कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पड़ोसी देश को तत्काल मानवीय एवं राहत सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए जाएं। उन्होंने 28 अगस्त को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखा। खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा कि नेपाल में बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है और हजारों लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय तथा अन्य आवश्यक सहायता की तत्काल जरूरत का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से नेपाल के प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त मानवीय एवं राहत सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर राहत एवं बचाव कार्यों को आगे बढ़ाने की अपील भी की। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, “मैं नेपाल के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ के कारण फंसे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों को लेकर भी चिंतित हूं।
संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी के प्रयास तेज करने तथा उनकी सुरक्षित और जल्द भारत वापसी के लिए सभी आवश्यक इंतजाम करने के लिए जरूरी निर्देश जारी किए जाने का अनुरोध है।”
उन्होंने कहा, “विदेश मंत्रालय से मिली नवीनतम जानकारी के अनुसार, करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।”
गृह मंत्री शाह को लिखे पत्र में खरगे ने कहा, “यह बड़े दुख के साथ लिख रहा हूं कि नेपाल हाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण उत्पन्न गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। जान-माल की क्षति, घरों और बुनियादी ढांचे का व्यापक विनाश तथा अनगिनत लोगों के विस्थापन ने प्रभावित समुदायों को अत्यंत संकट की स्थिति में पहुंचा दिया है।”
उन्होंने कहा, “भारत और नेपाल के लोगों के बीच गहरा एवं स्थायी संबंध है। इस गहरे दुख की घड़ी में भारत को अपने पड़ोसियों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए और इस विनाशकारी आपदा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता देनी चाहिए।”
खरगे ने नेपाल को तत्काल और व्यापक मानवीय तथा आपदा राहत सहायता देने पर विचार करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “जहां भी आवश्यक हो और नेपाल सरकार के साथ समन्वय में, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों की तैनाती पर विचार किया जा सकता है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में बचाव, निकासी और राहत अभियानों में सहायता की जा सके।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में एनडीआरएफ की विशेषज्ञता और अनुभव लोगों की जान बचाने तथा संकट का सामना कर रहे लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण सहयोग दे सकते हैं। खरगे ने उम्मीद जताई कि गृह मंत्रालय इस मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाएगा तथा नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों तक भारत की सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करेगा।
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नेपाल सरकार ने भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अपने शुरुआती फैसले को बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय खोज और बचाव टीमों को देश में काम करने की अनुमति दे दी है। आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने और संबंधित देशों के भारी कूटनीतिक दबाव के बाद यह निर्णय लिया गया है। अब भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के विशेष दल टनल बचाव, डीएनए टेस्टिंग और फोरेंसिक जांच जैसे तकनीकी और विशिष्ट क्षेत्रों में नेपाल की सहायता करेंगे।
सरकार ने बुधवार को कहा था कि नेपाली बचावकर्मी खोज अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी बचाव टीमों को अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, एक दिन के भीतर ही अधिकारियों ने कुछ खास क्षेत्रों में सीमित अंतरराष्ट्रीय मदद लेने का फ़ैसला किया, जिनमें टनल (सुरंग) से बचाव, DNA टेस्टिंग और फ़ोरेंसिक जांच शामिल हैं। काठमांडू पोस्ट को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, "हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारी दबाव मिला कि कम से कम खोज और बचाव टीमों और कुछ विशेषज्ञों को आने दिया जाए, क्योंकि बाढ़ में उनके नागरिक भी लापता हो गए हैं। हम कुछ खास क्षेत्रों में सीमित संख्या में विशेषज्ञों को अनुमति दे रहे हैं।"
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रॉयटर्स को बताया, "चीन के साथ हिमालयी सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल को उन खास और तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी मदद की ज़रूरत है जहां उसके पास विशेषज्ञता की कमी है, लेकिन खोज और बचाव कार्यों के लिए विदेशी मदद की ज़रूरत नहीं है।"
