नेपाल में आई बाढ़ में भारत ने सबसे पहले पहुंचाई मदद, पड़ोसी देश को भेजी 62 टन राहत सामग्री
Nepal Floods: नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने सबसे पहले पड़ोसी देश को मदद पहुंचाई. इस बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल को 62 टन आपातकालीन सहायता भेजी है. इस तरह, पड़ोसी देश को मानवीय सहायता पहुंचाने वाला भारत पहला बड़ा देश बन गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आपदा के बाद नेपाल को सीधे मदद पहुंचाने वाला भारत पहला देश था. इस तेजी से की गई कार्रवाई से भारत की "फर्स्ट रिस्पॉन्डर" (सबसे पहले मदद करने वाले) की पहचान और मजबूत हुई है. भारत ने तुर्की और सीरिया से लेकर म्यांमार, श्रीलंका और वेनेजुएला तक, आपदा प्रभावित देशों को मदद पहुंचाने का रिकॉर्ड बनाया है.
शुक्रवार शाम तक भेजी 62 टन राहत सामग्री
नेपाल में आई बाढ़ के बाद से भारत लगातार पड़ोसी देश को मदद भेज रहा है. शुक्रवार शाम तक भारत ने तीन एयरलिफ्ट के जरिए 62 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी थी. जबकि कई अन्य देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन- जिनमें अमेरिका और चीन भी शामिल हैं, अभी भी मदद जुटा रहे हैं. पीएम मोदी ने आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की.
पीएम मोदी ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भारत हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय टीमें बचाव और राहत कार्यों में करीबी तालमेल बिठाकर काम कर रही हैं. इसके साथ ही कई अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी नेपाल को मदद देने का वादा किया है.
Third flight with assistance from India reaches Kathmandu.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 28, 2026
Relief supplies and an 11-member medical and tunnel rescue team are now on the ground.
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सर्दी-जुकाम समझकर न करें अनदेखा, हो सकता है एच1एन1 का संकेत, जानें बचाव के तरीके
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। बदलते मौसम के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इन्हीं में से एक है इन्फ्लुएंजा ए (एच1एन1)। स्वस्थ वयस्कों में यह संक्रमण ज्यादातर मामलों में अपने आप ठीक होने वाला होता है। हालांकि, इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि एच1एन1 होने पर सबसे आम लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर या मांसपेशियों में दर्द और थकान शामिल हैं। कुछ लोगों को मतली, उल्टी या दस्त जैसी परेशानी भी हो सकती है। हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कई बार शुरुआत में सामान्य फ्लू या वायरल जैसा ही महसूस होता है।
ऐसे में शरीर के संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर बुखार या खांसी के साथ शरीर में काफी दर्द और कमजोरी महसूस हो रही है, तो पर्याप्त आराम करें और खुद को हाइड्रेट रखें। पानी, सूप या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लेते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। आराम करने से शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।
एच1एन1 जैसे श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें काफी महत्वपूर्ण हैं। हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को उचित तरीके से फेंकें और हाथ साफ करें। अगर आप अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं, तो घर पर रहें और दूसरों के संपर्क में आने से बचें। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना कम करने में मदद मिलती है।
बीमारी के दौरान अपनी सेहत पर नजर रखना भी जरूरी है। अगर लक्षण 5–6 दिनों में कम नहीं होते, लगातार बने रहते हैं या हालत बिगड़ती महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। खासतौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सा सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में भी संपर्क किया जा सकता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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