस्तान! भारत के आगे नहीं चली कोई चाल, अब दुनिया से मांग रहा मदद...

Indus Water Treaty: भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय मुसीबत में फंसा नजर आ रहा है. दरअसल, एक तरफ वह सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सामने घुटने टेक चुका है वहीं, दूसरी तरफ वह इस मसले पर कूटनीतिक हथकंडे भी अपनाने से बाज नहीं आ रहा. बता दें पहलगाम अटैक के बाद जब से भारत ने पाकिस्तान का पानी बंद किया है इस्लामाबाद पानी को लेकर दुनिया के सामने गिडगिडा रहा है. 

दरअसल, 28 अगस्त को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी के साथ बातचीत में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया और भारत के फैसले के खिलाफ समर्थन मांगा है. बता दें इशाक डार ने वॉशिंगटन में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने हितों की रक्षा करेगा.

भारत और पाकिस्तान के बीच पानी का मसला शुरू कहां से हुआ था?

जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमला हुआ. इस हमले के बाद भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया. बता दें यह संधि दशकों से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को तय करती आई थी. संधि खत्म करने के बाद अभी तक इस मले पर भारत का रुख साफ है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को शह देना बंद नहीं करता है तब तक इस संधि को दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा.

पाकिस्तान की कौन सी चाल भारत के आगे फेल हुई?

इस्लामाबाद ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की पूरी कोशिश की. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान ने भारत पर एकतरफा और गैरकानूनी रवैया अपनाने का आरोप मढ़ा है. वहीं, भारत ने वहीं इसके जवाब में दोटूक कहा कि आतंकवाद ही संधि की बहाली में सबसे बड़ी बाधा है. बताया जा रहा है कि भारत की तरफ से ये भरोसा जरूर दिया गया है कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ की चेतावनियां देता रहेगा लेकिन अपने हिस्से के पानी के इस्तेमाल पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. 

पाकिस्तान इतना घबराया हुआ क्यों है?

पाकिस्तान के प्लानिंग मिनिस्टर अहसान इकबाल ने हाल ही में खुद स्वीकार किया कि उनके मुल्क के सामने एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है. उनका कहना था कि भारत अब चाहे तो जरूरत के वक्त पानी रोककर पाकिस्तान की फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है और जब जरूरत न हो तब पानी छोड़कर बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकता है. इस डर से निपटने के लिए पाकिस्तान अब नए बांध बनाने में जुटा है ताकि संकट की घड़ी में इनका इस्तेमाल एक तरह के बफर के तौर पर किया जा सके. 

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अब पाकिस्तान किससे मदद की गुहार लगा रहा है?

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि बीते एक साल में भारी मानसूनी बाढ़, लंबे सूखे और हिंसा की वजह से पाकिस्तान में करीब 75 लाख लोगों के सामने भूख का संकट खड़ा हो गया है. हालात इतने नाजुक हैं कि लाखों लोगों तक तुरंत जीवनरक्षक मदद न पहुंचे तो बड़ी तबाही का खतरा बना हुआ है. यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं और वैश्विक एजेंसियों से मदद की अपील कर रही है.

क्या राहत के पैसों में भी गड़बड़ी सामने आई है?

एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में राहत के पैसों में भी गड़बड़ी की जानकारी मिली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्व बैंक ने हाल ही में पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि बलूचिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए गए आवास सहायता कार्यक्रम की रकम को दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में मोड़ा जा रहा है. बैंक की आशंका है कि इस फैसले से करीब 1 लाख 19 हजार से ज्यादा पात्र परिवार राहत से वंचित रह सकते हैं जिससे उनकी गरीबी और आपदा का जोखिम और बढ़ सकता है. 

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Bhado Month 2026: आज से भाद्रपद मास शुरू, भूलकर भी न करें ये काम

Bhadrapada Month 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आज 29 अगस्त से भाद्रपद मास यानी भादो के महीने की शुरुआत हो गई है। यह महीना 26 सितंबर तक चलेगा। धार्मिक दृष्टि से भाद्रपद को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश से जुड़े कई प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। मान्यता है कि इस महीने में पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य करने से विशेष फल मिलता है। वहीं, कुछ कार्यों और खान-पान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

भादो में क्या करें और किन कामों से बचें?
भाद्रपद मास को धार्मिक रूप से भक्ति, साधना और संयम का महीना माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की आराधना करते हैं। रोजाना पूजा-पाठ, मंत्र जाप और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना शुभ माना गया है।

यह महीना चातुर्मास के अंतर्गत आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में व्यक्ति को खान-पान और दिनचर्या में संयम रखना चाहिए। साथ ही अनावश्यक क्रोध, विवाद और गलत कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

भादो में कौन से बड़े त्योहार आएंगे?
भाद्रपद मास में कई प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का आयोजन होता है। वहीं गणेश चतुर्थी से गणपति महोत्सव की शुरुआत होती है।

इसके अलावा कजरी तीज, हरतालिका तीज, राधाष्टमी और अनंत चतुर्दशी भी इसी महीने के प्रमुख पर्व हैं। यही वजह है कि धार्मिक दृष्टि से इस पूरे महीने को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

भादो में पलंग पर सोने से क्यों किया जाता है परहेज?
कुछ धार्मिक परंपराओं में भाद्रपद मास के दौरान ऊंचे पलंग या रस्सियों वाली खाट पर सोने से बचने की मान्यता मिलती है। इसके बजाय जमीन पर चटाई या बिस्तर बिछाकर सोने को अधिक उपयुक्त माना गया है। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता और परंपरा का विषय है। इसे किसी सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

भाद्रपद में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचें?
भाद्रपद मास बारिश के मौसम में आता है। पारंपरिक और आयुर्वेदिक मान्यताओं में इस मौसम में पाचन तंत्र को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसलिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेने पर जोर दिया जाता है।

धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान दही, छाछ, पत्तेदार हरी सब्जियां, बैंगन और मूली जैसी कुछ चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। गुड़ और शहद का सेवन भी सीमित रखने की बात कही जाती है।

नोट: खान-पान से जुड़े ये सुझाव पारंपरिक/आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में आहार संबंधी सलाह के लिए चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।

भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व
भाद्रपद का महीना भगवान कृष्ण और गणेश की आराधना के साथ दान, सेवा और साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा से की गई पूजा और जरूरतमंदों की सहायता का विशेष महत्व होता है।

भादो का महीना केवल त्योहारों की वजह से ही खास नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ने का अवसर भी देता है। इसलिए इस दौरान धार्मिक कार्यों के साथ अच्छे आचरण और जरूरतमंदों की मदद को भी महत्व दिया जाता है।

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  Sports

सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाले 5 बल्लेबाज, 13 साल से नहीं टूटा मास्टर ब्लास्टर का विश्व कीर्तिमान

5 batsman Most matches in Test career: टेस्ट क्रिकेट में 150 से अधिक मुकाबले खेलना किसी भी खिलाड़ी की असाधारण फिटनेस, निरंतरता और समर्पण को दर्शाता है. 200 टेस्ट खेलने वाले सचिन तेंदुलकर इस लिस्ट में टॉप पर हैं. उनके बाद जेम्स एंडरसन, रिकी पोंटिंग, जो रूट और स्टीव वॉ का नाम आता है. इन पांचों दिग्गजों ने अपने करियर में हजारों रन, सैकड़ों विकेट और शानदार कैच लपककर रेड-बॉल क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया है. Sat, 29 Aug 2026 17:06:05 +0530

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