550 से ज़्यादा लोगों की मौत, लगभग 2000 अभी भी लापता
अचानक आई बाढ़ ने भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे इलाकों को तबाह कर दिया, जिससे शुक्रवार तक 550 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई। नेपाल आपदा प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, 1,924 लोग अभी भी लापता हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के नवीनतम रिकॉर्ड के अनुसार, लापता विदेशियों में सबसे ज़्यादा संख्या भारतीय नागरिकों की है (288), इसके बाद 100 चीनी, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक हैं।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के आधार पर, एक अंतर-मंत्रालयी समन्वय समिति ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से मदद को मंज़ूरी दी है। इन चार देशों के विशेषज्ञ और तकनीशियन टनल से बचाव कार्यों, DNA टेस्टिंग और फ़ोरेंसिक जांच में मदद करेंगे।
राहत सहायता की पेशकश करने वाले कई अन्य देशों ने भी विशेषज्ञ टीमें भेजने की इच्छा जताई है। हालांकि, नेपाल ने ऐसी सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया है।
काठमांडू में कम से कम दो विदेशी दूतावासों के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने लापता नागरिकों का पता लगाने में मदद के लिए टीमें भेजने का बार-बार अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
अपर त्रिशूली-1 में 576 लोग लापता
अपर त्रिशूली-1, जो 216 MW का रन-ऑफ-रिवर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है, वहां स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है। शुक्रवार देर रात तक यहां 576 कर्मचारी लापता थे। जब यह आपदा आई, तब प्रोजेक्ट पर लगभग 1,350 लोग काम कर रहे थे।
नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IPPAN) के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट उत्तम भ्लोम ने कहा, "576 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वे कहां हैं, इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। अगर कुछ लोग सुरंगों के अंदर फंसे हैं और उन तक समय पर पहुंचा जा सके, तो उन्हें बचाने की संभावना है।"
रेस्क्यू टीमों को कई हाइड्रोपावर साइट्स तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बाढ़ और भूस्खलन ने सड़कों को नुकसान पहुंचाया है और मोबाइल व टेलीफोन नेटवर्क को बाधित किया है। कम्युनिकेशन बंद होने से लापता लोगों का पता लगाने और उनकी स्थिति जानने की कोशिशें और मुश्किल हो गई हैं।
अधिकारी प्रभावित साइट्स तक पहुंचने के लिए प्राइवेट हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करने पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि, लैंडिंग के लिए सीमित जगह और टेक्निकल व सुरक्षा चुनौतियों ने हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन को मुश्किल बना दिया है।
भारत ने मदद की पेशकश की, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत ने सार्वजनिक रूप से टनल रेस्क्यू टीम, मेडिकल टीम और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के कर्मियों की मदद की पेशकश की है।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी शुक्रवार को अपने नेपाली समकक्ष खनाल से बात की और कहा कि नई दिल्ली ने कई तरह की मदद की पेशकश की है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि 10 टन मानवीय सहायता लेकर तीसरी फ्लाइट काठमांडू के लिए रवाना हो गई है। इस खेप में पोर्टेबल जेनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाने के पैकेट और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल थीं। नेपाल को राहत सामग्री की चौथी खेप के साथ डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू स्पेशलिस्ट की 11 सदस्यीय टीम भी भेजी गई।
दक्षिण कोरिया और अन्य देश भी शामिल हुए
दक्षिण कोरिया ने भी मदद की पेशकश की है, क्योंकि उसके नौ नागरिक संपर्क से बाहर हो गए हैं। विदेश मंत्री चो ह्यून ने कहा कि उन्होंने काठमांडू से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोरिया की प्रॉम्प्ट रिस्पॉन्स टीम आसानी से खोज और बचाव अभियान चला सके। उन्होंने कहा कि सियोल अपनी कोरिया डिजास्टर रिलीफ टीम को तैनात करने की तैयारी कर रहा है।
विदेशी टीमें रसुवा और नुवाकोट में हाइड्रोपावर सुरंगों पर ध्यान केंद्रित करेंगी, जहां 14 प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। नेपाल को DNA टेस्टिंग के लिए विदेशी मदद भी मिलेगी, क्योंकि वहां की लैब की क्षमता सीमित है। खनाल ने कहा कि एक्सपर्ट्स बड़ी संख्या में सैंपल की जांच करने और शवों की तेज़ी से पहचान करने में मदद करेंगे, ताकि उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सके।
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